रोटी के जुगाड़ से बचे हुए समय का शिक्षार्थी
मौलिकता मेरा मूलमंत्र, मन में जो घटता है उसमें से थोड़ा बहुत कलमबद्ध कर लेता हूँ । सिर्फ स्वरचित सामग्री ही पोस्ट करता हूँ ।
शिक्षा : परास्नातक (भौतिक शास्त्र), बी.एड., एल.एल.बी.
काव्य संग्रह: इंद्रधनुषी, तीन
नाटक: मधुशाला की ओपनिंग
सम्पादन: आह्वान (विभागीय पत्रिका)
सम्प्रति: भारत सरकार में निरीक्षक पद पर कार्यरत
स्थान: मेरठ (उत्तर प्रदेश)

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चलते चलते

वह चलते पानी से बह जाते हैं, थोड़ा गर उनको आजमाते हैं । अपने वजूद से यूँ कतराते हैं, आइना देख के भी घबराते हैं । लब हिलते ही जा... Read more

तुम धूप बुला लो

आँसुओं से भीगे हुए, तकिये को हटा लो, तुम आस के रूठे हुए, पंछी को बुला लो, अन्मनी रातों के चांद बुझा दोगे तुम, ये रात ढ़ल जायेगी गर... Read more

प्यासा समंदर और मैं

मैं प्यासा था, समंदर में, दो अंजुली प्यास, खो आया । बड़ा आरोप लगा मुझ पर, मैं अपना आप खो आया ।। समंदर नें, उदासी को, मेरी आं... Read more

दौर

जाने कैसे दौर से गुजर रहा हूँ मैं, वक़्त के हर मोड़ पे लड़खड़ाता हूँ, वो बन्दा ही जख्म-ए-संगीन देता है, जिसको पूरे दिल से मैं अपना... Read more

बोगेनविलिया

वो बोगेनविलिया की बेल रहती थी उपेक्षित, क्योंकि थी समूह से दूर, अलग, अकेली एक तरफ; छज्जे के एक कोने में जब देती थीं सारी अन... Read more

छब्बीस-ग्यारह (मुम्बई) _ 26/11

सागर के सीने से निकले थे, काल सरीखे नाग। मुम्बई में बरसाने आये थे, जो जहरीली आग ।। रण रिपु छेड़ रहा था लेकिन, हम थे इससे अन्जान। ... Read more

अभिलाषा

मेरी इस कविता पर आपके बहुमूल्य विचारों का स्वागत है । आपकी प्रतिक्रियाओं से प्रसन्नता भी होगी और प्रोत्साहन भी ।। ☺ मेरी ये अभिला... Read more

काव्य

जब जहाँ में हर तरफ बस दर्द का आवास हो , या कि कितना हो प्रखर पर, दर्द का बनवास हो, दर्द और उल्लास जब , एक से दिखने लगें, तब ... Read more

तब की बातें

आपकी प्रतिक्रियाओं से प्रसन्नता होगी और प्रोत्साहन भी........... तबकी बात और है, ना करो तबकी बातें, थे तब भी लेकिन, जख्... Read more

धूर्त आदमी

जुबां पे दिलकश दिलफरेबी बातों का शहद, दिल में जहर-ओ-फरेब का समंदर हो ॥ मुस्कराहट के साथ फेरते हो नफरती तिलिस्म, सोचता हूँ कितने... Read more

यूं ही

जालिमों तुम खोप्ते रहो सीने में खंजर हम उफ्फ़ भी करें तो गुनाह हो जाये ।। @ नील पदम् Read more

याद

जब भी सर्द मौसम में तेरी, गुनगुनी याद सरसराती है । इन्द्रधनुष को खिलाने के लिये, बादलों से धूप टपक जाती है ।। @ नील पदम् Read more

पहरा

कभी सूरज सुनहरा था यहाँ, पर चांद तो कबसे ठहरा है यहाँ । एक जाए तो दूसरा आता है, बस इन दोनों का ही पहरा है यहाँ ।। @ नील पदम् Read more

दौर

जाने कैसे दौर से गुजर रहा हूँ मैं, वक़्त के हर मोड़ पे लड़खड़ाता हूँ, वो बन्दा ही जख्म-ए-संगीन देता है, जिसको पूरे दिल से मैं अपना... Read more

ट्रान्सफर

मेरी इस कविता पर आपके बहुमूल्य विचारों का स्वागत है - ( ट्रान्सफर ) कभी नहीं हटती है, रहती है सदा चिपककर वो लिजलिजी सी हठी... Read more

फूल और कांटे

कांटों का काम है चुभते रहना, उनका अपना मिज़ाज होता है, चुभन सहकर फिर भी सीने में, कोई गुल उसका साथ देता है । @ नील पदम् ... Read more

नजरिया-ए-नील पदम्

उगलो छिड़को कितना भी गरल, ये स्वभाव मेरा पर है अविरल, थक जाओगे तुम विष दे देकर, मैं वही मिलूंगा फिर भी सहकर, मन से निश्छल ... Read more

सर्द मौसम में तेरी गुनगुनी याद

जब भी सर्द मौसम में तेरी, गुनगुनी याद सरसराती है । इन्द्रधनुष को खिलाने के लिये, बादलों से धूप टपक जाती है ।। जब कभी वक़्त की... Read more

धूल में नहाये लोग

क्या देखे हैं कभी? धूल में नहाये लोग, जमीन के नीचे से उठकर जब तक नहीं छूने लगीं वो इमारतें, मीनारें, अट्टालिकाएं आकाश को, घे... Read more

ओ माँ!

थकती हैं संवेदनाएँ जब तुम्हारा सहारा लेता हूँ, निराशा भरे पथ पर भी तुमसे ढाढ़स ले लेता हूँ, अवसाद का जब कभी उफनता है सागर मन में... Read more

अनुरोध

मेरी कविताओं में यदि स्वयं को पा जाओ तो रुष्ट मत होना, मेरी मंशा अपनी कविताओं में तुम्हारा नाम लिखने की कतई न थी, पर शायद, म... Read more

रेल की दो टिकटें

अथाह भीड़, रिजर्वेशन और टिकटें ।। सदैव दो टिकटें होती हैं मेरी जेब में ।। एक टिकट परदेस से प्रिय तक सफ़र कराती है, तुमसे म... Read more

पिता जी

भीगता हूँ, सूखता हूँ, ठिठुरता हूँ , अकड़ता हूँ, पिता के जोर पर, गिरते हुए भी, फिर संभलता हूँ ।। हो तुम चीज क्या, इन्सान हो ... Read more

काश! मैं पाषाण होता

काश! मैं पाषाण होता, मेरे ह्रदय पर कोई पाषाण तो नहीं होता, काल के आघात से विखर जाता, वेदना से छटपटाकर नहीं रोता ।। पूष की ठिठुरन... Read more

द्वंद्व

दोहरी होती गयी हर चीज़ दोहरी होती जिंदगी के साथ. आस्थाएं, विश्वास, कर्त्तव्य आत्मा और फिर उसकी आवाज ।। एक तार को एक ही सुर म... Read more