मै अमित मौर्य,
निवास लखनऊ
निवासी-लखीमपुर जिला
शौक- मीचिस की तीलियों से घर व कलाकृतियां बनाना,
कविता, गजल, दोहे, व अन्य विधाओं में लिखना,
पढना, व खाना बनाना |

उम्र- 29 वर्ष

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काव्य

एक रचना बच्चे के लिए जिसकी माँ देहव्यापार के दलदल में फँसी है वह जब देखता है कि हर रोज नया आदमी आता है उसकी माँ से मिलने मगर माँ कभी... Read more

कुछ नये दोहे

1-- धन को काला कह रहे, देखो अपना रूप, लाइन वो भी लग रहे, कल तक जो थे भूप।। 2-- तुलना अब न कीजिए, ये है जहर समान। कैसा... Read more

कुछ हाइकु

हाइकु का छक्का~ 1- कैसी आग है, वन झुलसा दिया, जी ना अघाया | 2- विवेकानंद, नाम नही है खाली, ... Read more

मैं और तुम

चलो तुम गीत गाओ, मै साज बन जाऊं, चलो तुम शब्द बनों मैं आवाज बन जाऊं | थे किये वादे हमने वो मिलकर हम निभाएंगे, जिंदगी है गीत प्य... Read more

निवेदन

जरा ठहरो आहिस्ता चलो, पायल न बजाओ, कोई सुन लेगा, तुम्हरी महकी हुई सांसो से कोई खुशबू चुन लेगा, अरे हर किसी के सामने बेपर्दा न ह... Read more

मन का वृक्ष

मैं, हूं, एक, छोटा सा, तरू तुम्हारे, ... Read more

पिता का पत्र बेटी के नाम

बेटी दिवस पर एक पिता का पत्र बेटी के नाम ~ बिना पूंछे कही जाना नहीं, कही जाने से मै न रोकूंगा, हो... Read more

सुभाष चंद्र बोस

नेता जी को मेरा शत शत नमन जिनके नाम पे कांपे बैरी सम्मुख टिक ना पाते थे, लड़ने से पहले ही अक्सर दुश्मन शीश झुकाते थे, जीते सब... Read more