Published writer of “Mere Lafz Meri Kahani”

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रिवायतें

जाने कैसी कैसी रिवायतें जमाने की कीमत है नमक ,ज़ख्म दिखाने की हाथ जोड़े, उसके क़दमों में जा बैठें कोई तरकीब ओर बताओे पास लाने की ... Read more

मरासिम

मरासिम टूट जाते हैं,मुसलसल आज़माने से तस्स्वुर और हकीकत ज़ुदा है इस ज़माने से लहू चूस लेती है यहां ये मतलबी दुनिया कहाँ निभते हैं ... Read more

मुक्तक

हर तरफ राह में थे कांटे बिछे हुए हमको तेरी तलब थी बस चलते चले गए ✍mk Read more

गज़ल

कभी करीब इतना कि जैसे रूह का हिस्सा होते हो और कभी सात आब-जू से भी परे होते हो किस तरह से समझूँ तेरी ज़ात क्या है कभी तुम आम तो... Read more