नूरफातिमा खातून नूरी

कुशीनगर , तमकुही

Joined February 2020

नूरफातिमा खातून” नूरी”
सहायक अध्यापिका
प्राथमिक विद्यालय हाता-3 ब्लाक-तमकुही
जिला-कुशीनगर। उत्तर प्रदेश
पिता का नाम-अख्तर हुसैन
माता का नाम-सबीहा खातून
शौक-मुक्तक, छन्दमुक्त कविता लेखन

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छंदमुक्त कविता

सूरज की तरह दहकना ठीक है, फूलों की तरह महकना ठीक है! जिन्दगी में हमेंशा आगे बढते रहें, दौड़ ना सको तो सरकना ठीक है! मौसम ,... Read more

मुक्तक

हैं खुशहाली सावन की घटाओं में बड़ी राहत है इनकी ठंडी हवाओं में होगा बड़ा एहसान आपका दोस्तों हमें भी रखियेगा अपनी दुवाओं में क... Read more

छंदमुक्त कविता

बहुत ज्यादती कर लिया हमने अपनों की ना खबर लिया हमने शराफत से अब काम नहीं चलता ईंट के बदले पत्थर लिया हमने उनके घर से ... Read more

मोबाइल की महिमा

सबकी महिमा बहुत हुई जी अब मोबाइल की महिमा करते हैं सुबह -सवेरे उठते ही मोबाइल का दर्शन करते हैं है प्रेम इतना मोबाइल से ... Read more

छंदमुक्त कविता

दिन उदाशी में रात आंखों में कटता था दिन रात मन हमारा दिये सा जलता था किस -किस के तानों से दिल चाक करते कौन समझता किससे मन की ब... Read more

मुक्तक

बरसात का मौसम लुभावन है मौसम का राजा तो सावन है यहां बुद्ध, महावीर, कबीर हुए भारत की धरती ही पावन है। नूरफातिमा खातून "नूरी" ... Read more

छंदमुक्त कविता

जिन्हें ईमानदारी का आदत होता है अक्सर उनका ही शिकायत होता है है उन वीरों की माताओं को सलाम जिनके दम से मुल्क सलामत होता है ... Read more

छंदमुक्त कविता

हमें कार्य के लिए वेतन चाहिए बुढ़ापे के लिए पेंशन चाहिए सांसद, विधायक पेंशन पायें कर्मठ कर्मचारी न्यू पेंशन पायें इस का... Read more

छंदमुक्त कविता

हम तो आधुनिक कहलाने लगे हैं छोड़ हिन्दी अंग्रेजी बतियाने लगे हैं छोड़ा हमने दाल पुरी,लिट्टी बनाना चोखा , चटनी और खीर बनाना ... Read more

घर-घर संदेश पहुंचाना है

घर-घर संदेश पहुंचाना है पर्यावरण को बचाना है सबसे यही अर्ज करें पानी कम खर्च करें नदियों को साफ कराना है पर्य... Read more

चलिए कुछ दिन उपवास करते हैं

चलिए कुछ दिन उपवास करते हैं गरीब के भूख का एहसास करते हैं जिसने हमें अनमोल जीवन दिया उसके नाम अपना हर सांस करते हैं दू... Read more

आइए मिलकर वृक्ष लगाए हजार

आइए मिलकर वृक्ष लगाए हजार नेकी कमाये और शुद्ध मिले बयार पेड़ की सुरक्षा हो अपने पुत्र जैसा पेड़ बचाओ न करो अत्याचार ... Read more

मेरे देश के नौजवानों का उद्धार होना चाहिए

मजहब के साथ रोजगार पर भी विचार होना चाहिए देश के बेरोजगार नौजवानों का उद्धार होना चाहिए बेरोजगारी ने ही मजदूरों को दर-बदर भट... Read more

छंदमुक्त कविता

कभी इन्कार करता है कभी इकरार करता है कभी प्यार करता है कभी तकरार करता है आदमी का स्वभाव तो होता ही है ऐसा छोटी सी जिंदग... Read more

छंदमुक्त कविता

ठोकरें लगने पर भी उठना पड़ता है, खुशी के लिए बहाना ढूंढ़ना पड़ता है। मुहम्मद (स.अ.)बुध्द, महावीर बनने के लिए, घर छोड़ दर-बदर ... Read more

