Intrsting in ghazal reading and writing. Book published_Girvi kya zubaN rakh duN?

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जिनको ईमान

जिनको ईमान सरे आम लुटाते देखा . क़द ज़माने में उन्हीं को ही बढ़ाते देखा .. पारसाई की मिसालें थीं जहां में जिसकी . ( = पवित्रता )... Read more

मेरी ग़ज़ल में

फ़क़त इक हताशा है मेरी ग़ज़ल में | ग़ज़ल का छलावा है मेरी ग़ज़ल में || सदा गूँजती है सिसकने की शब भर | कोई तो अकेला है मेरी ग़ज... Read more

क्या करिश्मा दिखा दे

न जाने ख़ुदा क्या करिश्मा दिखा दे | तुझे क्या पता है वो कब किसको क्या दे .. गिनाता उसे है शिकायत बहुत तू . अगर उसने दी है जो सा... Read more

जुर्म किसका था

जुर्म किसका था, मिली किसको सज़ा रहने दो . किसको होना था, हुआ कौन रिहा, रहने दो.. दफ़्न मुझमें हैं कई ख़्वाब अज़ल से लेकिन , मेर... Read more

ग़ज़ल

आज तक मेरा रहा तो क्या हुआ . हो गया अब ग़ैर का तो क्या हुआ.. कब चला वो आँख अपनी खोल कर. रास्ते में गिर पड़ा तो क्या हुआ.. मै... Read more

ग़ज़ल

तुम्हारी बेरुखी ने जो दिया सदमा मुबारक हो . तुम्हें दौलत मुबारक हो मुझे कासा मुबारक हो.. (= भिक्षापात्र) ज़माने की ख़ता क्या थी,... Read more

ग़र्दिशें गुज़रीं

ग़र्दिशें गुज़रीं जबीं को चूम कर, अच्छा लगा | हादसों के साथ करना ये सफ़र अच्छा लगा || उम्र भर तू ज़िन्दगी महरूम कर सकती न थी | ... Read more

हौसला जब भी तुम्हारा जाएगा

हौसला जब भी तुम्हारा जाएगा | दूर हाथों से किनारा जाएगा || मेमने की आँख में देखो तो तुम | किसके हिस्से में बेचारा जाएगा || सो... Read more

बाँसुरी बन कर

बाँसुरी बन कर अधर पर गुनगुनाता कौन है । यह मेरा इल्मो अदब मुझमें सजाता कौन है ।। कौन है जो बारहा आता है मेरे सामने । बच निकलने ... Read more

अगर मैं झूठ बोलूँ

अगर मैं झूठ बोलूँ तो मेरा ईमान जाता है । मगर सच पर कहाँ मेरे किसी का ध्यान जाता है ।। बदलते दौर में रिश्ते रहें महफ़ूज़ भी कैसे ... Read more

ग़ज़ल

न समझो शोर में शामिल वो सन्नाटा नहीं होगा । जो पूरा है अभी तक वो कभी आधा नहीं होगा ।। अगर सच है तो सच ही है, अगर है झूठ तो क्या ... Read more

ग़ज़ल

रोशनी देते हैं पुरखों के हवाले आज भी । ताक़ पर पुरनूर हैं उनके रिसाले आज भी ।। आस्था के दीप जलते हैं हमारे ज़ेह्न में । दौरे ग़... Read more