Neha

Khairthal

Joined November 2018

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वीणा मैं तुम्हारी जिसके तुम तार

Neha कविता Sep 11, 2019
वीणा मैं तुम्हारी जिसके तुम तार साज हूँ मैं तुम्हारा तुम उसका सार सुर भी संगीत भी मधुर अहसास जब हो तकरार सुगम हो जाती रा... Read more

गुरू जगत का आधार

गुरू जगत का आधार गुरू की महिमा सबसे महान ईश से बढ गुरू सन्मार्ग पर ला करे उत्थान प्रकाशित करे दीप ज्यों जग गुरू जीवन को ... Read more

भारत की ज्योति

यह भारत की ज्योति इसे बिखरने दो रवि,शशि,नभ इस धरा को करें शत शत बार वंदन जब था कल दुर्जनों का मेला बिखरे प्रस्तर तिम... Read more

राही

Neha कविता Jul 31, 2019
बालपन के सुनहरे पलों में मैंने स्वप्न देखा जीवन की उन्मुक्त आकांक्षाओं में उल्लास देखा जीवन में न निराशा कभी मुझको दबाने पा... Read more

सावन

Neha कविता Jul 28, 2019
देखो आई ऋतु सुहानी सावन की सावन की ऋतु मनभावन की हरित वर्ण की चूनर ओढ़े धरा सज रही रंग बिरंगे फूलों का श्रृंगार लिए जँच र... Read more

नव भारतवर्ष

Neha कविता Jul 25, 2019
माँ भारती के आशीषों पर शुभ दिन आया है | आज फिर से तिरंगे ने परचम लहराया है | चाँद पर सफल परीक्षण हो पाया है | आशाओं के शिखर प... Read more

गुरू की महिमा सबसे महान

Neha कविता Jul 16, 2019
शत् शत् नमन गुरु आपको अभिनन्दन गुरू आपको गुरू की महिमा सबसे महान शब्दों में न हो सके बखान जीवन रूपी भवसागर से पार लगाये ... Read more

विरहिणी

कान्हा तुम अति बडभागी तुम्हरी प्रीत सब मन लागी न बनो निष्ठुर अविनाशी विरहिणी दरस को है प्यासी ज्यों तडपे जल बिन मछरी त्यो... Read more

बेटियाँ

Neha कविता Jun 28, 2019
मान हूँ अभिमान हूँ अपने घर की शान हूँ मैं बाबा के आँगन में थिरकती हुई मुस्कान हूँ भाग्य नहीं सौभाग्य से मिला वरदान हूँ ज... Read more

गर्मी संताप

Neha कविता Jun 14, 2019
सूरज देवता कितनी आग बरसाओगे गर्मी से पीडित लोगों को कितना तरसाओगे भीषण गर्मी में ओर कितना तडपाओगे क्या बादलो को आसमां की... Read more

मन दर्पण

Neha कविता Jun 14, 2019
आज फिर से उठ के बन्दे मन के दर्पण खोल कहीं गूँज रहे है फिर से अलबेले से बोल भावनाओं के दरिया में न बह नई राह बना ले विचारो... Read more

वर्षा आगमन

Neha कविता Jun 12, 2019
उमड़ घुमड कर बदरा छाए आसमां में घनघोर घटा सम छाई तूफान ने भी संग रफ्तार जमाई मानो वर्षा की होगी खूब अगुवाई हर्षित पु... Read more

वृक्ष

मनुष्य के जीवन का आधार है कुछ खास है पेड़ ही तो प्राणाधार है हमे आभास है धरती की शोभा बढ़ाते दिन रात पर्यावरण को ... Read more

केसरिया

Neha कविता May 23, 2019
केसरिया ही केसरिया जन जन के मन बसा है केसरिया देखो आ ही गया फिर से केसरिया राष्ट्रवाद की लहर ले आया विकास की फिर से ... Read more

रंगीला राजस्थान

Neha कविता May 18, 2019
कण-कण में जिसके वीरगाथा इतिहास अनूठा ऐसी राजवंशोंकी धरती से है अपना नाता संस्कृति और कला में जिसकी अलग पहचान रंग रंगीला और सजी... Read more

नन्ही परी

Neha कविता May 16, 2019
तेरी हँसी में रब दिख जाता है सारा तेरी इक मुस्कान पे दिन बन जाता है मेरा मासूम सा चेहरा अठखेलियां तेरी बन गए जीवन का ... Read more

माँ नाम अनमोल

Neha कविता May 12, 2019
ममता के सागर में मोती सी माँ जीवन के हर पथ पर बनी ज्योति माँ अपने अरमानो की बलि लगाकर बच्चों के सपनों को सजाती है ... Read more

अमर सपूतों की हुंकार

Neha कविता Feb 20, 2019
मात्रभूमि हित बलिवेदी शीश चढ़ाने वालों को लहू की होली खेल गए ,अमर जवानों को अमरत्व पा जो निज धरा में विलीन हो गए करते है... Read more

जय हिन्द की सेना

Neha कविता Feb 17, 2019
मात्रभूमि हित सच्ची प्रीत वालों को नमन हर प्रण निभाते जो रक्षार्थ निज चमन अब न चक्षु जलधारा ... Read more

भारत वर्ष

Neha कविता Jan 25, 2019
भारत वर्ष की भूमि का गुणगान जहाँ में हो यही हमारी कामना नवगान यहाँ से हो एकता अखण्डता एवं समरसता की कड़ी भारतवर्ष क... Read more

बरखा रानी

आई प्यारी बरखा रानी संग लाई रूत मस्तानी हर घर आँगन खिली फुलवारी जाने अब किसकी है बारी पेड़ो की शाखो पर लदी हर ड... Read more

अन्नदाता

धरती माँ की गोद में जन्मा धरती पर ही जीवन यापन कर बड़ा हुआ धरती पर ही लगन परिश्रम कर बढ़ने वाला सर्दी गर्मी ... Read more

सुहानी भोर

आई सुहानी भोर फैला उजियारा चहुँ ओर प्रकृति की मनोरम छटा छाई दूर दूर दूर हो चूका तम बीती निशा के साथ नवयुग अभ्युदय का हो ... Read more

चंचल मन

Neha कविता Nov 23, 2018
चंचल मन उड़ता पुरजोर पवन में अरमानो के पंख लिए नील गगन में कभी विश्वासों की डोर बाँध जाता आशाओं की डगर को जाता व्याकुल मन दर... Read more

कृष्ण भक्ति

Neha कविता Nov 23, 2018
अलौकिक अविरल भक्ति रस धारा प्राणप्रिय मनमोहनीय रुप तुम्हारा अदभुत आत्मीय छवि तिहारी पीताम्बर पट मोर मुकुट धारी तु... Read more

माँ

Neha कविता Nov 17, 2018
माँ से अस्तित्व हमारा ,माँ से ही जग में उजियारा जीवन बगिया को संवारा ,अपना सबकुछ हम पे वारा कोख से लेकर नन्ह... Read more