तुम्हारी वाहवाही के लिए लिखता नहीं हूँ
मैं लिखता हूँ कि , मैं जिन्दा हूँ ये तुम जान पाओ

नीलेन्द्र शुक्ल ” नील “

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माँ ये उमर तुम्हें लग जाए

मेरी उमर तुम्हें लग जाए माँ ये उमर तुम्हें लग जाए लोरी गाती, थपकी देती आँचल में माँ मुझे सुलाए जन्म दिया, धरती पे लाई छ... Read more