MITHILESH RAI

वाराणसी

Joined January 2017

Books:
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#मिथिलेश_राय_की_मुक्तक_रचनाऐं
सफ़रनामा
मधुबन(काव्य संग्रह)
मधुशाला(काव्य संग्रह)
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साहित्य उदय (काव्य संग्रह)
भाव कलश (काव्य संग्रह-आगमन)
शब्दों की उड़ान (काव्य संग्रह)
नीलाम्बर
आदि

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मुक्तक

कोई ख़ामोशी भी सब कुछ कह जाती है। कोई चाहत दिल की सब कुछ सह जाती है। लम्हें बीत जाते हैं गुफ़्तग़ूँ के लेक़िन- कोई किसी की दिल मे... Read more

मुक्तक

तेरा ज़िक्र दर्द का बहाना बन गया है। मेरी बेख़ुदी का अफ़साना बन गया है। हर वक़्त सताती है मुझे तेरी दिल्लग़ी- तेरी बेरुख़ी का नज़... Read more

मुक्तक

तेरा ज़िक्र दर्द का बहाना बन गया है। मेरी बेख़ुदी का अफ़साना बन गया है। हर वक़्त सताती है मुझे तेरी दिल्लग़ी- तेरी बेरुख़ी का नज़... Read more

मुक्तक

ख़्वाब टूटते हैं मग़र यादें रह जातीं हैं। चाहतों की दिल में फ़रियादें रह जातीं हैं। देख़तीं रहतीं हैं आँखें राहें मंज़िल की- वस्ल... Read more

मुक्तक

कोई कहे कैसे उसको ग़म नहीं है? जो कुछ मिल गया है उसको कम नहीं है। तुम हर तरफ़ ढूँढ़ लो इलाज़े-मर्ज़ को- इस दर्द का कोई भी मरहम नह... Read more

मुक्तक

कोई कहे कैसे उसको ग़म नहीं है? जो कुछ मिल गया है उसको कम नहीं है। तुम हर तरफ़ ढूँढ़ लो इलाज़े-मर्ज़ को- इस दर्द का कोई भी मरहम नह... Read more

मुक्तक

तुझे भूलने की क़ोशिश नाक़ाम हो रही है। तेरे बग़ैर मेरी तन्हा शाम हो रही है। मैं भूल गया हूँ अपनी तमन्नाओं को मग़र- हर साँस की रवा... Read more

मुक्तक

कभी-कभी ख़्वाब भी सुहाना लगता है। कभी-कभी ख़्याल भी फ़साना लगता है। कभी किसी को हम सफ़र मिलता ही नहीं- कभी किसी को प्यार पुराना ल... Read more

मुक्तक

मुझे तेरी चाहत ने सँभलने न दिया। मुझे दर्द से ख़ुद को ज़ुदा करने न दिया। आती रहती है सदा यादों की हर-पल- मुझे ज़ख़्म देकर भी कभी ... Read more

मुक्तक

मैं तेरी तस्वीर को कब तलक़ देख़ूँ? मैं दर्द की लक़ीर को कब तलक़ देख़ूँ? सिसक रहें हैं लफ़्ज़ भी मेरी ज़ुबाँ पर- मैं ज़ख़्में-त... Read more

मुक्तक

तुम कभी तो आओगे सबको छोड़कर। रस्मों की जंज़ीर से ख़ुद को तोड़कर। हमको मिल जाएँगीं कभी तो मंज़िलें- दर्द की राहों से रुख़ अपना मोड... Read more

मुक्तक

तुम कभी तो आओगे सबको छोड़कर। रस्मों की जंज़ीर से ख़ुद को तोड़कर। हमको मिल जाएँगीं कभी तो मंज़िलें- दर्द की राहों से रुख़ अपना मोड... Read more

मुक्तक

तुम पास नहीं हो लेक़िन तन्हा रात वही है। चाहत है वही यादों की बरसात वही है। हर ख़ुशी भी दूर है मेरे आशियाने से- ख़ामोशी के पल में... Read more

मुक्तक

आप ज़बसे ज़िन्दग़ी में मिल गये हैं। रास्ते मंज़िल के फ़िर से ख़िल गये हैं। ज़ाग़े हुए से ख़्वाब हैं निग़ाहों में- ज़ख़्म भी जिग़र... Read more

मुक्तक

तुम मुझको ग़म देकर भी ज़ीने नहीं देते। तुम ज़ख़्म-ए-जिग़र को भी सीने नहीं देते। मैं ढूँढ़ता हूँ सब्र को पैमानों में मग़र- तुम ज़... Read more

