MITHILESH RAI

वाराणसी

Joined January 2017

#महादेव

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#महादेव_की_मुक्तक_रचनाऐं
सफ़रनामा
मधुबन(काव्य संग्रह)
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अनुभूति (काव्य संग्रह)
साहित्य उदय (काव्य संग्रह)
भाव कलश (काव्य संग्रह-आगमन)
शब्दों की उड़ान (काव्य संग्रह)
आदि

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मुक्तक

मेरी ज़िन्दग़ी तेरी यादों में बंट जाती है। मेरी तिश्नग़ी तेरे ख़्वाबों से लिपट जाती है। जब ख़ामोशी का मंज़र होता है तन्हाई में- त... Read more

मुक्तक

मैं सोचता हूँ आज़ तुमसे मुलाक़ात कर लूँ। मैं तेरी ज़ुल्फ़ों के तले अपनी रात कर लूँ। तुम तेज़ कर लो आज़ फ़िर से तीरे-नज़रों को- मै... Read more

मुक्तक

तेरी ज़िन्दग़ी भर मुलाक़ात याद रहेगी। तेरी नज़रों की सौग़ात याद रहेगी। मुझे देख़कर शर्माती हुई तेरी अदाएँ- तेरे ख़्वाबों की हंसी... Read more

मुक्तक

कभी-कभी रिश्ते भी बेग़ाने नज़र आते हैं। कभी-कभी अपने भी अनज़ाने नज़र आते हैं। जब यादें तोड़ देतीं हैं क़िस्तों में दिलों को- उस व... Read more

मुक्तक

तेरी यादों के क़दम रुकते नहीं कभी। तेरी ज़ुल्फ़ों के सितम रुकते नहीं कभी। रोशनी ज़लती है हर दम अरमानों की- तेरी चाहत के वहम रुकते... Read more

मुक्तक

मैं शाम होते ही किधर जाता हूँ? मैं तेरे ख़्यालों से घबराता हूँ। इस क़दर ख़ौफ़ होता है यादों का- ज़ाम की महफ़िल में नज़र आता हू... Read more

मुक्तक

तेरी सूरत के अभी दिवाने बहुत से हैं। तेरी अदा के अभी अफ़साने बहुत से हैं। तस्वीरे-अंज़ाम को मिटाऊँ किस तरह? ज़ख़्मों के निशान अभ... Read more

मुक्तक

हर शख़्स की क़हानी को नाम नहीं मिलता। हर क़ोशिश को क़ोई अंज़ाम नहीं मिलता। ठहरी हुई यादों में ज़ी लेते हैं मग़र- मंज़िल को पाने क... Read more

मुक्तक

मैं हर ख़्वाब में एक मंज़र रखता हूँ। मैं ज़ख़्मों को दिल के अंदर रखता हूँ। कभी इम्तिहान ले लो मेरे सब्र का- मैं ख़ुद में ग़मों का... Read more

मुक्तक

तेरा जो दीवाना था कब का मर गया है। तेरा जो परवाना था कब का डर गया है। तूफ़ान आता था कभी दिल में ज़ुस्तज़ू का- तेरी बेवफ़ाई से कब ... Read more

मुक्तक

अपनी तन्हाई को कब तक सहूँ मैं? अपनी बेचैनी को किससे कहूँ मैं? बूँदें टपक रही हैं यादों की मग़र- अश्क़ों के भंवर में कब तक रहूँ मै... Read more

मुक्तक

मैं तेरे तसव्वुर को चूमता रहता हूँ। मैं राहे-ज़ुस्तज़ू में घूमता रहता हूँ। जब घेरती है मदहोशी तेरे हुस्न की- मैं मयक़दों में अक़्... Read more

मुक्तक

तेरे बग़ैर तेरी तस्वीरों का क्या करूँ? मैं तेरे ख़्यालों की जंज़ीरों का क्या करूँ? अश्क़ों को छुपा लेता हूँ पलकों में लेकिन- मैं ... Read more

मुक्तक

तेरे बग़ैर तेरी तस्वीरों का क्या करूँ? मैं तेरे ख़्यालों की जंज़ीरों का क्या करूँ? अश्क़ों को छुपा लेता हूँ पलकों में लेकिन- मैं ... Read more

मुक्तक

अब दर्द ही तेरा बहाना रह गया है। ख़्वाबों का ख़्यालों में आना रह गया है। वक़्त ने धुंधला दिया है यादों को मग़र- दिल में चाहतों का... Read more

