भारत संचार निगम लिमिटेड से रिटायर्ड ओ एस। वर्तमान में अजमेर में निवास।
प्रारंभ से ही सर्व प्रिय शौक – लेखन कार्य।
पूर्व में “नई दुनिया” एवं “राजस्थान पत्रिका “समाचार-पत्रों व ” सरिता” में रचनाएँ प्रकाशित।
जयपुर के पाक्षिक पत्र “कायस्थ टुडे” एवं फेसबुक ग्रुप्स “विश्व हिंदी संस्थान कनाडा” एवं “प्रयास” में अनवरत लेखन कार्य।
लघु कथा, कहानी, कविता, लेख, दोहे, गज़ल, वर्ण पिरामिड, हाइकू लेखन।

“माँ शारदे की असीम अनुकम्पा से मेरे अंतर्मन में उठने वाले उदगारों की परिणति हैं मेरी ये कृतियाँ।”
जय वीणा पाणि माता!!!

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मर्यादा पुरुषोत्तम

भारत है वह देश जिसको करता सकल विश्व प्रणाम। यह वो पावन देश है जिसमें जन्मे मर्यादा पुरुषोत्तम राम। थे श्री राम मर्यादा के स... Read more

कदम मिलाकर चलना होगा

हमारे प्यारे भारत देश की अब तकदीर बदलना होगा संकटमोचक विघ्नहर्ता बन कदम मिलाकर चलना होगा। क्योंकर ये विषाक्त हवाएँ आज हु... Read more

आगाज़ होली का

होली का आगाज़ चलो न चलते हैं रंगों ने दी आवाज़ चलो न चलते हैं बैर शत्रुता भेदभाव सबको दें भुला हर चेहरे पर प्रेम का रंग हम मलते... Read more

होली की मस्ती

सब रंगों के मेल से जैसे सज उठती रंगोली। वैसे ही सतरंगी- सी होती है प्यारी होली।। सब मिल जाते भुला कर निज जाति धर्म और बोली। भा... Read more

सफ़र

ये सफ़र ही तो हो जन्म से मृत्यु तक अबाध अनोखा सफ़र पल की भी न किसी को खबर कि होगा क्या बाद पल भर यहाँ खबर नहीं पल की तो ... Read more

प्रहलाद रूपी सत्य है होली

नन्ही-सी नवल-धवल नूतन अँखिंयों में कौंध रहे थे अनबूझे से प्रश्न कई नन्हा बोल उठा सुन मैया ! क्या होती है होली ? माँ ने ... Read more

पावन त्योहार

रंग उड़ाती होली आई रस बरसाती होली आई। चलो खूब रंगों से खेलें झूमती गाती होली आई। मस्ती में है सबका हाल टेसू फूले हैं डाल डा... Read more

जल शक्ति अभियान

आज समूचे विश्व सहित भारत में जल संकट के विकराल दौर से गुज़र रहा है। जल संकट से जन मानस त्राहि-त्राहि कर रहा है। वर्तमान समय की इस मह... Read more

मिलन

मीत मिलन की महती महिमा मिलो मोहब्बत से मन मीत संग मालिक की माया मोहे मोरा मन मन मचले मोहन से मिलन को मिलन में है मिली मि... Read more

आलिंगन

छायी देखो बसंत की मस्ती चली मदिर वासंती बयार। विटप संग लिपटी है वल्लरि आलिंगन संग निखरा प्यार। इन्हें बांहों का झूला कह दें... Read more

"मतलबी "

बिना स्वार्थ न पूछे कोई बिन काम के कोई न यार मतलब का हर इंसा बन्धु मतलबी है सारा संसार। आज समय वो है जग में। मतलब की साथी सं... Read more

शिकायत तो नहीं कोई

हमें तुमसे शिकायत तो नहीं कोई कि तुमने की शरारत तो नहीं कोई। हमें तुम मान सकते हो अजीज़ों में कि हम करते अदावत तो नहीं कोई। ... Read more

जीवित हैं संस्कार अभी

"चलो कुछ खा पी लें" पापा बिट्टू से बोले। बिट्टू माँ-पापा के साथ रेस्टोरेंट में बैठा था। मैन्यू कार्ड बिट्टू के हाथ में था। उस... Read more

अनजान सफर

"जा री चंदू ड़ी। सब्ज़ी मंडी में से साग बीन कर ला। हाथ पैरों में जंग लगा है क्या चल उठ।" छगनी ने चंदा को दुत्कारा। आज कोई नयी बात ... Read more

सपने में

विरह के उठते धुंए में शनैः शनैः, तुम्हारे चेहरे का धुंधलाना। स्मरण कर-करके तुम्हारा, साँसों का मेरी रुक-रुक जाना। दिवास्वप्नों ... Read more

