Anita Mehta

Joined June 2016

dil ke armaan

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हिदायत

बहारें जब चली जायें ,निगाहें नम नहीं करना गुलों की चाह में खोकर , मुहब्बत कम नहीं करना . तड़प के टूटते दिल को , बहारों ने किया ... Read more

"तुम्ही तुम"

जला के राख करती है , तपिश तेरी निगाहों की , पिघलती अब शमा रहती , तुम्हारी शोख़ चाहों की . बिना तेरे भला कैसे ,मुकम्मल ख्व़ाब सब ह... Read more

मुहब्बत इक सज़ा

दिलों का ये मिलन झूठा बहाना है , उसे तो खाक़ में मुझको मिलाना है . कटे पर के परिन्दे को कहे , उड़ जा , उसे दो जुगनुओं में अश्क ल... Read more