आधा हिंदुस्तान सफर में रहता है

चौकिये मत ....जी हां..... यही सच्चाई है, आधा हिंदुस्तान सफर में रहता है। अरे...अरे विश्वास नहीं होता तो जनाब जरा बस स्टैंड और रेलवे ... Read more

गोस्वामी तुलसीदास के प्रिय राम

संवत 1956 की श्रावण शुक्ल सप्तमी के दिन जन्में हिन्दी साहित्य के महान कवि तुलसीदास के जीवन पर राम का प्रभाव बचपन से था कहा जाता है क... Read more

समय मिला तो गरीबो को मिटाने का साहस करूँगा

एक दिन मै सफर पर जा रहा था। एक भिखारी भीख माँग रहा था। मैने पूछा - भीख क्यों मांग रहे हो भइय्या। श्रम करके क्यों नहीँ कमाते रूपई... Read more

भगतसिंह पैदा हो, मगर पड़ोसी के घर में

अरे..रे..रे, आप गलत सोच रहे है, हम उत्तेजित नहीं हो रहे है बल्कि ये तो आधुनिक परिवेश का कड़वा सच बन गया है कि ‘‘भगतसिंह पैदा तो हो, म... Read more

क्या उरई का नाम गिनीज बुक में दर्ज करा पाएंगे मच्छर ?

क्या उरई का नाम गिनीज बुक में दर्ज करा पाएंगे मच्छर ? भले ही यह सवाल सुनकर आप हक्के बक्के रह गए हो और सवाल बेतुका लग रहा हो यह सवाल... Read more

माना कि आप सूरज हो मगर ढलते हुये

अपनों ने हमें जीने का नजरिया सिखा दिया। ठोकरो ने हमें चलना सिखा दिया। क्या हुआ जो छीन लिया आपने हौसला पंखों ने हमें मंजिल पाना सि... Read more

मेरा हक, उन्हीं के कुत्ते खाते है।

अब वो हर रोज दीवाली मनाते है। अच्छे दिन नस्ल पहचान कर आते है। मोहताज है जो दो वक्त की रोटी को, अपने हिस्से में दुःख ही दुःख पाते ... Read more

खण्डहर में तब्दील किला बदल सकता तकदीर

रिपोर्ट- पारसमणि अग्रवाल अपने एक निजी कार्य से जतारा के प्रवेश द्वार से महज थोड़ी दूर निकलने पर गाड़ी से जतारा किले पर नजर गई और अच... Read more

बढ़ती बेरोजगारी के लिये सिर्फ सरकार जिम्मेदार नही

देश की जटिल समस्याओं की लिस्ट में अपना नाम टॉप समस्याओं में शुमार करा चुकी बेरोजगारी की समस्या देश के लिये कैंसर जैसी बीमारी है। बढ़त... Read more

दूर होकर भी पास हो तुम।

सांसो का विश्वास हो तुम। धड़कनों की आस हो तुम । करवटों में बीत जाती रातें, दूर होकर भी पास हो तुम। तन्हाई के इस आलम में, हर लम्ह... Read more

नाकामियों को छुपाने के लिये किया जाने लगा है मुआवजा का इस्तेमाल

भारत को एक कृषि प्रधान देश कहा जाता है लेकिन साहिब, जरा गौर कीजिये, वक्त बदल रहा है आजादी से लेकर भले ही आज तक भारत के कृषि प्रधान ह... Read more

कफ़न ओढ़ने को मजबूर है प्रतिभा

भारतीय जन नाट्य संघ की पत्रिका में प्रकाशित प्रधान सम्पादक की कलम से........... . कफ़न ओढ़ने को मजबूर है प्रतिभा जँहा एक ओर भारत... Read more

बेशक बहुत कीमत थी गुजरे जमाने में

बिछड़ गये कई अपने तुम्ही गले लगाओ। यार कोई तो अब एक नई आस जगाओ। बेशक बहुत कीमत थी गुजरे जमाने में, कोई प्यार के बदले प्यार दिलाओ। ... Read more

महिला दिवस विशेष- नारी विमर्श का कड़वा सच

आधुनिक परिवेश में अधिकांश लेखकों द्वारा नारी विमर्श पर सृजन किया जा रहा है जो कि नारी उत्थान का इतिहास स्वर्णिम अक्षरों में रचने में... Read more

चाहिये था रोजगार,मिली बेरोजगारी

जी हाँ, "चाहिये था रोजगार मिली बेरोजगारी" ये किसी हास्यपद व्यंग की पंक्तिया नहीँ है बल्कि ये एक ऐसी कड़वी हकीकत है जिसे सामाजिक परिदृ... Read more

वादा आज तुम तोड़ देना

वादा आज तुम तोड़ देना। बेवफाओं में नाम जोड़ देना। लिखी थी इबारत प्रेम की, अब उन पन्नों को मोड़ देना। याद आये अगर तुम्हें मेरी, ... Read more

यह कैसा प्यार

प्यार शब्द का कानों को स्मरण होते ही मन में एक अजीब सी उमंग एक अनोखा सा उत्साह पल्लवित हो जाता है। प्यार की पवित्रता,प्यार के विश्वा... Read more