ओनिका सेतिया 'अनु '

फरीदाबाद (हरियाणा )

Joined January 2017

नाम — सौ .ओनिका सेतिआ “अनु’
आयु — ४७ वर्ष ,
शिक्षा — स्नातकोत्तर।
विधा — ग़ज़ल, कविता , लेख , शेर ,मुक्तक, लघु-कथा , कहानी इत्यादि .
संप्रति- फेसबुक , लिंक्ड-इन , स्वयं द्वारा रचित चेतना ब्लॉग , और समय-समय पर पत्र-पत्रिकाओं हेतु लेखन -कार्य , आकाशवाणी इंदौर केंद्र से कविताओं का प्रसारण .

Books:
आनंद रसधारा (भजन),
अफ़साना (ग़ज़ल -गीत संग्रह )

Awards:
पर्यावरण प्रहरी ( ग्रीन केयर सोसाईटी ,मेरठ )
साहित्यपीडिया काव्य सम्मान (साहित्यपीडिया परिवार )

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एक शिकायत खुदा से .... ( गजल )

ज़माने को तो शिकायत है हमसे , और हमें शिकायत है खुदा तुम से । क्या ज़रूरत थी हमें यहाँ लाने की, रहे सब नज़ारे इस जहां के बेगाने से ।... Read more

कफन तैयार है (गजल )

कुछ है इससे बेखबर और कुछ हैं अंजान , के कोई सी रहा है अपने लिए एक कफन । किस कदर खुद को तबाह औ बर्बा... Read more

राजनीति का नशा (हास्य -व्यंग्य रचना )

राजनीति का नशा जब सर चढ़कर बोलता है , मन -बावरा सत्ता के लिए मचल उठता है ।] साधू,सन्यासी,पीर-फकीर तो क्या सूफी गायक, इसके जादू ... Read more

तमाचा ...... बॉलीवुड के नकलचियों के मुंह पर ( हास्य -व्यंग्य रचना )

आप बनी हुई सुंदर रचना को बिगाड़ने से बाज़ आइए , बहुत हो गयी नकल अब अपनी औकात पे आ जाइए । हमें एहसास है आपके पास है उम्दा विषयों क... Read more

विकास -पथ पर कश्मीर

टूट गयी अब ३७० की दीवार , विकास पथ पर आगे बढ़ेगा । देखो ! हमारा कश्मीर अब , राष्ट्र के साथ-साथ चलेगा । आतंकवाद के काले सायों से... Read more

अरुण ! तुम क्यों चले गए ( कविता) { पूर्व वित्त मंत्री श्री अरुण जेटली जी की स्मृति में ॥}

अभी अभी तो देश जागा था , और लेने लगा था अंगड़ाई । विकास के आयामों को छूने को , सारे विश्व में पैठ अपनी जमाई । उसी पथ फिर अंधेरा क... Read more

कहाँ गए वोह लोग ?कहाँ गया वोह ज़माना ? (ग़ज़ल)

कहाँ गए वो लोग जिनकी आईने सी शख्सियत थी. खुदा से जो उनको मिला दे ऐसी उनकी हैसियत थी . ... Read more

( पूर्व विदेश मंत्री स्व श्रीमती सुषमा स्वराज जी की याद में एक कविता ) हमारी सुषमा

दुश्मनो का काल थी, देश की ढाल थी , हमारी सुषमा... Read more

जिंदगी के हादसे

हादसों से भरे इस जहान में , जिंदगी जिन हालातों से गुज़रती है. हर... Read more

आखिर इतना गुस्सा क्यों ? (ग़ज़ल )

आज के इंसान में है आखिर इतना गुस्सा क्यों ?, जो बन बैठा है अपनी ही ज़ात का दुश्मन यह क्यों ? इंसान जैसा दिखता तो है मगर इंसान त... Read more

नराधम का मिटना बेहतर है ,,,(कविता)

जिस बुरी नज़र से कोई किसी नारी /मासूम बच्चियों को देखे , उस बुरी नज़र को तो बुझा देना बेहतर है. जिस अपनी गन्दी ज़बान से इन्हें दे ... Read more

शिक्षा के मंदिर नहीं ,यह है शिक्षा की दुकाने (व्यंग्य कविता )

शिक्षा के मंदिर नहीं ,यह तो है शिक्षा की दुकानें , भला असलियत इनकी हम किस तरह पहचाने . मार्गदर्शन के केंद्र नहीं यह सपनो के सौ... Read more

जल गए अरमान (ग़ज़ल) { सूरत कोचिंग सेंटर अग्निकांड में मृत मासूमों को श्रधांजलि}

जाने कैसे ,क्यों और किसलिए ऐ खुदा ! इन २० चिरागों को किसने बुझा दिया ? कमसिन तन में नाज़ुक से अरमां पाले , किसने उन्हें बेदर्दी ... Read more

