पढ़ना मेरा शौक है……लिखना सीखना चाहता हूं …..मुकाम सोचा नहीं……

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अब न कोई गांधी न टैगोर है

कैसा ये रिवाज है कैसा ये समाज है। फिजाओं में जहर है, कैसा मेरा शहर है।।। बढ़ाई जा रही है जातिवाद की खाई। क्यों मानवता पे आज बन आई... Read more

ए वक्त तूं...!

ए वक्त तूं बहुत पाबंद है... तेरे साथ हर कोई रज़ामंद है... तूं चलता रहता है, बिना थकान, बिना अरमान किसी को कुछ बताता नहीं, चाह कर ... Read more

कैसी ये शाम है...?

कैसी ये शाम है, क्या इसका नाम है...? कल तक तो था कश्मीर का दर्द, आज तुर्की दिखता शमशान है...! फ्रांस का जख्म अभी सूखा भी नहीं थ... Read more

तेरा इंतजार

हे आत्मा मेरी, तुम हो मेरे साथ पर फिर भी है मुझे क्यों तेरा इंतज़ार.... तुम उम्मीद हो मेरी, आरजू मेरी शरीर की सांस मेरी, तुम हो... Read more