एम के कागदाना

फतेहाबाद

Joined November 2018

कवयित्री

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दिल

वर्ण पिरामिड है दिल डरता अब मेरा उस गली में रहता है जहाँ वो दिल चोर वहाँ। ए हवा उससे कह देना चोरी करना अच्छा नहीं... Read more

बेटियां

"बेटियाँ" मात्र कहने भर से सशक्तिकरण न हुआ न होगा। बेटी की सुरक्षा का जिम्मा अब हमें उठाना ही होगा। बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ नारे स... Read more

बेटियां

"बेटियाँ" मात्र कहने भर से सशक्तिकरण न हुआ न होगा। बेटी की सुरक्षा का जिम्मा अब हमें उठाना ही होगा। बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ नारे स... Read more

ऊंच नीच

"ऊंच-नीच" ऊंच-नीच और अमीरी-गरीबी से हो जा मनुज उन्मुक्त तू जीवन जीओ सरल और शुद्ध प्रेम प्यार से रहकर सबसे नफरत की दीवार... Read more

मां

किसी की भी नजरों में मां का प्यार नजर ही नहीं आता है मां की लोरी सुनने वालो मां का दर्द ए हाल नजर नहीं आता है अपने आंसु बचा कर... Read more

मां

किसी की भी नजरों में मां का प्यार नजर ही नहीं आता है मां की लोरी सुनने वालो मां का दर्द ए हाल नजर नहीं आता है अपने आंसु बचा कर... Read more