करना होगा विश्वास

कई अजूबे इस दुनिया में तुम मानो या न मानो हर शह परखी नहीं है जाती इशारों में ही पहचानो। घड़ी की सुई है समय को चलाती कभी समय को न... Read more

सच्चा सपूत

तैयारियाँ जोर शोर से चल रही थीं। हों भी क्यूँ न। 15 दिनों बाद रमन का विवाह जो था। मिसेज़ माया चौधरी अपने स्व.पति लेफ्टिनेंट राम ... Read more

क्या परिभाषा प्रेम की

प्रेम! पर टिकी है सृष्टि तनिक इस जग पर डालो तो दृष्टि। उर्वी! ने निज उर पर धारे सरित सुमेर और सिन्धु सारे वसुधा है करती इनसे... Read more

रंग रंगीला फागुन

रंग रंगीला फागुन बहारें ले कर आ गया। संतरगी रंगों की फुहारें ले कर आ गया। न करना बरजोरी सुन ओ सांवरे कन्हैया कहीं मुड़ न जाए प... Read more

दुविधा

बता गये हैं संत महात्मा असमंजस का क्या अंजाम। दुविधा में दोनों ही जाते माया मिलती और न राम।। यदि चाहते हैं हम कि सदा पक्ष... Read more

क्या लिखूँ

उखड़ा है मन लेखनी का मन में उठ रहा है बवाल आखिर लिखूँ तो क्या लिखूँ दिल में आते हैं कई खयाल क्या लिखूँ? प्रताड़ित होती नारी प... Read more

गुनगुनाना छोड़ दें

ये घटाएँ अब्र से बूँदें गिराना छोड़ दें आंसुओं से भी कहो आँखों में आना छोड़ दें। ख़ाक में मिलकर हो हासिल गर मुहब्बत आपकी बारहा... Read more

खिलता हुआ इक गुलाब

तू फ़लक का शबाब लगता है। तेरा चेहरा इक किताब लगता है। तिश्नगी है तुझी को पाने की इफ़्फ़त ए आफ़ताब लगता है। चाहता हूँ करूं प... Read more

मैं नदिया

हूँ मैं हिम शिखर की तनया अब्धि की हूँ मैं प्रियतमा । डगर डगर है नीर प्रवाहित कहीं न ठहरा और न थमा । मैं तरंगिणी उज्जवल निर्मल... Read more

विद्या

जीवन का हर क्षण देता है हमें सदा शिक्षा और ज्ञान। विद्या धन वृद्धि ही पाता यदि करते हम इसका दान।। बालक की शिक्षा व पढ़ाई... Read more

नारी

हृदय ममता से आप्लावित स्नेह में सृष्टि मुझसे हारी। नेह लुटाती प्यार बहाती जीव पर मेरी दया बलिहारी। सृष्टि टिकी है जिसके बल पर ... Read more

गंगा पर हाइकु

मोक्षदायिनी सतत प्रवाहिणी तू मंदाकिनी ओ त्रिपथगा कल कल निनाद शुचि अंबुद हे देवनदी प्रतीक आस्था की देती संत्राण ... Read more

ग़ज़ल

ग़ज़ल जहां से बदी को हटाना पड़ेगा। कि घर नेकियों का बसाना पड़ेगा। कभी तो मुकद्दर को रोशन करेगा कि सूरज इधर भी बुलाना प... Read more

मन लुभाता हूँ

महीना आ गया सावन का मैं खुशियाँ मनाता हूँ। कि त्योहारों के मौसम में मगन मन गुनगुनाता हूँ। पड़े हैं बाग में झूले बरसती झूम कर बर... Read more

तेरे बिन

रूह भी चाहती न दूरी है आपके बिन ये जां अधूरी है इब्तिदा दिन की होती तुझसे ही सांस भी तेरे बिन न पूरी है तिश्नगी इश्क की न म... Read more

इस गुमां से दिल महकता है

मेरी नई ग़ज़ल कमल का फूल तो हरदम ही कीचड़ में निखरता है। खरा सोना वही जो आग में तप कर निकलता है। कि दुनिया-ए-आब-ओ-गिल ये ख... Read more

आख़िर किसलिए

मेरी एक नई ग़ज़ल - ख़ुशनुमा सी शाम आख़िर किसलिए। प्यार का पैग़ाम आख़िर किसलिए। क्यूँ मुखौटे डालते मासूम बन छुप रहे अस्क़ाम ... Read more

