M Furkan Ahmad

Lucknow

Joined June 2017

Urdu Poetry

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एक अमाल मुसीबत टाल भी सकता हैं एक गुनाह मुसिबत में डाल भी सकता हैं

एक अमाल मुसीबत टाल भी सकता हैं एक गुनाह मुसिबत में डाल भी सकता हैं पढ़ा करो नबी-ऐ-पाक पर दुरुदो सलाम ये अज़ाब-ऐ-आग से निकाल भी स... Read more

घुमा फ़िरा कर नहीं सीधे मिश्रे में बात करता हैं हर उर्दू जुबा वाला बड़े सलिके में बात करता हैं

घुमा फ़िरा कर नहीं सीधे मिश्रे में बात करता हैं हर उर्दू जुबा वाला बड़े सलिके में बात करता है ज़िन्दगी जिने का सलिका ही नहीं आता ... Read more

खुद को अब तड़पाना नहीं आँखो में लहु लाना नहीं

खुद को अब तड़पाना नहीं आँखो में लहु लाना नहीं टुट कर फ़िर टुट सकता हैं रुलाकर फ़िर हंसाना नहीं रहा हूँ ता-उम्र आगोश में किसी ... Read more

ज़हर-ऐ-गम पी कर जिने का दम रख्खा हैं मगर तेरी यादो ने आँखों को नम रख्खा हैं

ज़हर-ऐ-गम पी कर जिने का दम रख्खा हैं मगर तेरी यादो ने आँखों को नम रख्खा हैं ज़फ़ा कर वफ़ा कर या मुझे कत्ल कर,मगर तेरे नाम का दिया ... Read more

किसी होगी गलतफ़हमी तो कोई रुठ जाएगा सात जन्मो का वादा एक पल में टूट जाएगा

किसी होगी गलतफ़हमी तो कोई रुठ जाएगा सात जन्मो का वादा एक पल में टूट जाएगा फ़लाँ आंखों के मोतीयो का सबब तु मत पूछ उसके दर्द से र... Read more

नाजुक होती है मोहब्बत की डोर

गैर मजहबी से मुह न मोड़ा करो निचे बुलंदी को तुम न थोड़ा करो दोस्त ही है जो गम बाटने आते है इन फरिश्तों को तुम न छोड़ा करो ना... Read more

शब ओ रोज़ ओ माह ओ साल 'अहमद'

मोहब्बत की है हर एक गम सहना है अपनी रूदाद किसी से भी न कहना है `````````````````````````````````````````` बस एक ही खुवाहिश है मेर... Read more

आंधियो हवाओ का रुख

चााहत का किसी दिल में अभी किला नहीं है एक लड़की ही है कोई अभी इला नहीं है ``````````````````````````````````````````````` आंधियो ... Read more

हम तेरे लबो रुख्सर में

हम तेरे लबो रुख्सर में खोना चहते हैं हर लम्हा तेरे अगोश में सोंना चहते हैं तू मुझसे बिछड़ने चहती है तो हो जा सीने से बस तेरे लग... Read more

हिन्दुस्तान लेकर निकला हूँ

छोटे शहर से मैं बड़े अरमान ले कर निकला हूँ मैं खुद अपनी मौत का सामान लेकर निकला हूँ मेरे वतन की वफादारी पर ऐ ऊँगली उठाने वालो ... Read more