nishant madhav

Joined January 2017

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क्या बताऊँ............. गज़ल

रदीफ़ :- गजल क्या बताऊँ तुझे मैं की क्या है गजल, बेवफा है कि तुझ सी वफा है गजल. तेरी जुल्फों में है जैसे उलझी हुई, या ध... Read more

वक्त के साँचे मे.....

वक्त के साँचे में जो भी ढल जाएगा, सबसे आगे वही बस निकल जाएगा. जिन्दगी भी सियासत से कम तो नहीं, इक गलत चाल से सब विफल जाएगा. Read more

कही सचका फसाना.....

कही सचका फसाना चल रहा है, कहीं झूठा जमाना चल रहा है, मै शायर हूँ मेरा इक शायिरा से, कहीं टाँका भिडा़ना चल रहा, वो अफसर क... Read more

सर किसी का और.....

सर किसी का और है पगड़ी किसी की, आम आदत हो गई यह आदमी की. कौन है, इसको गज़ल मे जो कहेगा, क्यूँ सियासत को जमीं दी जिंदगी की. ... Read more

पिया जी साँवरे

तुम सुनो मोरी, पिया जी साँवरे, दिल तुम्हें हमने, दिया जी साँवरे. जब से आया हूँ, मैं वृंदावन सुनो, खो गया मेरा, जिया जी साँवर... Read more

संवेदना

कही टूटी हुई छत है, कही खाली पडे बरतन, मगर बच्चों की खातिर वो, मिठाई साथ लाया है. जमाने वाले ओ उसका, पकड कर हाथ कहते हैं, मुबा... Read more

सुनो रे साँवरे मेरे...

सुनो रे साँवरे मेरे, मुझे ऐसा बना देना, की मीरा भी दिखे मुझमे, कि राधा सा सजा देना. तुम्हारे मन को यूँ भाऊ,की ज्यों तुलसी तुम्हे... Read more

मेरे साँवरे तुम

मैं टूटा हुआ हूँ, मैं बिखरा हुआ हूँ, मुझे अब संभालो, मेरे साँवरे तुम. भंवर मे मैं देखो, धसा जा रहा हूँ, यहाँ से निकालो, मेरे... Read more