Meera Parihar

Joined November 2018

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प्रार्थना

तेरे दर पे आ गयी हूँ ,मुझे रास्ता दिखाओ। मेरी जिन्दगी के माझी पतवार तुम चलाओ।। तेरी कृपा का आदित्य प्राची से जब उगा है। गयी रात... Read more

गीत

गीत धुंध हटी अम्बर से रश्मि चौखट लांघ चली। दर,मुंडेर, छत तानी चूनरी शुभ्र धवल मलमली। है ये कैसी घाम सताती नहीं ह्रदय न... Read more

वन्दना

माँ शारदे करती नमन, अर्पित तुम्हें श्रद्धा सुमन लीजिए मम हाथ निजकर हो सार्थक मम आव्हान।। आपके आलोक में जग जागता करता सृज... Read more

चाँद

शरद पूर्णिमा के अवसर पर लिखी रचना कौन आया है अँधेरे ज्योत्सना ले साथ में ताकती बन जोगनी द्वार पकड़े हाथ मैं साथ चलते ,जब मैं च... Read more

भोर

अद्भुत है यह बेला सच अद्भुत है बेला अवनि अम्बर का संगम तट विस्तृत अथाह जलधि घट उतरी ऊषा धारे काली कमली पट सिहरत चलत झट पट झट ... Read more

नाम में कया रक्खा है?

#**नाम में क्या रखा है? **# जब कुछ नहीं कर सकते तो नाम ही बदल देते हैं और साल छः महीने उसी के सम्मोहन और विश्लेषण में कब व्यतीत हो... Read more

लाली के खिलोने

# * लाली के खिलौने *# लाली सबकी प्यारी गुड़िया, नादान, भोली, शरारती सबकी लाड़ली।बाजार की हर वह चीज जो लाली के लायक होती सब खरीदी... Read more

कविता

निशान निशाने पर आ जाती हूँ मैं अपने छोड़े निशान से,कैसे? दाग लगा टी शर्ट में अब भी धुली हुई ,पर निशान तब भी कप ये धुला नहीं... Read more

ग़ज़ल

ग़ज़ल महराबदार जालियाँ आले कहाँ गये । दर औ दीवार घर घरवाले कहाँ गये।। हमने यहीं पर की थी अठखेलियां कभी। गुमसुम उदास डाल कर ता... Read more

माँ

माँ माँ बनाकर खुदा ने कहा देर तक। दर्द माँ ने बहुत ही सहा देर तक।। इक कली गुल बनी फिर बना ये चमन। बागवां जिसका माँ-सा, खिला ... Read more