naman jain naman

Joined November 2016

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क्रांतिकारी मुक्तक

बहर- *१२२२ १२२२ १२२२ १२२२* कभी अंग्रेज़ का हमला, कभी अपने पड़े भारी। कभी तोड़ा वतन को भी, कभी गद्दार से यारी। कलम का क्रांतिकार... Read more

क्रांतिकारी

विषय- *क्रान्तिकारी* विधा- *मुक्तक* बहर- *१२२२ १२२२ १२२२ १२२२* मिटा आज़ाद का सपना, नही आज़ाद भारत है। सभी को नोट की चाहत... Read more

बेरोजगारी

जनसंख्या के कोप का भाजन नौजवान बन जातेे है। रोजगार की चिंता में मर अब सब किसान मर जाते है॥ सब कार्य जब यंत्र करेंगे काम कहाँ रह जा... Read more

रिश्ता

विषय- *रिश्ता* रिश्तों का अब कत्ल हो रहा सरेआम बाज़ार में। पतन मानव का हो चला बर्ताव मे आचार में॥ बेटे ने अब माता का दूध लजाकर ... Read more