कभी फुरसत मिले तो पढ़ लेना मुझे,

भारी अन्तर्विरोधों के साथ दृढ़ मानसिकता की पहचान हूँ मैं..॥

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किनारा हो जाऊँगी..

बाहर का तम दिल के जितना घना नहीं, डूबी इसमें तो पार हो ही जाऊँगी । तुम नहीं जानते मेरी तड़प किसलिए हैं, जिंदा हूँ मगर ज़िन्दगी के लिए... Read more

बेटी हूँ मैं...

लाख जंजीरें हो बंधी हुई कितनी ही बेड़ियों में जकड़ी हुई ख़ुशी से सब सहती हूँ मैं किसी से कुछ न कहती हूँ मैं सदा ख़्याल है मुझे आख़िर... Read more

रोग

तेरा ख़्याल ही मेरा रोग था,, तुझे छोड़ने के बाद,बहुत अच्छी हूँ ...॥ Read more

अब चलूंगी मैं..

तुम मिलों न मिलों अब चलूंगी मैं... तुम हो न हो अब जियुंगी मैं तुम मेरे रहो न रहो अब न रुकूँगी मैं...| अब मुझे चलना ही होगा अब मुझे ब... Read more

राहें

राहें साथ चले सदा, राहगीर की तरह,,, हमसफ़र की ख्वाहिस किसको है..॥ Read more