NIRA Rani

Joined August 2016

साधारण सी ग्रहणी हूं ..इलाहाबाद युनिवर्सिटी से अंग्रेजी मे स्नातक हूं
.बस भावनाओ मे भीगे लभ्जो को अल्फाज देने की कोशिश करती हूं …साहित्यिक परिचय बस इतना की हिन्दी पसंद है..हिन्दी कविता एवं लेख लिखने का प्रयास करती हूं..

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यादों की गठरी

सपनो के ताने बाने है कुछ अरमान पुराने है इक यादों की गठरी है जिसमे जज्बात पुराने है कुछ वादो की टूटन है कुछ ख्वाबों की किर... Read more

जहॉ पसरा हो मेरा नाम

आओ सौंप दूं तुम्हे अपनी हसरते अपने अरमान अपने सपने अपना मकाम बस तुम लिख दो अपनी हथेली कुछ ऐसा पैगाम जहॉ पसरा हो सिर्फ मेरा न... Read more

मै क्या लिखूं

कुछ हास लिखूं परिहास लिखू या मन के कुछ जज्बात लिखूं अम्बर का विस्तार लिखूं या सूरज की चमकार लिखू रात्री का अंधकार लिखूं या ... Read more

दोस्तो से भी मिला करो

सबके अपने दुख सुख है सबकी अपनी पीड़ा है जीवन चक्र के पहिए मे सबकी अपनी लीला है समय की धार प्रबल पर है कुछ लय मे तुम भी चला ... Read more

तूफॉ मे कश्ती

न मॉझी न हमसफर न हक मे हवॉए तूफॉ मे कश्ती बर्फीले सदाए चाहतो के झोंके क्यू मुझको डराए गजब है ये मंजर ..न राहे दिखाए पाना नाम... Read more

पापा तुम तस्वीर मे रहते हो

कहते है पापा घर मे रहते है पर वो कमरे मे नही तस्वीरो मे रहते है अक्सर उनके साए से बात कर लेता हूं चुपचाप उन्हे अपनी आगोश मे ... Read more

मॉ

मॉ तुझे कुछ शब्दो मे व्यक्त कर दू ..... कभी हो नही सकता तेरी अनमोल ममता का हिसाब... कभी हो नही सकता बेचैन होती हूं मै ....तो ... Read more

बूढ़ी उम्मीदे चौखट पर रोज दिया जलाती है

बूढ़ी उम्मीदे चौखट पे रोज चिराग जलाती है मन मे न जाने कितने सपने सजाती है जानकार होकर भी अबूझ पहेली सी नजर आती है सब पर बेटे क... Read more

तू मुझमे है मैतुझमे हूं

प्रथम मिलन की बेला मे कुछ ऐसा अपनापन सा था कुछ नजर नजर की चाहत थी कुछ बेबस दिल की धड़कन थी कुछ पल अपने साथ मे थे कुछ सॉस... Read more

कौन किसे पनाह देताहै

कौन किसे पनाह देता है पेड़ भी सूखे पत्ते गिरा देता है वाकिफ है हम दुनिया के रिवाजो से दिल भरते ही हर कोई ठुकरा देता है जिंदग... Read more

मुहब्बत के व्यापार मे

आज मुहब्बत का अजब फरमान आया जिंदगीको रगंमच और मुझे कठपुतली बताया खुदा की रहमत ने गजब का नूर लाया प्यार और धैर्य की प्रतिमूर्त... Read more

नारी दिवस की बधाई

ईश्वर की खूबसरत संरचना हूं मै एक नारी हूं गुरूर है खुद पर खुद के वजूद पर छू लेना चाहती हू आसमान को उसमे उगे चॉद को मु... Read more

कचरे मे जीवन तलाश रहा था

कॉधे पर उसके एक थैला था ऑखें उसकी स्याह / मुख मलिन और मैला था नंगे पॉव चुपचाप चलरहा था कचरे के ढेर पे न जाने क्या कर रहा था ... Read more

समसामयिक घटना पे वार कर रही हूं

तीर शब्दो के बना कर लेखनी मे धार कर रही हूं कुछ नही बस सम सामयिक घटना पे वार कर रही हूं न जाने क्यूं? और कब तक ? अशिक्षा औ... Read more

मकर संक्रान्ति मुबारक बच्चे

जब से परिंदों ने खुद के शौक को जामा पहनाया है तब से हमारी जिंदगी मे ठहराव आया है अब सुबह उठकर टिफिन बनाने की जद्दोजहद नही होती... Read more

बेटियॉ

बेटियॉ .. वेदों की माने तो गाथा हैं वो किसना के साथ भोली राधा हैं वो घर पे है तो मर्यादा है वो युद्ध स्थल पे वीरांगना है वो ... Read more