मुक्तक

हादसे कुछ इस क़दर हो गये हैं। हम ग़में-हालात से रो गये हैं। ज़िन्दग़ी बिख़री है रेत की तरह- हम राहे-बेख़ुदी में खो गये हैं। म... Read more

मुक्तक

हादसे कुछ इस क़दर हो गये हैं। हम ग़में-हालात से रो गये हैं। ज़िन्दग़ी बिख़री है रेत की तरह- हम राहे-बेख़ुदी में खो गये हैं। म... Read more

मुक्तक

जब कभी भी तुमको देखता है कोई। बेताब रास्तों से गुज़रता है कोई। किस तरह रुकेगा निग़ाहों का तड़पना? जब हुस्न की आग़ से ज़लता है कोई... Read more

मुक्तक

तुम मुझको ग़म देकर भी ज़ीने नहीं देते। तुम ज़ख़्म-ए-जिग़र को भी सीने नहीं देते। मैं ढूँढ़ता हूँ सब्र को पैमानों में मग़र- तुम ज़... Read more

मुक्तक

मेरी ज़िन्दग़ी तेरी यादों में बंट जाती है। मेरी तिश्नग़ी तेरे ख़्वाबों से लिपट जाती है। जब ख़ामोशी का मंज़र होता है तन्हाई में- त... Read more

मुक्तक

मैं सोचता हूँ आज़ तुमसे मुलाक़ात कर लूँ। मैं तेरी ज़ुल्फ़ों के तले अपनी रात कर लूँ। तुम तेज़ कर लो आज़ फ़िर से तीरे-नज़रों को- मै... Read more

मुक्तक

तेरी ज़िन्दग़ी भर मुलाक़ात याद रहेगी। तेरी नज़रों की सौग़ात याद रहेगी। मुझे देख़कर शर्माती हुई तेरी अदाएँ- तेरे ख़्वाबों की हंसी... Read more

मुक्तक

कभी-कभी रिश्ते भी बेग़ाने नज़र आते हैं। कभी-कभी अपने भी अनज़ाने नज़र आते हैं। जब यादें तोड़ देतीं हैं क़िस्तों में दिलों को- उस व... Read more

मुक्तक

तेरी यादों के क़दम रुकते नहीं कभी। तेरी ज़ुल्फ़ों के सितम रुकते नहीं कभी। रोशनी ज़लती है हर दम अरमानों की- तेरी चाहत के वहम रुकते... Read more

मुक्तक

मैं शाम होते ही किधर जाता हूँ? मैं तेरे ख़्यालों से घबराता हूँ। इस क़दर ख़ौफ़ होता है यादों का- ज़ाम की महफ़िल में नज़र आता हू... Read more

मुक्तक

तेरी सूरत के अभी दिवाने बहुत से हैं। तेरी अदा के अभी अफ़साने बहुत से हैं। तस्वीरे-अंज़ाम को मिटाऊँ किस तरह? ज़ख़्मों के निशान अभ... Read more

मुक्तक

हर शख़्स की क़हानी को नाम नहीं मिलता। हर क़ोशिश को क़ोई अंज़ाम नहीं मिलता। ठहरी हुई यादों में ज़ी लेते हैं मग़र- मंज़िल को पाने क... Read more

मुक्तक

मैं हर ख़्वाब में एक मंज़र रखता हूँ। मैं ज़ख़्मों को दिल के अंदर रखता हूँ। कभी इम्तिहान ले लो मेरे सब्र का- मैं ख़ुद में ग़मों का... Read more

मुक्तक

तेरा जो दीवाना था कब का मर गया है। तेरा जो परवाना था कब का डर गया है। तूफ़ान आता था कभी दिल में ज़ुस्तज़ू का- तेरी बेवफ़ाई से कब ... Read more

मुक्तक

अपनी तन्हाई को कब तक सहूँ मैं? अपनी बेचैनी को किससे कहूँ मैं? बूँदें टपक रही हैं यादों की मग़र- अश्क़ों के भंवर में कब तक रहूँ मै... Read more

मुक्तक

मैं तेरे तसव्वुर को चूमता रहता हूँ। मैं राहे-ज़ुस्तज़ू में घूमता रहता हूँ। जब घेरती है मदहोशी तेरे हुस्न की- मैं मयक़दों में अक़्... Read more

मुक्तक

तेरे बग़ैर तेरी तस्वीरों का क्या करूँ? मैं तेरे ख़्यालों की जंज़ीरों का क्या करूँ? अश्क़ों को छुपा लेता हूँ पलकों में लेकिन- मैं ... Read more