मेरा स्कूल खुलेगा कब

घर बैठे-बैठे सेवानिवृत्त की भावना आ गई छुट्टी में भी छुट्टी ना हो ये कामना आ गई सुबह जल्दी से काम निपटा कर जाते थे स्कूल बने आ... Read more

चलो चाकलेट के बाग़ लगाते हैं

चलो चलकर चाकलेट के बाग़ लगाते हैं मैंगो फ्रुटी से भरा हुआ तालाब बनाते हैं बिस्किट के पत्ते लालीपाप की कलियां हों सेव, नमकीन,ल... Read more

छंदमुक्त कविता

मन बेचैन हुआ मजदूरों की लाचारी से दुनिया ने क्या न झेला इस महामारी से मीलों दूर सफ़र करना आसान नहीं है परिवार, सामान साइकिल की ... Read more

छंदमुक्त कविता

मेरे जिन्दगी का पहला ऐसा रमजान है, अकेले ही इफ्तार से मन हलकान है। नये कपड़ों के लिए परेशान हैं बच्चे, लाक डाउन, कोरोना से वे... Read more

अम्मा

उंगली पकड़ा के चलना सीखाती है मां हर ज़ख्म पर मरहम लगाती है मां जमाना जब भी हमें ठोकर लगाया उठा कर अपने सीने से लगाती है मां... Read more

कविता

कोरोनावायरस तो दूर था कुशीनगर से हमसभी तो होने लगे थे बेफिकर से कानपुर से फैलाया तरया सुजान तक पुलिसकर्मियों ने किया सम्बंधिय... Read more

मुक्तक

काम किया सर्द में गर्मी की तपिश में मां-बाप ने क्या न झेला हमारी परवरिश में वो बेकार की चीज़ें अक्सर हो जातें हैं बाद में तु रख ऐ... Read more

ग़ज़ल

एक और एक दो के बजाय ग्यारा हो जाए आदमी का आदमी फिर से सहारा हो जाए इंसान को रोजगार और प्रेम ही तो चाहिए विकसित देशों की तरह देश... Read more

मुक्तक

जो मेहनत करके खाये वो मजदूर हैं जो लेखनी चलाये कबीर, तुलसी,सूर है पसीना बहाया ईमानदार ,मेहनती कहलाया जो खून खराबा कराते वो मलिक क... Read more

मुक्तक

नाव पर बैठा आदमी कहां मुमतईन होता है प्यासा है मगर समुद्री पानी नमकीन होता है सुख दुःख मिलाकर जिन्दगी मुकम्मल होता है सुबह-शाम मि... Read more

ग़ज़ल

छोटी सी जिंदगी में आदमी चूक जाता है शीशा तोड़ने वाला पत्थर भी टूट जाता है किसी को छोटा समझने की कोशिश ना करें छोटी सी चींटी के आग... Read more

ग़ज़ल

उस्तादों का जहां भी सम्मान होता है वहां का आम आदमी भी महान होता है सबके दिलो दिमाग पर वो राज़ करता है असल ज़िन्दगी में वही धन... Read more

ग़ज़ल

जाति-पाति के नाम पर आग लगाते हैं साफ-पाक दामन पर दाग लगाते हैं पूरा जीवन बदहाली में ही गुज़र गया सारी उपलब्धियां मरने के बाद लगात... Read more

बाल कविता

(आओ हाथ जोड़ करें विनती दिला दें प्रभु कोरोना से मुक्ति घर बैठे पढ़ाई जा रही पिछे याद करते हैं दस तक गिनती) मीना के पास एक गु... Read more

बाल कविता

क ख ग घ ङ घर में रहो बन्दा च छ ज झ ञ गर्म पानी पीना ट ठ ड ढ ण लाक डाउन है सारा त थ द ध न साबुन से हाथ धोना प फ ब भ म पढ़ाई जारी... Read more

मुक्तक

ये तहजीब की नगरी है यहां लोग संस्कारी हैं बिखरे को सम्भाले यहां ऐसे परोपकारी हैं हम कह नही सकते कि जमाना दकियानूस है घर बाहर दोन... Read more

मुक्तक

जहां गंगा बहती है सब मिलके रहते हैं चेहरा देखते ही भावना को समझते हैं खुद भुखे रह दुसरो को खाना खिलाते जहां एकता उसे हिन्दुस्तान... Read more

