शिक्षक , कवि , लेखक …
प्रिय शगल – मन के विचारों को शब्दों का जामा पहनाना

पुस्तकें पढ़ना …

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अभागन

अभागन अरी ...ओ कलमुँही ...फूटे मेरे करम ...क्या कर रही है ‘फरस' का सिमेंट उखाड़कर ही दम लेगी क्या ? जा तैयार हो जा । उसकी तंद्रा... Read more

फरियाद फकीर की ....

उम्र यूँ रेत सी फिसलती रही लाख बंदिशों के बावजूद बिखरती रही। ना मुकाम पाया ,ना मुकाम का कोई निशां जिन्दगी तो मेरी राह में निक... Read more

माँ की जिन्दगी

माँ की जिन्दगी .....मनु की कलम से माँ की जिन्दगी तो यूँ ही तमाम हो गई । सहन में दौड़ते -२ जिन्दगी की शाम हो गई । चाकी पीसते , ... Read more