milan bhatnagar

Joined February 2017

बाल्यकाल से ही कविता, गीत, ग़ज़ल, और छंद रहित आधुनिक कविताएँ लिखना मेरा शौक रहा है कुछ गीतों को स्वर भी दिया गया है !
“गज़ल गीतिका” मेरा सम्पूर्ण संग्रह है

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कब बताता है

चेहरे का हर भाव किया वादा कब बताता है कितना दर्द है दिल में आयना कब बताता है क्यों तडप तडप के जान दे रहीं हैं सदियों से इन ल... Read more

बहार ही बहार

" बहार ही बहार " खिल रहे हैं फूल यहाँ डाल डाल पर, आज है बहार ही बहार ज़िन्दगी ! मधुप चूसते भँवर फूल फूल पर, आज है खुमार ही... Read more

आस्तीनों में

सांप आस्तीनों में पल न पायेंगे हमारे दुश्मन हमें छल न पायेंगे मंजिल तक पहुंचना आसाँ नहीं ये रस्ते सफर पे चल न पायेंगे जितने... Read more

पहली पहली बार

यादों में वो लम्हे बसे हों पहली पहली बार राहों में हम तुम मिलें हों पहली पहली बार पिघल के मेरी बाहों में समाये तुम ऐसे कि धर... Read more

सफीना

क्यों ग़मों मे बशर डूबता जा रहा है फासला इंसानों में बढ़ता जा रहा है मुल्क का जाने क्या अन्जाम होगा नेतागिरी का पारा चढ़ता जा ... Read more

शायराना

शहरे मौसम बड़ा आशिकाना हुआ दिल मेरा कुछ पागल दीवाना हुआ घर से बाहर पाँव तो निकालें ज़रा तुमको देखे हमें अब ज़माना हुआ चन्द... Read more

हवा

सुलगती आग को और भड़का देगी हवा धुँआ बहुत दूर तक उड़ा ले जायेगी हवा साया-ऐ-शजर पर भरोसा नहीं कीजिये जानें कब दरख्तों को गिरा जा... Read more

याद आई है मुझे

वस्लो-फुर्कत की हर रात याद आई है मुझे याद किया है तो हर बात याद आई है मुझे ज़रा ज़रा सी बात पे रात दिन उदास रहना मेरी दिल्लगी अजब... Read more

इम्तेहान में पास कर (विनती)

हे प्रभु, इस दास की इतनी विनय सुन लिजिये, मार ठोकर नाव मेरी पार ही कर दीजिये ! मैं नहीं डरता, प्रलय से, मौत या तूफ़ान से... Read more

न वो रात सवांरा करे

न वो रात सवारा करे कोई चाँद से कह तो दे, न वो रात सवारा करे, वो दूर हों ऐसे में, तो ये दिल, कैसे गवारा करे, पलकों पे सुनहरे से सप... Read more

मिलन ऋतु

मिलन ऋतु आयी दीवानी बरसात, भीगी भीगी हो गयी, बौराया मौसम, छू कर भीगा भीगा यौवन, आँखें कजरारी बहकी बहकी हो गयीं, होंठ साँसों ... Read more

तुम मेरी कविता हो

मेरे हर शब्द की, अपनी, एक अलग कहानी है, मेरे दर्द की, अपनी, एक अलग रवानी है, और इसलिए, मै गीतों को, शब्दों में ढाल, तुम तक ... Read more

सोने की चिड़िया

एक रंग बिरंगी, आकर्षक,बहुत निराली थी चिड़िया, तिनका तिनका तोड़ जोड़ कर,रहने आई थी चिड़िया! बड़े वृक्ष की ऊंची शाख पर, छोटा अपना घर ब... Read more

बकलोल

"बकलोल" खून के रिश्ते बहुत अनमोल होते हैं सियासत में यहाँ पे भी झोल होते हैं ! भूख में सत्ता की सबक भूल जाते हैं पिता और ब... Read more

गुंजाइश

तू साथ है तो ज़िन्दगी भी ख्वाइश है वरना ये महफिल तो एक नुमाइश है कैसे इशारों इशारों में होतीं हैं गुफ्तगू हमारी मोहब्ब्त की ये... Read more

कृतिम ज़िन्दगी

मैं मौत नहीं, मैं जीवन हूँ, ज़िन्दगी के बोझ से, बुझा बुझा सा हूँ, मेरा जीवन कृतिम है, मेरी मौत कृतिम होगी, इसी लिए, कि मेरा सम... Read more

मिलन

साहित्यपीडिया पर मेरे मिलन का एहसास, मेरी पहली रचना जो १९६५ के आस पास लिखी गई थी 'मिलन' का मिलन मुबारक हो तुझे मैं जो मिल... Read more