अध्यापक

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पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशित कविताएँ

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माँं:जीवन का पर्याय

हे माँ जब तुम्हारे गर्भ में था तब भी स्वर्ग में था जब तुम्हारी गोद में आया संसार स्वर्ग हो गया जीवन दिया माँ तुमने इस जीव को... Read more

अमृत की बूंद :मैं रसभरी कविता!

मेरा गला घोंटकर गणिका की तरह बाज़ार में बेचने चले हो- - - मैं रस भरी कविता हूँ- - - मुझे तुकबंदी की परिधि में निचोड़कर !नीरस न ... Read more

संवेदनाएँ सस्ती हो गईं!

चौखट पर टिकी आँखें गली से गुजरते डाकिया से लपककर पूछ ही लेतीं थीं! मेरे नाम की चिट्टी तो नहीं आई कहीं से? कड़ी द... Read more

डिजिटल इंडिया का बाबू- - -

मुझे हैरानी हुई!और तनिक अफ़सोस भी। जब पोस्ट आॅफिस का तरुण बाबू पाॅलीथीन की गाँठ न खोल पाया जिसमें कुछ चिल्लर रखी थी दो-तीन दफा ... Read more