MOTI PRASAD SAHU

अल्मोड़ा

Joined September 2017

जन्म 1963(वाराणसी)

Books:
पहचान क्या है( कविता संग्रह) 2013

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आओ चलें करें मतदान

लोकतंत्र का मंदिर रचने उसमें देव - प्रतिष्ठा करने । जिससे हो सबका कल्याण आओ चलें करें मतदान।। अपना प्रतिनिधि स... Read more

फिजाएँ ठहर -सी गयीं

पापा जेब में पैसा क्यों नहीं रखते? आइसक्रीम चाटते हुए बतियाते हुए चहकते हुए कुछ नवांकुरों को देखकर किनारे से चुपचाप निकलते ह... Read more

कविता-कश्ती

भावों की सरिताएँ आकर मन-सागर में मिलती जायें। कल्पना की लहरें लाकर मोती तट पर रखती जायें।। मेघ सरिस साहित्य -गगन में आन्दोलित... Read more

माँ

देखा नहीं स्वर्ग का सुख है ईश्वर की सत्ता है कैसी। पर देखी हमने निज आँखों माँ है केवल माँ के जैसी।। माँ होती है ठण्ड धूप की ज... Read more

नदी तुम भी

नदी ! तू सरल है निर्मल है सदानीरा है गतिशीला है जीवनदायिनी है जितना भी कहूँ तुम्हारी प्रशस्ति में वह कम ही होगा किंतु तुम भ... Read more

मैं दूब हूँ

मैं दूब हूँ चरी जाती हूँ काटी जाती हूँ उखाड़ कर रख दी जाती हूँ मेड़ पर खेत से बार-बार मैं दूब हूँ इसलिये थेथर हूँ कोमल कणों ... Read more

खलनायक

डाट खाता हुआ पिटता हुआ बे-पर्दा होता हुआ कोई सिनेमाई खलनायक अच्छा लगता है कभी हम भी यही भूमिका निभा रहे होते हैं असल जिंदग... Read more

गन्नावाला

दीपावली पर ईख बेचने आया शहर किसान । कन्धे पर रख कर ढ़ोने से निकल रही थी उसकी जान।। चालीस का था बेच रहा वह गली गली हर द्वार । इतन... Read more

रिक्शा चालक

रिक्शा चालक पौष की सर्द भरी बर्फीली रात में बरेली रेलवे स्टेशन के बाहर रिक्शे पर अधलेटे चालक इंतज़ार कर रहे हैं, एक अदद सवार... Read more

प्रार्थना

प्रार्थना आओ करें मिल प्रार्थना घर निकल लौटें सुरक्षित मिल करें हम प्रार्थना।। बहू बेटी हों सुरक्षित मिल करें हम प्रार्थना। शि... Read more

असामाजिक

असामाजिक मैं मोटा नहीं क्यों कि मलाई से हूं वंचित कोई सरकारी इमदाद नहीं कारण चुनावों में किसी दल का झंडा नहीं उठाता नारे नह... Read more

तोता

तोता पर्यावरण प्रतीक तुम ! हो उड़ती फिरती हरियाली लाल चोंच ,मरकत इव तन खाते फल जिसमें हो 'लाली'। सिखकर 'राम 'नाम का करते उच... Read more

अनासक्ति

अनासक्ति उस अदृश्य नियन्ता ने पर्वत ,कहीं समुद्र बनाया। कहीं सम मैदान बनाकर उन पर जन आबाद कराया।। पर्वत ने पाया है नभ को ... Read more

अनपढ़

अनपढ़ अनपढ़ वे नहीं जो बाचना नहीं जानते चिट्ठियाॅ। तथा तोड़ते हैं सड़क किनारे बैठ गिट्ठियाॅ।। अनपढ़ वे हैं जो नहीं पढ़ पाते पानी... Read more

तकदीर

हाथ खोलकर दिखलाया हूँ, अपनी भाग्य लकीरों को। आशीर्वचन प्राप्त करने को दौड़ा देख फकीरों को।। हर पत्थर माथा पटका हूँ रोया खूब अक... Read more