हीरे सजा रखे हैं तिलक सा माथे उन्हें माटी का कोई मोल नहीं, माटी ही हूं इस भूमि का,अभिमान मुझे,
इस माटी का कोई मोल नहीं

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"हम भारत के लोग"

कह रहे "हम भारत के लोग",कह रहे हम भारत के लोग, टूटती हम से "हम" की डोर,टूटती हमसे "हम" की डोर, बट रहा सारा हिन्दुस्ता,बट रहा है हि... Read more

मज़लूम

मजलूमों की दुआ न सही , जो "आह" ही सुन लेता मेरे मौला, तो आज इस जहन्नम की आग ना होती, किसी को भी फिर किसी जन्नत की चाह न होती । Read more

बेटियां

क्या कहूँ तुझे मैं बेटियाँ, मन पर बोझ माथे पर कलंक, दरिंदगी का लहराता परचम, सदियों से गूंजती यहाँ बस तेरी सिसकियाँ । न्यूज लिखे ... Read more

काव्य चर्चा

मेरी पंक्तियाँ ?? ● तारीफ नहीं करता,इसे तारीफ न मसझ लेना, यह तो बस जरिया है मेल जोल बढ़ाने का ।। श्री,मित्र के उत्तर ?? ● यह जमान... Read more

विश्वास

दूर के ढोल सुहाने होते हैं, विश्वास के बड़े मायने होते हैं, पुष्प कागज के देखने में होते हैं बड़े प्यारे, आदर्श रचने हों तो हम र... Read more

झूठे आदर्श

झूठे आदर्शों की 3D तस्वीर, गढ़ सकते हैं सनम हम भी बहुत से ताबीर, हजारों रूपों में यथार्थ ढक दूं, भ्रम की चादर ओढू,और तुम्हें भ्रम... Read more

आदर्शो की कीमत

अच्छे लोगों की सांसें कम ही होती हैं उम्मीद उन्हीं की टूटती है जिन्हें कुछ उम्मीद होती है गफलत में जीना गफलत में रखना उनके आदर्... Read more

किसी ने बुरा जाना किसी ने भला जाना

किसी ने बुरा जाना किसी ने भला जाना, मैं जो खुद को जान न सका जाने औरो ने क्या पहचाना ।। जिस दिन सो जाऊंगा,भारत माता तेरी आंचल में... Read more

तेरा साथ छूटा

तेरा साथ छूटा,सम्हलने में वक्त लगा, अब फिर उसी मौसम,उसी प्रेम की तमन्ना मुझे, एक दिन,एक पल,एक घड़ी,तुम जो भी मंजूर करो, बस चन्द लम... Read more

खामोश शहर

खामोश शहर में गूँजती एक आवाज कम नहीं, अंधेरे में जले,वह एक चिराग कम नहीं, स्वार्थ में बदलती #विश्वास को खोती हक की आवाज, गीत गाता... Read more

व्यक्ति नही राष्ट्र महान

किसी से नही द्वेष मेरो,नही किसी से प्रीत, मातृ भूमि की जय करो,मिल कर करो सब जीत ।। Read more

जन कवि हूँ

जनता मुझसे पूछ रही मैं क्या बतलाऊ, जनकवि हुँ साफ कहूंगा मैं क्यों हकलाऊ । वंचना,भूख,गरीबी आज भी, सत्तर वर्षो की नाकामी को क्यों... Read more

हक

हक के दमन का तो इतिहास रहा है, कोई जयचन्द तो कोई भक्त रहा है, याद है मुझे वह पोरश का भी पौरुष, सूली पर चढ़ कर भी जो शत्रु को ललकार... Read more

जनकवि हूँ

जनता मुझसे पूछ रही मैं क्या बतलाऊ, जनकवि हुँ साफ कहूंगा मैं क्यों हकलाऊ । __/\__ बाबा नागार्जुन __/\__ वंचना,भूख,गरीबी आज भी,... Read more

थक गया हूँ

थक गया हूँ पर हारा नहीं हूँ मैं, विपदा में मिट जाऊ राह छोड़ हट जाऊँ, वह सहारा नहीं हूँ मैं, थक गया हूँ पर हारा नहीं हूँ मैं । स... Read more

थक गया हूँ पर हारा नहीं हूँ मैं

थक गया हूँ पर हारा नहीं हूँ मैं, विपदा में मिट जाऊं,राह छोड़ हट जाऊं, वह सहारा नहीं हूँ मैं, थक गया हूँ पर हारा नहीं हूँ मैं, मं... Read more

असाधरण सूझ बूझ और मेजर गोगोई

भारतीय सेना की पहचान विश्व के कुछ गिने चुने शक्तिशाली देशों की सेना के रुप में की जाती है, सेना की बहादुरी और उसके निर्णय लेने की अद... Read more

प्रकृति,हम और वन्य जीव

प्रकृति की मनोरम कला अद्भुत,अद्वितीय,अकल्पनीय है, सुबह के लाल सूर्य का अंधकार ध्वस्त करने वाला तेज, उमंग और उत्साह के साथ हर एक प्रा... Read more

सत्यमेव जयते

2 और जवान शहीद शव के साथ पाक ने की बर्बरता.. मस्तक पर विराजमान तुम्हारे वो भारत के चार सिंह, अशोक शांति नीति के ही नहीं, शत्रु ... Read more

माँ भारती,तोड़ती पथ्थर

मातृभूमि से बढ़ कर नहीं कोई उपलब्धि तेरी, सत्य विजय से पहले व्यर्थ ही हर रणनीति होती, धिक्कारती माँ भारती,तोड़ती पथ्थर देखती तुझे छिन... Read more