आपकी नज़रे इनायत

आपकी नज़रे इनायत हो तो फिर क्या चाहिए, प्यार में थोड़ी शरारत हो तो फिर क्या चाहिए। धूप भी छाया है जब हो साथ दामन आपका, साथ मे... Read more

मौत को ज़िन्दगानी लिखेंगे

अजब प्यार की हम कहानी लिखेंगे कि हम मौत को ज़िन्दगानी लिखेंगे। कि बहने लगीं आँख गर तेरे ग़म में तो दरिया की उसको रवानी लिखेंग... Read more

ग़ज़ल

****** हम किस तरह चलते रहे, कदमों को भी है खबर नहीं। किसके लिए है तड़प मेरी, मुझे कोई आता नज़र नहीं। गुमनामियों में गुज़र ... Read more

ग़ज़ल

ग़ज़ल सुनहरा सवेरा बुलाता हमें है। कि उजली किरण से मिलाता हमें है। सुनाकर हमें धुन सदा प्यार की ही वो जीने का लहज़ा सिखाता ... Read more

ग़ज़ल

मुझे ऐसा गुमां क्यों हो रहा है कहीं ईमान दिल का खो रहा है। चलो सहरा को हम कर दें खियाबां कि सूखा बाग भी अब रो रहा है। किया ... Read more

ग़ज़ल

ग़ज़ल *** क़फ़स में बंद पंछी को उड़ाना भी ज़रूरी है। कि घुटती ज़िन्दगी में सांस आना भी ज़रूरी है। करो तुम बागबां बनकर के रख... Read more

ग़ज़ल

ग़ज़ल लुटा दी लाख अत्फ़ें रब ने दुनिया को सजाने में बड़ी ही नेमतें बिखरी हैं कुदरत के खज़ाने में। नहीं आसां यहाँ हर शख्स क... Read more

आखिर किसलिए

ख़ुशनुमा सी शाम आख़िर किसलिए प्यार का पैग़ाम आख़िर किसलिए। क्यूँ मुखौटे डालते मासूम बन छुप रहे अस्क़ाम आख़िर किसलिए। उंगली ... Read more

ग़ज़ल

रूह भी चाहती न दूरी है आपके बिन ये जां अधूरी है इब्तिदा दिन की होती तुझसे ही सांस भी तेरे बिन न पूरी है तिश्नगी इश्क की न म... Read more

ग़ज़ल - बदगुमानी बदल दे

न किस्मत लिखे मुंह जबानी बदल दे कभी तो ख़ुदा ज़िन्दगानी बदल दे। लो आए खुशी के ये दिन और रातें जो रातें थीं काली आसमानी बदल दे।... Read more

ग़ज़ल - सलीका ज़िन्दगी का

मुहब्बत में मज़ा तो दिल की क़ुर्बानी से आया है कि मिटने की कसम है दिल तो मनमानी से आया है। पियो तुम जाम आँखों से कि मयखाने में... Read more

ग़ज़ल- "रिझाती है मुझे"

ज़िन्दगी तू क्यों सताती है मुझे। गीत यादों के सुनाती है मुझे। आसमां में संग तारों के कभी चांद बन कर तू रिझाती है मुझे। व... Read more

ग़ज़ल

आसमां उस रात कुछ ज़्यादा हसीं हो जाएगा। चाँद भी करके शरारत शबनमी हो जाएगा। छा उठेगीं ख़ुशबुएं जब रात रानी की वहां नूर तेरे रू... Read more

हुई जीत विश्वास की

भारत पुत्र हुआ है विजयी सारे शत्रु हुए हैं आहत। जीत सदा सत्य की होती आज हुआ यह सच साबित। सद्सेवा में मग्न सत्पुरुष बना शत्... Read more

दो मुक्तक

मुक्तक (1) हुई सत्य की जीत है चहुंओर है हर्ष। होगा पुनः प्रारंभ अब भारत का उत्कर्ष। दुर्भावनाओं के व्यंग्यवाण बहुत झेले, क... Read more

ज़िन्दगी ग़ज़ल लगने लगी है

बन मुहब्बत का वो साज बजने लगी प्यार की धुन से आवाज़ सजने लगी। ज़िन्दगी के खियाबां में गुल प्यार के क्या खिले सारी दुनिया महकन... Read more

नज़ारा बाद का.....

सभी वादे निभाने जा रहे हैं कि वो मूरख बनाने जा रहे हैं। नया क्या देखने को अब मिलेगा उसी हरकत को तो दुहरा रहे हैं। वही हल्ला... Read more

मुक्तक

(1) मात्राभार - 24 मत देने का आपका, बहुत बड़ा अधिकार। बुद्धि और विवेक संग, चुनें योग्य सरकार। यदि चयन में आपने, कर दी लापरवाह... Read more