मुक्तक

क्यों तुम मेरी यादों में ग़म कर जाते हो? आकर मेरी निगाह को नम कर जाते हो। दर्द की आहट से डर जाती है ज़िन्दग़ी- मेरी ख़ुशियों के प... Read more

मुक्तक

तेरा तसव्वुर मुझे जुनून देता है। तेरे सिवा कुछ नहीं सुकून देता है। रातों को जगाती है तेरी तमन्ना- तेरा हुस्न दिल को मज़मून देता ह... Read more

मुक्तक

तेरे सिवा नज़र में कोई तस्वीर नहीं है। तेरे सिवा ख़्याल की कोई जागीर नहीं है। चाहत के हर पन्ने पर परछाई है तेरी- तेरे सिवा ख्व़ाब... Read more

मुक्तक

मेरी आरज़ू मेरा मुकाम तुम हो। मेरी मंज़िल मेरा अंज़ाम तुम हो। तुमसे ही हासिल है मेरी हर ख़ुशी- मेरी हर सुबह मेरी शाम तुम हो। म... Read more

मुक्तक

जब कोई चाहत क़रीब हो जाती है। हाल-ए-ज़िन्दग़ी अज़ीब हो जाती है। कभी मुड़ते नहीं हैं रास्ते ख़्यालों के- रश्म बंदिशों की रकीब हो ... Read more

मुक्तक

होते ही सुबह तेरी तस्वीर से मिलता हूँ। अपनी तमन्नाओं की ज़ागीर से मिलता हूँ। नज़रों को घेर लेता है यादों का समन्दर- चाहत की लिपटी... Read more

मुक्तक

आज फ़िर हाथों में जाम लिए बैठा हूँ। तेरे दर्द का पैगाम लिए बैठा हूँ। वस्ल की निगाहों में ठहरी हैं यादें- आज फ़िर फुरक़त की शाम लि... Read more

मुक्तक

मैं जब कभी तेरी तस्वीर देख लेता हूँ। मैं अपने ख़्यालों की तक़दीर देख लेता हूँ। ख़्वाबों के समन्दर में उठती है चिंगारी- मैं तेरी अ... Read more

मुक्तक

जब कोई चाहत क़रीब हो जाती है। हाल-ए-ज़िन्दग़ी अज़ीब हो जाती है। कभी मुड़ते नहीं हैं रास्ते ख़्यालों के- रस्म बंदिशों की रकीब हो ... Read more

मुक्तक

जुस्तज़ू क़ुरबत की फ़िर से बहक रही है। तेरी बेरुख़ी से मगर उम्र थक रही है। रात है ठहरी सी तेरे इंतज़ार में- तिश्नगी आँखों में फ़ि... Read more

मुक्तक

अंज़ाम ज़िन्दग़ी का अफ़साने जैसा है। कभी हँसाने कभी रूलाने जैसा है। जब कभी टकराते हैं तूफ़ान यादों के- किसी का ज़िक्र ख़ुद को तड़... Read more

मुक्तक

मैं जी रहा हूँ तुमको पाने की आस लिये। मैं जी रहा हूँ तेरी सीने में प्यास लिये। दर्द उठ जाता है यादों की चोट से- तनहा वक़्त में ते... Read more

मुक्तक

मेरी नज़र के सामने साक़ी को रहने दो। हाथों में जाम है मगर बाक़ी को रहने दो। धधक रही हैं तस्वीरें यादों की दिल में- चाहत की ज़ेहन ... Read more

मुक्तक

तुम मुझे फ़िर से याद आने लगे हो। तुम मेरे दर्द को जगाने लगे हो। तुम पास हो इतना मेरे ख़्यालों में- तुम मेरी रूह को जलाने लगे हो। ... Read more

मुक्तक

तेरी चाहत मेरी आदत की तरह है। मेरी ज़िन्दग़ी में इबादत की तरह है। धड़कनों में गूँज़ती है यादों की सदा- मेरी बंदगी की इबारत की तरह... Read more

मुक्तक

तेरे बग़ैर तन्हा रहने लगा हूँ मैं। तेरी बेवफ़ाई को सहने लगा हूँ मैं। जब भी ग़म तड़पाता है मेरे ख़्यालों को- अश्क़ बनकर पलकों से ब... Read more

मुक्तक

सामने है साक़ी हाथों में शराब है। मेरी निगाहों में तेरा ही शबाब है। प्यास जल रही है तेरी कब से लबों पर- हुस्न का ख़्यालों में फ़ै... Read more

मुक्तक

सामने है साक़ी हाथों में शराब है। मेरी निगाहों में तेरा ही शबाब है। प्यास जल रही है तेरी कब से लबों पर- हुस्न का ख़्यालों में फ़ै... Read more