बड़े काम की बेटियां

ख़ामोशी तेरी,पहल भी तेरा, नाकामी तेरी,शहर भी तेरा, गूंजती यहां,बस मेरी सिसकियाँ l बेखबर वो निर्लज चले,सब भूल-भाल आगे बढ़े हर चेह... Read more

बड़े काम की बेटियां

ख़ामोशी तेरी,पहल भी तेरा, नाकामी तेरी,शहर भी तेरा, गूंजती यहां,बस मेरी सिसकियाँ l बेखबर वो निर्लज चले,सब भूल-भाल आगे बढ़े हर चे... Read more

निर्भया

तारीफ़ क्या करूँ, क्या कहूँ मैं निर्भया, मन पर बोझ,माथे पर कलंक, दरिंदगी का लहराता ये परचम, क्या लिखूं,किसकी करू मैं निंदा वो डू... Read more

निर्भया

तारीफ़ क्या करूँ, क्या कहूँ मैं तुम्हे निर्भया, मन पर बोझ,माथे पर कलंक, दरिंदगी का लहराता ये परचम, क्या लिखूं,किसकी करू मैं निंदा... Read more

हास्य व्यंग्य

राहुल बाबा? मुझे बोलने नहीं दिया जा रहा है,मैं बोलूंगा तो भूकम्प आ जाएगा .... हाईटेक प्रधान, अरे उन्हें किसने रोका बोलें न... Read more

नारी

आन मान और मर्यादा,सिर्फ तुमपर ही लादा जाता, मछली को तैरना कौन सिखाता,कौन पंक्षी को उड़ना, कुंठित,व्यथित मन की ये बाते,पुरुष समाज के... Read more

सच

अंधे को बंदूख दें कर,सीमा पर शत्रु से मुकाबले के लिए भेजना नियत की दृष्टि से बिल्कुल दोषी नही, नियत सही है और उद्देश्य भी देश कल्याण... Read more

नोटबन्दी

बिना किसी बैकप के,इक्के के पीछे घोड़े को बान्ध कर दौड़ाने वाले मोदी जी भारत के पहले प्रधान सेवक हैं l 500 और 1000 के नोटों की कुल हिस... Read more

भक्ति

अधिकार,संघर्ष,तो इतिहास रहा है, किसी ने समर्थम किया है,तो कोई भक्त रहा है, पर याद है मुझे, वो पोरष का भी पुरुषार्थ, सूली पर चढ़ क... Read more

जुल्म_ए_भक्ति

अधिकार,संघर्ष,तो इतिहास रहा है, किसी ने समर्थम किया है,तो कोई भक्त रहा है, पर याद है मुझे, वो पोरष का भी पुरुषार्थ, सूली पर चढ़ क... Read more

संघर्ष एक इतिहास

जुल्म_ए_खाकी या जुल्म_ए_खादी अधिकार के संघर्ष का तो इतिहास रहा है, किसी ने समर्पण किया है,तो कोई भक्त रहा है मुझे याद है पुरुषर... Read more

सम्मान/तिरस्कार और समाज

तारीफ की जो बात की और जमाने से तुलना, तो सुनो हे मित्र, क्या तुम भूल गए,गांधी को गोली मार, गोडसे की पूजा करना ।। ... Read more

सिद्धान्तों की कीमत पर जीना मंजूर नही मुझे

समझौतों में स्वार्थ और लाचारी की बू आती है, आत्म-सम्मान स्वाभिमान मृत सैया पर ही नजर आती है, बेआबरू हो कर जीना,खुद को खुद से ही छल... Read more

दशरथ मांझी को मेरा सलाम

क्या कमाल की दुनिया है यारो... दशरथ मांझी जब अकेले ही पत्थर काट रहे थे तब कोई सरकारी गुलाम नही गया ..पूछने ? कोई तो पूछता "ऐसा क... Read more

कर सको तो

तेरा साथ छूटा,सम्हलने में वक्त लगा, अब फिर उसी मौसम,उसी प्रेम की तमन्ना मुझे, एक पल एक दिन एक घड़ी,तुम जो भी मंजूर करो, बस चन्द लम... Read more

देश प्रेम

करने दो हुंकार अब,बस मातृभूमि का सत्कार अब बजने दो मृदंग,कर दो संखनाद अब, भरो कुछ ऐसा ही दम्भ,कण कण में दिखे देश प्रेम का रंग, चू... Read more

चीन को उत्तर

सत्य है कि पाक की छटपटाहट से चीन बौखला जाता है,जो भी वजह हो किन्तु भारत के सिंधु जल मुद्दे पर निर्णय के पश्चात चीन द्वारा ब्रह्मपुत्... Read more

जुमलो का ये दौर

पाठको की खामोशी के कारण लौट गया था, किन्तु में ज्यादे खामोश नहीं रह पाता l प्रस्तुत है हास्य मनोरम व्यंग नमो नमो जुमलो का दौर... Read more

पगली कथा- मेरी भूमिका

यदि आप ने पूर्व में मेरे द्वारा लिखित पगली की कहानी पढ़ी है तो आप बात पूरी तरह समझ जाएंगे,अन्यथा निवेदन करूँगा की उसे पढ़े फिर मेरी उस... Read more

व्यंग

जीन्स क्यों बिलकुल बुरी बात.. ऐसे हंसते हैं क्या ये कोई तरीका है,? सीधा चलो इतना मटकने की जरूरत क्या ? एक पब्लिक पब से फोन आता है... Read more

मोहन जोदाड़ो फिल्म से कही आगे..

मोहंजोदाडो.... इस विषय मे हमारा जितना भी ग्यान है,उसे आधार बना मे ये अवश्य कहना चाहूँगा कि ये सभ्यता भारत की एक प्राचीन वैभव पूर्ण... Read more