NITU RAJNISH THAKUR

PRATAPGARH (UP)

Joined November 2018

क्या करूँ तारीफ अपनी ,कौन सा आफताब हूँ
खूबसूरत गुलदस्ते में ,काटों भरा गुलाब हूँ

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आज भी माँ क़ब्र से लोरी सुनाती है मुझे

सो रही है प्यार से मिट्टी की चादर ओढ़कर आज भी माँ क़ब्र से लोरी सुनाती है मुझे दूर अंबर में बसेरा है मेरी माँ का मगर आज भी वो दिल... Read more

आज भी माँ क़ब्र से लोरी सुनाती है मुझे

सो रही है प्यार से मिट्टी की चादर ओढ़कर आज भी माँ क़ब्र से लोरी सुनाती है मुझे दूर अंबर में बसेरा है मेरी माँ का मगर आज भी वो दिल... Read more