नव वर्ष मुबारक

ऊषा की पहली किरण मुस्कराई आज फिर एक नया सबेरा लाई कुछ नई सौगाते और सपने साथ लाई कण कण मे उजाला भरती हुई आई भगवान ये उजाला नि... Read more

.. या खुदा मेरे सारे गुनाह माफ करे

शिद्दत से ख्वाहिश है दिल की खुदा मेरे सारे गुनाह माफ करे पर गुनाह जो तुझसे हुए याखुदा उनका कौन हिसाब करे रिवाजो रस्मो की... Read more

जिंदगी मुझ पर लिखती है

मै जिंदगी पर लिखती हूं जिंदगी मुझ पर लिखती है कभी वो मुझ पर अौर कभी मै उस पर हंसती हूं मै मॉगू फूलों सी हंसी तो वो कॉटें भ... Read more

जी लेना चाहती हूं

मै भी देखना चाहती हूं एक अलसाई सी गुलाबी सुबह .. रजाई मे खुद को भीचे ऑखें मीचे महसूस करना चाहती हूं कोहरे मे ढकी सूरज की गुला... Read more

चट्टानों पे चलकर मै आज यहॉ तक पहुची हूं

चट्टानों पे चलकर मै आज यहॉ तक पहुंची हूं अंगार अधर पे धर कर ज्वला को होंठों से पीकर दाह हसरतों का करके मै आज यहं तक पहुंची... Read more

अपने वजूद की पहचान कर चला है

आज दिल फिर से मुकम्मल हो चला है तेरे यादो की गली से मुह मोड़ के चला है उधार की खुशिया ..जो तुझसे होकर गुजरी किसी जमाने मे ज... Read more

गैरो मे कहॉ दम है ..अपने ही चोट दे जाते हैं

क्या हुआ कुछ वक्त के थपेड़ो ने कमजोर कर दिया टूटा तो वो पहले ही था हालातों ने ढेर कर दिया गुमा होता है कि जिंदगी मुस्कराएगी ... Read more

धुंध की चादर मे शहर सिसक रहा है

न जाने क्यू दिल मे कुछ हलचल हो रही थी द्वार पे जाकर देखा तो इक पेड़ पे बनी थी नश्तर लिए हाथो मे पत्ते कतर रहे थे जी जान से ज... Read more

गरीबी

गरीबी गरीबी … गरीबी भी कितनी अजीब है शायद ये ही उनका नसीब है गरीबी भी दो किस्म की देखा किसी को मन का तो किसी को तन का गरीब ... Read more

दिया जलता रहा

दिया जलता रहा सचमुच दिया जलता रहा घनघोर स्याह रात थी हॉ अमावस की रात थी वो दिया जलता रहा शायद उम्मीदो का दिया था फक्र से ... Read more

अश्को का अक्स नजर आया है

अक्सर खुद को खुद से फरेब करते पाया है दिल मे कुछ जुबॉ को कुछ और कहते पाया है ओस की बूंदो को जो देखा जी भर के तो खुद के अश्क... Read more

बर्फ का गोला

आज फिर वही तपती दोपहर थी वही पगडंडी थी .वही गर्म रेत थी नही थे तो बस तुम!!! याद है ...हम दोनो घंटों उस पगडंडी पे बर्फ के गोल... Read more

जीने के बहाने ढूढ़ लेती है जिंदगी

एक जिदगी कई फसाने ढूढ़ लेती है . कुछ अच्छे तो कुछ बुरे अफसाने गढ़ लेती है कभी किसी उम्मीद मे घुलकर रंगीन हो जाती है जिंदगी तो... Read more

रंगों केअर्थ बदलते है ..

रिश्तों के रंग बदलते है कुछ गहरे कुछ फीके पड़ते है मन की तरंगो से रिश्तों की उमंगो से रंगो के अर्थ बदलते है .. प्रेम की बरस... Read more

कुछ वक्त साथ ले आउँ !!

फुर्सत हो तो मैं आउँ कहो तो कुछ वक्त साथ ले आउँ तुम्हे वक्त नही है जमाने से मुझे फुर्सत नही तेरी यादों की झडी़ लगाने से तु... Read more

कोई आज ..कोई चार दिन बाद

जिंदगी जितनी गुजरी है कुछ कमाने मे उससे कहीं ज्यादा गुजरी है बहुत कुछ गवॉने मे खून के रिश्ते जो बहुत प्यारे थे जिंदगी जीने ... Read more

फौजी की बीवी .....दे दो वक्त को मात

क्या हुआ जो बिछड़ गई तुम क्या हुआ जो बिखर गई तुम क्या हुआ जो छूटा पति का साथ वो शहीद सरहद पे हो गए दे दुश्मन को मात .. उठो ... Read more

लाल बिंदी ...

