Pankaj Sharma

Joined October 2016

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"मेरी डायरी से"

शर्मो-हया का चादर ओढ़े हुए थे, देखा मैंने एक दिन अधर से अधर जोड़े हुए थे। लगता है थोड़ा सा लिहाज़ किया था मेरा सायद, देखकर मुझको ... Read more

"मेरी डायरी से"

मैं अब तुझे खोना नई चाहता, यादों में तेरी मैं अब रोना नही चाहता, चल रहा है जैसे बस ऐसे ही चलने दो, पता है मुझे, ख़ुदा भी हमें मि... Read more

"मेरी डायरी से"

पगली कहती थी, मुझे शायरी पसन्द है, मैं भी कम्बख़्त, कहाँ उसकी बातों में आ गया, सोचा! ग़र इन्हें शायरी पसन्द है तो, शायर भी पसन... Read more

"मेरी डायरी से"

, सुनती हो! देखता हूँ मैं अक्सर, तुम्हारे पास भी कुछ, ग़म की दो-चार बोतले रखी रहती हैं, सिरहाने पर, हमेशा भरी हुई, कभी दो-चार... Read more

"मेरी डायरी से"

काश तुम मेरे दर्द को समझ पाते, तो ऐसे ना मुझे तुम कभी तड़पाते। मैं तो कब से तेरी राह देख रहा हूँ, काश तू जैसे गये वैसे वापस लौट आ... Read more

"मेरी डायरी से"

वो सपने को सपना बनाने में लगे हैं, हम सपने को अपना बनाने में लगे हैं, वो तो शर्त लगा रहें हैं बाज़ी जितने की, हम भी शर्त हारकर उन... Read more