बूँद
समुद्र में गिरी
और
सागर हो गई ।
हे प्रभु !
मुझे सागर होने का साहस देना ।

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सन्नाटे और चुप्पियों के द्वार पर मेरी छाती की धड़कनें बच बच के चलती हैं भाषायें चुक जाती हैं स्मृतियों की काँव काँव पे थक... Read more