माथे पर मॉ लाल बिंदी लगाती थी बस उसी से मॉ समर्पित दिखलाती थी बिंदी के श्रंगार से उसका चेहरा झिलमिलाता था बिन मेकअप के लालिमा ... Read more

सच्चे प्रहरी हो ...

चैन से हम सो सके इसलिए तुम गश्त लगाते हो शेर की मॉद मे घुसकर के तुम गीदड उसे बनाते हो भारत के सच्चे प्रहरी हो हर त्... Read more

रहते हो दिल के करीब ..रहते हो दिल के पास

रहते हो दिल के करीब रहते हो दिल के पास अजनबी सा लगने लगा हर शय जब से तुम हो रूह के रेशे के पास जानते हो ... इन हवाओ मे इन फि... Read more

हसरतें घायल और दायित्व मजबूत हो रहें है

हसरते घायल और दायित्व मजबूत हो रहे आस्तित्व की खोज मे खुद से गुम हो रहेहै... प्रौढता की चादर ओढे हसरत मुसकुरा रही है भीगी पलकों... Read more

भीगी पलकों के मुरीद हो शायद

मेरी भीगी पलकों के मुरीद हो शायद ... जब भी मिलते हो रुला देते हो प्यार पर जाने क्यूं पहरा बिठा देते हो पर जब भी रोती हूं तो गल... Read more

दान' हुई हकदार बदल गए

बिन तेरी मर्जी के बापू कभी कही नही जाती थी घर ऑगन मे चहक चहक बस तेरा हुक्म बजाती थी पर सहसा … ‘दान ‘ हुई हकदार बदल गए ! सा... Read more

दस्तक ..वक्त और उम्र की

दस्तक ! वक्त और उम्र की .. अचानक वक्त और उम्र की दस्तक से हैरान हो गई किसे मिलूं किसे समझूं परेशान हो गई मैने कहा आओ बैठो ...... Read more

_इलाहाबाद

इलाहाबाद की मिट्टी की खुशबू कुछ खास है क्यूंकि यहॉ गंगा जमुना सरस्वती का वास है लेटे हनुमान जी की महिमा अपार है तभीतो गंगा जी ... Read more

मजहब के रंग हजार देखे हैं

सुना है मजहब के रंग भी हजार होते है कभी कभी हम भी इन्ही से दो चार होते है ....... कान्हा का पीताम्बर कोई जावेद सीते है राधा ... Read more

एक बार फिर संयमित हो रही हूं

सांकेतिक व्यंग एक बार फिर ...... आज फिर संयमित हो रही हूं संगठित होकर सारगरभित हो रही हूं स्वयं की लेखनी को स्फुटित कर भ... Read more

क्या करूं इस दिल का

क्या करू अपने इस दिल का जो मुझसे कुछ भी करवाता है कभी फलक तो कभी खाक की सैर करवाता है कभी यादो के समुंदर मे लेजाता है त... Read more

हीरे की कनी

हीरे की कनी को कॉच सा तौलते हैं लोग खुदगर्ज इस दुनिया में पैरों तले रौंदते है लोग प्रीत का आसमा दिखाकर फरेब में समेटते है... Read more

मशगूल युवा

मशगूल युवा आज का युवा कितना मगरूर दिख रहा है न जाने किस मद मे चूर दिख रहा है मेहनत की जगह जुगाड खोजता है तरक्की के लिए... Read more

व्यथा ..निम्न मध्यम वर्ग की

व्यथा ...मध्यम वर्गीय की.. मै निम्न मध्यम वर्गीय परिवार का एक कमाउ ....पर लगता है बेरोजगार युवक हूं कमाता इतनी हूं कि पेट... Read more

मौन ही जब अर्थ देने लगे

मौन ही जब अर्थ देने लगे तो शब्द सारे ही अकिंचित हो जाते है व्यथित मन जब द्रवित हो कुछ कहने चले अस्रूओ की झडी जब चछु को धुंधला... Read more

तुम बात मुझी से कह डालो

बात मुझी से कह डालो ... अंतर्मन के ऑगन में जब जब दुख की परछाई हो वर्षा के काले बादल जब नैनो मे लहराते हो घनघोर घटाओं की बदल... Read more

पेटभरना जरूरी है

कूडा बीनते दो मासूम बच्चों को देख मन करुणा से भर गया कदम एक पल के ठिठक गया सोचने लगी कि हम अपने बच्चो को कितनी सुविधाएं देते है ... Read more