Copy link to share

रोटी और सम्मान

आवाज़.... मेरे मन की... 🎤 जहां वाणी में मिठास नहीं जिस दर सम्मान की आस नहीं, फ़िर चाहे भूख से मर जाना पर वहाँ भूख और प्यास नह... Read more

सच और झूठ

आवाज़.... मेरे मन की... 🎤 कैसे कहोगे सच जहां इज्ज़त ही नहीं दिखती जहां मोल नहीं मिलता तारीफ़ नहीं मिलती.. झूठ सिर पर बैठा ... Read more

माँ! तुम्हारी याद आ रही है

जाने क्यों आज फिर से तुम्हारी बहुत याद आ रही है यूं तो रोज सताती पर कुछ ज्यादा ही सता रही है फिर आंखों में आंसू आए, टीस उठी है फि... Read more

हम और तुम

आवाज़.... मेरे मन की... 🎤 हम बैठे रहते हैं दरवाजे पर आस लगाए हर एक आहट को सुनते हैं बड़े गौर से कि शायद तुम आए..... ... Read more

स्त्री

आवाज़.... मेरे मन की... 🎤 तुम एक स्त्री हो... सैकड़ों बाधाओं से बाधित हजारों वर्जनाओं से वर्जित अनगिनत सीमाओं में बंधी अनग... Read more

आस का जुगनू

आवाज़.... मेरे मन की... 🎤 मैने देखा तुम जरा सा नींद में कसमसाए थे उदासियों और अकेलेपन के घुप्प अंधेरे में मुझे लगा कोई... Read more