मेरा नाम मीनाक्षी भसीन है और मैं पेशे से एक अनुवादक हूं। दिल्ली के एक सरकारी कार्यालय में काम करते हुए मुझे करीब सात वर्ष हो चुके हैं। मुझे लिखने का बहुत शौंक है और शायद इसलिए मैं अपना काम बहुत आनंद से करती हूं। मुझे अपना कार्य कोई बोझ नहीं बल्कि अपनी दिनचर्या का एक अहम हिस्सा लगता है। मेरा मानना है कि लेखनी की ताकत बोलने से कहीं अधिक होती है।

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हवाओं की उर्म नहीं होती

हवाओं की उर्म नहीं होती हवाओं की उर्म नहीं होती इनका तो बस एहसास होता है, जब उड़ते बहते हुए यह चुभती हुई दोपहरी में पसीने से त... Read more

उफ! यह प्रदूषण

गौर से देखिए बाहर घना काला बादल सा छाया चहुं ओर सांस लेने में हो गई दिक्क्त आंखों में जलन, सीने में जमघट पर इसको आज की चर्चा का ... Read more

सच है सुविधा का सुख से कोई संबंध नहीं, मन हो बैचेन तो, कंफर्ट में भी कोई दम नहीं

सच है सुविधा का सुख से कोई संबंध नहीं, मन हो बैचेन तो, कंफर्ट में भी कोई दम नहीं आलीशान सा दिख रहा था होटल सा खिल रहा था, एसी ... Read more

हिंदी दिवस पे हिंदी घुट-घुट के रो रही है

हिंदी दिवस पे आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं पर मुझे तो ऐसा लगता है कि हिंदी हमसे कुछ कह रही है----- हिंदी दिवस पे हिंदी घुट-घुट क... Read more

हमारी रुहें कुपोषण का शिकार क्यों हैं?

हमारी रुहें कुपोषण का शिकार क्यों हैं? सजी धजी रंग बिंरगी डिजाइनर दीवारों से घिरी हुई, बड़े-बड़े अदभुत से, शानो-शौकत का दम भरत... Read more

नेता जी को आम जन की गुहार

भई हर साल चुनाव में मैं मतदान तो कर आती हूं क्योंकि यह मेरा कर्तव्य है किंतु हर बार नई उम्मीदें तो होती हैं पर बहुत निराशा होती है--... Read more

हे पौरुषत्व --अपील है तुमसे हमारी

Displacement of anger मैने सुना था और Displacement of energy मैने खोजा है। हर रोज हम हमारे नवयुवकों, गली में पाए जाने वाले छिछोरे लड... Read more

हिंदी हैं हम वतन हैं हिंदुस्तान हमारा

15 अगस्त आने को है। आज़ादी मिल चुकी है। मिली क्यों कि तब हमारे सामने एक लक्ष्य था- अंग्रेजों से छुटकारा। हमने बहुत प्रगति कर ली है।... Read more

तुम बड़ा काम करती हो

तुम बड़ा काम करती हो तब सिर्फ पढ़ने का ही काम था वैसे सारा दिन आराम था, स्कूल से घर, घर से स्कूल शाम को खेलना, रविवार को जाना ... Read more

सुन ले मां- बेटी की पुकार

लोगों की मानसिकता जो वहशियाना और राक्षसी रुप लेती जा रही है, तो गर्भ के अंदर बैठी हुई कन्याओं की रुह बाहरी माहौल को देखते हुए अपनी म... Read more