चुनाव का मौसम है आया ! ( हास्य-व्यंग्य कविता )

चुनाव का मौसम है आया , शरारत करने का मन ललचाया , नेताजी कि कुर्सी का। … ... Read more

यह अश्क जो बहते हैं ..... (ग़ज़ल)

यह अश्क जो बहते है इस तरह , जिंदगी से इनका नाता है इस तरह . जिंदगी चा... Read more

अन्नदाता के हक़ में ..... ( कविता )

वोह सुबह -शाम खेतों पर काम करते हैं, कड़ी मेहनत कर अपना पसीना बहाते हैं. अन्न की पैदावार हेतु जी जान लगाते हैं, तभी हमा... Read more

कशमकश -ए-जिंदगी (ग़ज़ल)

उफ़ ! कितनी कशमकश है जिंदगी में गर आ जाये ऐसे में मौत तो क्या अच्छा हो। ... Read more

माँ तो ऐसी ही होती है ..... (माँ का बलिदान ) {कविता }

अपनी बगिया के फूलों को , रक्त से अपने सींचती है । उनक... Read more

मैं भी ...... ( ग़ज़ल )

दुआ है यह इंकलाब अब ज़ारी रहे , मैं भी ,मैं भी का शोर यह ज़ारी रहे . गाँव-गाँव ,शहर-शहर में जो हैं पीड़ित , वोह भी उठायें आव... Read more

क़ज़ा के नाम पैगाम .. (गज़ल)

काश ! ये तकदीर मेहरबान हो जाये , एक पैगाम क़ज़ा का मेरे नाम आये . जिंदगी अब ये हमसे ढोई नहीं जाती , हम इस बेमुरव्वत से अब तंग... Read more

मुझे मत मारो ( कविता) { मादा पशु-पक्षियों की वेदना }

मुझे मत मारो , कृपया मुझे मत मारो , तुम्हें तुम्हारे बच्चों का वास्ता , मेरे भी घर में हैं मेरे छोटे-छोटे बच्चे , वोह मेरा र... Read more

अनुशासनहीनता (व्यंग्य कविता )

पिता भूल गया अपने पितृत्व को, और माता अपना मातृत्व भूल गयी . ना रहा वोह अनुशासन और नियंत्रण , संतान जो अब हाथ से निकल गयी . ... Read more

आन्दोलन या गुंडागर्दी (कविता)

हंगामा और आगजनी से बात नहीं बनती , बात बनती है मसले को शांति से सुलझाने से . तुम जिसे कहते हो आन्दोलन; जी नहीं जनाब! यह तो गुंड... Read more

इन हसरतों से कह दो। .... (ग़ज़ल)

इन हसरतों से कह दो की न मचलें बेवज़ह , मैने इन्हें अक्सर दिलों में ही टूटते देखा है। ... Read more

क्यों रूठे हो मोहन (गीत , भजन)

क्यों रूठे हो मोहन मुझसे , कोई कारण यदि जान पाऊँ। ... Read more

कैसा स्वतंत्रता दिवस ? (कविता)

देश मना तो रहा है स्वतंत्रता दिवस , मैं पूछना चाहती हूँ कैसा स्वतंत्रता दिवस ? तुझे जुल्मी गोरे (ब्रिटिश साम्राज्य ) के ज़ुल्मों से... Read more

हाय यह मोटापा ! (हास्य -व्यंग्य कविता)

जाने कैसी समस्या है यह , जो किसी तरह मिटती नहीं. ... Read more

आफ़ताब -ऐ -मौसिकी : स्व.मुहम्मद रफ़ी (पुण्य-तिथि पर विशेष )

मौसिक़ी का फ़रिश्ता था वोह, मौसिक़ी पर रखता था ईमान . सुरों से खेलता था जिस तरह , सुनने वाले हो जाते थे हैरान . आवाज़ थी करिश्माऐ क... Read more

गुज़र गया ज़माना ....

गुज़र गया ज़माना सुरीले ,सुमधुर गीत-संगीत का , अब तो बस चारों ओर शोर ही शोर ,बस शोर है. हमारे दिल तो क्या ,हमारी रूह पर भी था जिसका ... Read more

नारी

नारी ! तुम पुष्प हो , और यह जग है उपवन , सुगंध से अपनी महकाओ इसे . नारी ! तुम उत्तर हो , और यह जग प्रश्न , ... Read more

जवानी के सही मायने (ग़ज़ल)

बहुत गलत समझ बैठे हो तुम जवानी को , ओ नौजवानों ! ज़रा समझो अपनी नादानी को . जवानी दीवानी होती है चलो हमने माना , तो वतन के नाम क... Read more

हमें क्या मालूम था !! ( शहीद-ऐ- आज़म भगत सिंह का दर्द )

