mehroz anwari

Joined January 2017

नमस्कार, मेरा नाम मैहरोज़ अनवरी है। साहित्य पिडिया से जुङकर खुशी हुई बङे बङे साहित्य कारों की रचनाएँ प्रेरणादायक है। बेटी विषय पे कुछ लिखने को मिला साहित्य पिडिया को बहुत धन्यवाद करती हूँ।

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लहराये तिरगां होके मस्त

तिरगां लिये हर एक देशभक्त कयोकि आया प्यारा पन्द्रह अगस्त माँ करती है दुआ हर वक्त कर देते दुश्मन को पस्त। मेरे देश के वीर जवान स... Read more

याद है मुझे उसका गुनगुनाना( मातृ दिवस पे विशेष)

याद है मुझे उसका गुनगुनाना लोरी का आलाप मुझे झुनझुना हिलाकर बहलाना चूङियो की खनक और हाथों की थाप। जो मुझे गहरी नींद सुला देती ... Read more

मेरे आँसुओ की नीवँ पे तुम अपना आशियाँ न बना पाओगे

मेरे आँसुओ के नीवँ पे तुम अपना आशियाँ न बना पाओगे । ये वह सैलाब बन जायेगे तुम्हें दूर बहा ले जाये गे जहाँ तुम्हें सिफ॔ मेरी ... Read more

खुशनसीब हूँ तिरंगा पहना है कफन

ऐ कलम तू सुन लेना उङते पत्ते पर तू लिख देना गर शहीद हो जाऊँ ऐ वतन दफन कर देना मातृ भूमि मे मेरा तन। ये पैगाम मेरी बिटियाँ को कहन... Read more

माँ से बाल सवाँ रे नही जाते

माँ से बाल अब सँवारे नही जाते कोई तो समझाये इसे जाने वाले कभी वापस नही आते मन मे यही आस लिये है कहती आकर कयो नही मुझे पुकारते। ... Read more

हम है खुदा की नेमत बेटियाॅ

हम है खुदा की नेमत हमें कूङे कचरे मे फेको मत हमारे जन्म से आती रहमत वह इनसान बन जाता खुशकसमत उसके लिये खुले दरवाजे जननत हमसे ब... Read more