हिन्दी सेवी सामान्य भारतीय एवं अभियंता

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गोपाल दास 'नीरज' (गीत ऋषि)

न फिर सूर्य रूठे, न फिर स्वप्न टूटे, ऊषा को जगाओ, निशा को सुलाओ। दिये से मिटेगा न मन का अँधेरा धरा को उठाओ, गगन को झुकाओ। हि... Read more

अब लौट आओ ना:- मोहित मिश्रा

अब लौट आओ ना। बीत रहे जो पल तुम्हारे बिन, सौ बरस गुज़र रहा एक छिन , सुना सा है मन का कोना, खलता यूँ है तेरा ना होना , राह खोज... Read more

शुभ-रात्रि कविता

प्रिये तीव्र निद्रा से बाधित, थके हुए अलसित नयनों में, मधुर-मनोहर रूप सजाए, स्वप्नों में उन्माद लिए, मैं तुमसे मिलने आऊँगा, मैं... Read more

प्रेम-प्रभाव:- मोहित मिश्रा

मेरे प्यार, मजबूर हूँ मैं! शब्दों के संसार के अलावा कुछ भी तो नहीं है देने के लिए मेरे पास। कुछ भी नहीं, सच में! क्योंकि तुमसे... Read more

बाबा नागार्जुन

यात्री उपनाम से अपनी लेखन यात्रा की शुरुवात करने वाले हिन्दी के फक्क्ड़-घुमक्क्ड कवि श्री वैद्यनाथ मिश्र उर्फ़ बाबा नागार्जुन का जन्म ... Read more

होली और यादें :-मोहित

फिर से होली आ गयी है , यादें मन में छा गयीं हैं , यादों का है क्या ठिकाना , इनका तो है आना जाना। पर वो होली और थी जब , घर की ... Read more

ये मत सोचो रुक जाऊंगा:-मोहित मुक्त

ये मत सोचो रुक जाऊंगा। बेताब लहर के धक्कों से - नौका चूर हो जाएगी, नियति की वक्र नजर मुझपर - माना की क्रूर हो जाएगी , तूफां ह... Read more