हमें क्या मालूम था , आज़ाद भारत की यह तस्वीर होगी . इस देश के लिए की गयी हमारी , सभी कुर्बानियां इस तरह ज़ाया होगी . हमें... Read more

दुनिया -ऐ- आतिशखाना ( ग़ज़ल)

गुज़रे में ज़िन्दगी के हमने यही है जाना , दुनिया कम नहीं किसी आतिश्खाने से। ... Read more

प्यारी माँ (कविता)

जुग -जुग जियो हमारी प्यारी माँ , जब तक हैं आसमां में चाँद -सितारे . आपकी ममता का आँचल सर पर रहे , जिस तरह आसमां की छत्र-छाया स... Read more

जी चाहता है .. (ग़ज़ल)

गुमनामी के अंधेरों से निकलकर उजालों में आने का , बड़ा जी चाहता है हमारा भी बहुत मशहूर होने का . कब से गहरी खाई में पड़े हैं,सदा... Read more

नारा है यह फ़िज़ूल ... (ग़ज़ल )

बेटी बचाओ ,बेटी पढाओ , नारा है यह फ़िज़ूल, नारा ही है न ,ऐसे तो कई बजते रहते है बिगुल . महज नारे बाजी से कोई बात नहीं बनती ,... Read more

खुदा है भी या नहीं ! (ग़ज़ल)

खुदा है भी या नहीं ! (ग़ज़ल) सूना था कभी अपने बुजुर्गों से ,याद रखना , ... Read more

पापा ! आप कहाँ हो ? ( एक पुत्री का पत्र पिता के नाम कविता के रूप में )

जबसे आप गए हो , अपने चमन से . मैं भी जी ना सकी , आप के बिन अमन से . याद करती है आपको ... Read more

सुनो ! हे राम ! मैं तुम्हारा परित्याग करती हूँ .... ( जनक-नंदनी सीता का उलाहना )

सुनो ! हे राम ! मैं तुम्हारा परित्याग करती हूँ .... ( जनक-नंदनी सीता का उलाहना ) सुनो ! हे ... Read more

तुम हो कैसे इंसान ? (ग़ज़ल)

लगाकर आग तुम तमाशा देखते हो , उसी आग में अपने स्वार्थ की रोटियां सेकते हो . भड़का कर लोगों को तुम्हें क्या सुख मिलता है, अप... Read more

उदास आँखों वाली लड़की (कविता)

एक लड़की है अन्जानी सी , जिसकी आँखों में रहती उदासी . ह्रदय में है भावो का सागर , मगर जल बिन मीन जैसी प्यासी. सागर में मोती ह... Read more

यह कैसी दिल्लगी ?

आखिर क्यों पालते हैं लोग, अपने घरों में जानवर ? समय बिताने के लिए , या दिल बहलाने के लिए? समय तो चलो ! अच्छा गुज़र जाता है. ... Read more

करो नारी का सम्मान (कविता)

नारी है देवी स्वरूपा , इतना रखो संज्ञान . नारी है यह प्रकृति , नारी है धरती माँ . हर नदी है नारी स्वरूपा , आलोकिक शक्ति रूप म... Read more

हम है तूफान .....(ग़ज़ल )

हम है तूफान .....(ग़ज़ल ) हम है तूफ़ान ,और कहकशा से कम नहीं , तुम्हा... Read more

बेचारा कवि-मन (कविता)

बेचारा कवि-मन (कविता) ओफ़्फ़ो ! कितना शोर है इस शहर में , भला ! मैं अपने वा... Read more

महिला दिवस कैसे मनाया जाये ... (कविता)

जब तक है विश्व में पुरुषों का वर्चस्व , महिलाओं की तो छवि धूमिल रहेगी. जब तक रहेगा उनपर पुरुषों का एकाधिकार , अपनी पहचान वोह कैस... Read more

एक पेड़ का भावपूर्ण ख़त .. (कविता)

मेरे बगीचे का पेड़ , यूँ तो खामोश खड़ा रहता है . जाने क्यों मुझे उसकी ख़ामोशी में . ... Read more

पकोड़ों की दुकान ... (व्यंग्य कविता)

बुजुर्गों से कभी हमने सुना था, खाली दिमाग शैतान का घर होता है . यूँ ही खाली बैठे हाथ मलने से , उँगलियाँ चटकाने से क्या जिंदगी ... Read more

हम पंछी एक डाल के ... (कविता )

हम पंछी एक डाल के , भिन्न -भिन्न है हमारी बोलियाँ , और भिन्न -भिन्न है हमारे रंग . भिन्न -भिन्न है हमारे आचार -व्यवहार .... Read more

मौत की कहानी (ग़ज़ल)

यह जिंदगी तो दोस्तों!फानी है , कहते है मौत जिसे ,एक हैरानी है . जन्म के साथ ही जिसकी समझ लो , लिखी जानी अमिट कहानी है . ... Read more