मुक्तक

तुम कभी दिल से न रिश्ता तोड़ देना। तुम कभी तन्हा न मुझको छोड़ देना। मुश्किल है अब तुम बिन मेरी ज़िन्दग़ी- राहे-दर्द पर न मुझको मो... Read more

मुक्तक

मैं तेरे बग़ैर तेरी तस्वीरों का क्या करूँ? मैं तड़पाती यादों की जागीरों का क्या करूँ? मैं अश्कों को पलकों में रोक सकता हूँ लेकिन- ... Read more

मुक्तक

मेरे दर्द को तेरा अफ़साना याद है। मेरे ज़ख्म को तेरा ठुकराना याद है। लबों को खींच लेती है पैमाने की तलब- हर शाम साक़ी को मेरा आना... Read more

मुक्तक

मैं अधूरा सा हूँ तेरे नाम के बग़ैर। यादों की तड़पाती हुई शाम के बग़ैर। मैं देखकर ज़िन्दा हूँ तेरी तस्वीरें- आँखें भी सोती नहीं है... Read more

मुक्तक

तेरी गली से आज फ़िर होकर गुज़रा हूँ। तेरी गली से आज फ़िर रोकर गुज़रा हूँ। आवाज़ दे रही थी मुझे तेरी तिश्नगी- तेरी गली से दर्द को ... Read more

मुक्तक

तेरी आरज़ू से मुँह मोड़ नहीं पाता हूँ। तेरी तमन्नाओं को छोड़ नहीं पाता हूँ। यादों में ढूंढ़ लेता हूँ तेरी तस्वीरें- तेरे प्यार से... Read more

मुक्तक

कभी तो किसी शाम को घर चले आओ। कभी तो ग़मों से बेख़बर चले आओ। हर रात बीत जाती है मयखाने में- कभी तो रास्ते से मुड़कर चले आओ। मु... Read more

मुक्तक

काश तेरी उल्फ़त की हर बात भूल जाऊँ। काश तेरी कुर्बत की हर रात भूल जाऊँ। भूल जाऊँ दिल से कभी तेरे सितम को- काश तेरे ज़ख्मों की सौग... Read more

मुक्तक

तेरा नाम कागज़ पर बार-बार लिखता हूँ। तेरे प्यार को दिल में बेशुमार लिखता हूँ। टूटेगा न सिलसिला तेरी तमन्नाओं का- तेरे ख़्यालों पर... Read more

मुक्तक

मैं तेरी गुफ्तगूं की राह ढूंढ़ता रहता हूँ। मैं तेरी ज़ुल्फ़ों की पनाह ढूंढ़ता रहता हूँ। जब भी नज़र में आती हैं तस्वीरें यादों की- ... Read more

मुक्तक

तेरा ख़्याल ख़ुद को समझाने का रास्ता है। तेरी याद दिल को बहलाने का रास्ता है। जब जाग जाती है लबों पर तेरी तिश्नगी- हर शाम मयखानों... Read more

मुक्तक

मैं ख़ुद की तरह ज़ीने का जुनून रखता हूँ। मैं दिल में अरमानों का मज़मून रखता हूँ। हौसला क़ायम है अभी दर्द को सहने का- मैं ख़ुद में... Read more

मुक्तक

जबसे ज़िन्दग़ी में आप मिल गये हैं। रास्ते मंज़िल के फ़िर से खिल गये हैं। जागे हुए पल हैं ख़्वाबों के नज़र में- ज़ख्म भी जिग़र के ... Read more

मुक्तक

ग़मों को दिल में छुपाना आसान नहीं है। शमा यादों की बुझाना आसान नहीं है। जब भी छूट जाता है हमसफ़र राहों में- अकेले लौट कर आना आसान... Read more

मुक्तक

मैं हार कर भी तेरी कहानी की तरह हूँ। मैं हार कर भी तेरी निशानी की तरह हूँ। मैं ठोकरें खाता रहा हूँ उम्र भर लेकिन- मैं जोशे-ज़िन्द... Read more

मुक्तक

क्यों तुम शमा-ए-चाहत को बुझाकर चले गये? क्यों तुम मेरी ज़िन्दग़ी में आकर चले गये? हर ग़म को जब तेरे लिए सहता रहा हूँ मैं- क्यों त... Read more

मुक्तक

मैं अपनी तमन्नाओं पर नकाब रखता हूँ। मैं करवटों में चाहत की किताब रखता हूँ। जब भी क़रीब होती हैं यादें ज़िन्दग़ी की- मैं दर्द तन्ह... Read more