अभी खुद को समझने की कोशिश में हूँ। इसी प्रयास में जब भावनाये हद से बेहद हो जाती है तो कविता ग़ज़ल या लघुकथा बन जाती है।

Copy link to share

तोटक छंद

तोटक छंद तज के जग के हर बंधन को अब बैठ गई मन मंथन को मनुहार करूँ भगवान यही नित दे मुझको अभिज्ञान सही अभिमान रहे न रहे कटुत... Read more

मुक्तक

इरादा खुदकुशी का था, इसी से प्यार कर बैठे इरादा कत्ल का भी था, कि हम इकरार कर बैठे इरादा भी था बादल का, मोहब्बत आज बरसेगी हमारे ... Read more

नाक

नाक " जब तुमसे कह दिया कि नाक छिदवा लो तो समझ में नहीं आता!", प्रकाश ने परिधि से नाराज़ होते हुए कहा। " मगर मुझे अपने चेहरे पर नह... Read more