रोटी के जुगाड़ से बचे हुए समय का शिक्षार्थी
मौलिकता मेरा मूलमंत्र, मन में जो घटता है उसमें से थोड़ा बहुत कलमबद्ध कर लेता हूँ । सिर्फ स्वरचित सामग्री ही पोस्ट करता हूँ ।
शिक्षा : परास्नातक (भौतिक शास्त्र), बी.एड., एल.एल.बी.
काव्य संग्रह: इंद्रधनुषी, तीन
नाटक: मधुशाला की ओपनिंग
सम्पादन: आह्वान (विभागीय पत्रिका)
सम्प्रति: भारत सरकार में निरीक्षक पद पर कार्यरत
स्थान: मेरठ (उत्तर प्रदेश)

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धूर्त आदमी

जुबां पे दिलकश दिलफरेबी बातों का शहद, दिल में जहर-ओ-फरेब का समंदर हो ॥ मुस्कराहट के साथ फेरते हो नफरती तिलिस्म, सोचता हूँ कितने... Read more