मुक्तक

तेरे बग़ैर तेरी तस्वीरों का क्या करूँ? मैं तेरे ख़्यालों की जंज़ीरों का क्या करूँ? अश्क़ों को छुपा लेता हूँ पलकों में लेकिन- मैं ... Read more

मुक्तक

अब दर्द ही तेरा बहाना रह गया है। ख़्वाबों का ख़्यालों में आना रह गया है। वक़्त ने धुंधला दिया है यादों को मग़र- दिल में चाहतों का... Read more

मुक्तक

क्यों तुम मेरी यादों में ग़म कर जाते हो? आकर मेरी निगाह को नम कर जाते हो। दर्द की आहट से डर जाती है ज़िन्दग़ी- मेरी ख़ुशियों के प... Read more

मुक्तक

तेरा तसव्वुर मुझे जुनून देता है। तेरे सिवा कुछ नहीं सुकून देता है। रातों को जगाती है तेरी तमन्ना- तेरा हुस्न दिल को मज़मून देता ह... Read more

मुक्तक

तेरे सिवा नज़र में कोई तस्वीर नहीं है। तेरे सिवा ख़्याल की कोई जागीर नहीं है। चाहत के हर पन्ने पर परछाई है तेरी- तेरे सिवा ख्व़ाब... Read more

मुक्तक

मेरी आरज़ू मेरा मुकाम तुम हो। मेरी मंज़िल मेरा अंज़ाम तुम हो। तुमसे ही हासिल है मेरी हर ख़ुशी- मेरी हर सुबह मेरी शाम तुम हो। म... Read more

मुक्तक

जब कोई चाहत क़रीब हो जाती है। हाल-ए-ज़िन्दग़ी अज़ीब हो जाती है। कभी मुड़ते नहीं हैं रास्ते ख़्यालों के- रश्म बंदिशों की रकीब हो ... Read more

मुक्तक

होते ही सुबह तेरी तस्वीर से मिलता हूँ। अपनी तमन्नाओं की ज़ागीर से मिलता हूँ। नज़रों को घेर लेता है यादों का समन्दर- चाहत की लिपटी... Read more

मुक्तक

आज फ़िर हाथों में जाम लिए बैठा हूँ। तेरे दर्द का पैगाम लिए बैठा हूँ। वस्ल की निगाहों में ठहरी हैं यादें- आज फ़िर फुरक़त की शाम लि... Read more

मुक्तक

मैं जब कभी तेरी तस्वीर देख लेता हूँ। मैं अपने ख़्यालों की तक़दीर देख लेता हूँ। ख़्वाबों के समन्दर में उठती है चिंगारी- मैं तेरी अ... Read more

मुक्तक

जब कोई चाहत क़रीब हो जाती है। हाल-ए-ज़िन्दग़ी अज़ीब हो जाती है। कभी मुड़ते नहीं हैं रास्ते ख़्यालों के- रस्म बंदिशों की रकीब हो ... Read more

मुक्तक

जुस्तज़ू क़ुरबत की फ़िर से बहक रही है। तेरी बेरुख़ी से मगर उम्र थक रही है। रात है ठहरी सी तेरे इंतज़ार में- तिश्नगी आँखों में फ़ि... Read more

मुक्तक

अंज़ाम ज़िन्दग़ी का अफ़साने जैसा है। कभी हँसाने कभी रूलाने जैसा है। जब कभी टकराते हैं तूफ़ान यादों के- किसी का ज़िक्र ख़ुद को तड़... Read more

मुक्तक

मैं जी रहा हूँ तुमको पाने की आस लिये। मैं जी रहा हूँ तेरी सीने में प्यास लिये। दर्द उठ जाता है यादों की चोट से- तनहा वक़्त में ते... Read more

मुक्तक

मेरी नज़र के सामने साक़ी को रहने दो। हाथों में जाम है मगर बाक़ी को रहने दो। धधक रही हैं तस्वीरें यादों की दिल में- चाहत की ज़ेहन ... Read more

मुक्तक

तुम मुझे फ़िर से याद आने लगे हो। तुम मेरे दर्द को जगाने लगे हो। तुम पास हो इतना मेरे ख़्यालों में- तुम मेरी रूह को जलाने लगे हो। ... Read more

मुक्तक

तेरी चाहत मेरी आदत की तरह है। मेरी ज़िन्दग़ी में इबादत की तरह है। धड़कनों में गूँज़ती है यादों की सदा- मेरी बंदगी की इबारत की तरह... Read more

मुक्तक

तेरे बग़ैर तन्हा रहने लगा हूँ मैं। तेरी बेवफ़ाई को सहने लगा हूँ मैं। जब भी ग़म तड़पाता है मेरे ख़्यालों को- अश्क़ बनकर पलकों से ब... Read more