कविता

बर्बादी ही होती है आपसी रंजिश में इंसान कैद होता है वक्त की गर्दिश में समय रहते खुद को न सम्भाल पाओगे दलदल से खुद को न निकाल पाओ... Read more

कविता

एक राह को चौराहा बना दिया जगह जगह नफरत फैला दिया यकीन न आया इन आंखों को मुस्कुरा के घर से वापस लौटा दिया खड़े के खड़े ही रह गये... Read more

कविता

ग़म धूप ख़ुशी छांव की तरह कभी सुबह कभी शाम की तरह मंज़र तो आज भी वही है यारों मगर जिन्दगी गुज़रे नाव की तरह कई जगह घूमने गए हम ... Read more

ग़ज़ल

जिन्दगी का कोई पल अनछुया न रह जाए बुझा शाम का कोई भी दिया न रह जाए लाना है हर बात को ज़माने के सामने अंजाने में कोई बात छिपा न... Read more

मुक्तक

आज़ करना है वो बाद में कर ये है कोरोनावायरस का असर कुछ महीनों के लिए आलसी बन दूर -दूर तक न आइए नज़र नूरफातिमा खातून" नूरी"... Read more

ग़ज़ल

लाख अच्छा लगे किसी को आशमा मगर ये तारे हमें अपनाते कहां है ढुढती रह जाये उन्हें निगाहें हमारी दुनिया से जाने वाले जाते कहां है ज... Read more

मुक्तक

नहीं बस में तकदीर किसी के की तरह के रंग है जिन्दगी के दिल बेचैन हो तो कहीं करार नहीं ऐसे भी वक्त आते हैं बेबसी के नूरफातिमा... Read more

मुक्तक

इन्तजार केवक्त लम्बे हो गये कैसे बेकरार हम भी हो गये हुए कंगाल कुछ इस तरह से हम से दूर तो गम भी हो गये नूरफातिमा खातून "नूर... Read more

ग़ज़ल

सुख दुःख जुबां तो ‌‌‌छुपा लेते हैं दिल का दर्द चेहरे बता देते हैं ज़ालिम जफा कर चैन से सोवे बेकसूरवार खुद को सजा देते है सुक... Read more

ग़ज़ल

दर्दे हालात पूछकर तकलीफ न बढ़ाइए सर काटकर बालों की चोटी न बनाइए जिन्दगी तो है ही मुश्किलों का सफर ये सोचकर दिल की बोझ न बढ़ाइए ... Read more

मुक्तक

अपनी जुबान को खन्जर मत बनाइए यूं किसी के दिल पर पत्थर मत चलाइए खुद को तबाही से बचाकर रखिए लोगों बेकसूर की आंखों को समन्दर मत बनाइ... Read more

मुक्तक

क्या घर परिवार क्या देश विदेश मुश्किल घड़ी में हो जातें सब एक सुकून भरी जिंदगी जीना है तो दिल से नफ़रतो को निकाल फेक नू... Read more

ग़ज़ल

जिन्दगी सम्मान में जीयो पिछे छोड़ वर्तमान में जीयो जिल्लत की जिन्दगी क्या जीना एक दिन ही पर शान में जीयो करो कर्म कुछ इस तरह से ... Read more

ग़ज़ल

मेरे गांव का हर आदमी उदास क्यूं है कल का सुनामी मंज़र आज याद क्यू है लग रहा है वक्त थम सा गया है सुबह कब होगा अभी रात क्यू है ... Read more

मुक्तक

दिया जलाएं अंधेरा मिटाने के लिए सोई हुई एकता को जगाने के लिए ये एक ऐतिहासिक पल होगा कोरोनावायरस हटाने के लिए नूरफातिमा खात... Read more

मुक्तक

फूल एक बार खिलता है सच आजीवन टिकता है खुद को बचा कोरोना से जिन्दगी एक बार मिलता है नूरफातिमा खातून" नूरी" ४/४/२०२० Read more

मुक्तक

कोरोना द्वितीय विश्व युद्ध पर भारी है लाकडाउन हर जगह पर जारी है बचाव ही इसका इलाज है फिलहाल ये तो महाकाल है महामारी है ... Read more

ग़ज़ल

सोचो की दुनिया से निकल जाना है ऐ हवा तुझे बता तो किधर जाना है नाज़ुक दिल के होते हैं हम इंसान वक्त मौसम है इसे तो बदल जाना है आं... Read more