मनोज कुमार "मंजू"

मैनपुरी, उत्तर प्रदेश

Joined September 2018

संक्षिप्त परिचय
पूर्ण नाम : मनोज कुमार
साहित्यिक नाम : मनोज कुमार “मंजू”
जन्मतिथि : 14/12/1996
जन्म स्थान : मैनपुरी
पिता का नाम : श्री छेदालाल “शिक्षक”
माता का नाम : श्रीमती रामा देवी
शिक्षा : बी.ए.
वर्तमान पता : “अयोध्या – सदन”, इकहरा, बरनाहल, मैनपुरी (उत्तर प्रदेश)
स्थाई पता : “अयोध्या – सदन”, इकहरा, बरनाहल, मैनपुरी (उत्तर प्रदेश)
भाषा ज्ञान : हिन्दी, अंग्रेजी
कार्यक्षेत्र : शिक्षक
संपादक : वर्जिन साहित्यपीठ दिल्ली
सामाजिक गतिविधि : सक्रिय सदस्य एवं कोषाध्यक्ष – युवा जागृति मंच मैनपुरी, उत्तर प्रदेश
लेखन विधा : मुक्तक, दोहे, घनाक्षरी, कुण्डलिया, कविता, गीत, कहानी, उपन्यास आदि|
मोबाईल/व्हाट्स ऐप : 9719469899
प्रकाशित पुस्तकें : छेड़ दो तार (काव्य संग्रह), प्यार के फूल (कहानी संग्रह), बदल दो माहौल (मोटीवेशनल बुक)
प्राप्त सम्मान : हिन्दवीर सम्मान – साहित्य संगम संस्थान दिल्ली, सूर्यम साहित्य रत्न – सूर्यम साहित्य सागर मैनपुरी, साहित्य सारथी सम्मान – 2018, कवि चौपाल मनीषी सम्मान – 2018, सूर्यकांत त्रिपाठी निराला साहित्य सम्मान – 2018
लेखनी का उद्देश्य : सामाजिक जागरुकता एवं मातृभाषा हिन्दी को प्रसारित करना|
संपर्क सूत्र : 9719469899, 7055487560
ईमेल : manojkumarmanju2016@gmail.com

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तुम होतीं तो

शीर्षक: तुम होतीं तो तुम होतीं तो राहें आसान होतीं तुम होतीं तो मंजिलें और आसान होतीं दुःख में होतीं न होतीं कोई बात न थी काश ... Read more

माँ तो माँ है

माँ तो माँ है माँ सा कौन हर दुख सहती रहकर मौन जिसकी आशाओं का दीपक मुझमें ही अब जलता है जिसकी आंखों का हर सपना मेरी आंख में पलता ह... Read more

इंसानियत

किस कदर इंसानियत बहसी दरिंदा बन गई। आदमी की आज देखो आदमी से ठन गई।। मौत का ये खेल अब तो एक तमाशा हो गया। आज रिश्तों की ये चादर फि... Read more

आ भी जाओ तुम

सफ़र तन्हा नहीं कटता कहां हो आ भी जाओ तुम। पकड़ लो हाथ ये मेरा न इतना अब लजाओ तुम।। चलेंगे हम नई राहों पे मंजिल भी नई होगी। सफ़र ... Read more

शहीदों को नमन

यौवन के सुख छोड़ तिरंगे में जो लिपटे आते हैं। ऐसे वीर जवानों को हम नित-नित शीश झुकाते हैं।। लेकिन सीमा पर कब तक ये क्रम दोहराया जा... Read more

उलझन

कैसी उलझन में फंसी है ज़िन्दगी कैसे कहूं। वक्त के ताने अरे देखो भला कब तक सहूं।। कब तलक देखूं बता खामोश तेरा रास्ता। उम्र ढलती जा... Read more

रास्ते में जो मिला

जिसको भी हम इस जहां में एक ख़ुदा समझा किए। उसने ही हमको हजारों जख्म कैसे हैं दिए।। हमने लुटकर भी किसी के घर सजाये हैं सदा। और जमा... Read more

बस एक मौका

आपसी सद्भाव की हर बात गुजरी हो गई। बैर इतना बढ़ गया कि आत्मा भी रो गई।। फासले ऐसे बढ़े बढ़ने लगी हैं दूरियां। खून के रिश्तों में ... Read more

मेरे मुक्तक, अटल के नाम

आज तुम सा नहीं इस धरा पर अटल बन गये तुम दिलों में समाकर अटल रो पड़ा आज संसार में हर कोई जब जुदा हो चला आज हमसे अटल देकर दुनिया... Read more

मिलन के गीत

मैं मिलन के गीत लिखना चाहता हूं दिल मैं मूरत एक रखना चाहता हूं मुझको भा जाए कोई बस एक सीरत बस यही आशा जगाना चाहता हूं जोड़िय... Read more

चीर के बनाए राह

चीर के बनाये राह, पत्थरों के सीने पे जो। दिल में सदा उनकी, याद पलती रहे।। एक साथ चल पड़े, कारवां के कारवां तो। कितनी भी मुश्किलें... Read more

भूल ये तुम्हारी

कुण्ठा में गुजार दिया, तुमने सफ़र कहीं। भूल ये तुम्हारी कहीं, तुम्हें सालती रहे।। मन की निराशा तेरे, मन में रहे जो कहीं। रासते मे... Read more

खोटा सिक्का

खोटा सिक्का सम नहीं, होता सबका भाल। कैसे जाने आदमी, कैसी गृह की चाल।। कैसी गृह की चाल, आदमी बेबश होता। समझ न पाए हाल, रात दिन केव... Read more

खोना साहस तुम नहीं

खोना साहस तुम नहीं, कैसी भी हो राह। पाना ही है मंजिलें, ऐसी हो मन चाह।। ऐसी हो मन चाह, बीज हिम्मत के बोना। बीतेगी जब रात, सबेरा ह... Read more

रोना जो रोते रहे

रोना जो रोते रहे, बाधाओं को देख। कुछ भी बदलेगा नहीं, रेखाओं को देख।। रेखाओं को देख, हौसले को मत खोना। कर्म रहे बस नेक, ध्यान बस इ... Read more

जैसी करनी जो करे

जैसी करनी जो करे, फल वैसो ही पाय। पाथर मारे वृक्ष जो, सो मीठे फल खाय।। सो फल मीठे खाय, कर्म की गति है ऐसी। पल पल बीता जाय, किन्तु... Read more

राही तुम रुकना नहीं

राही तुम रुकना नहीं, कैसी भी हो राह। बिना परिश्रम के न हो, फल पाने की चाह।। फल पाने की चाह, न हो तेरे मन माही। जग में हो बस वाह, ... Read more

सरस्वती वंदना

वीणा वादिनी ओ माता, हंस वाहिनी ओ माता। चार वेद धारिणी मां, ज्ञान का प्रकाश दे।। है घना अंधेरा घेरे, दूर हो गये सबेरे। मुझको उजालो... Read more

सरस्वती वंदना

मात शारदे सुनो जी, दृग खोल देख लो जी। द्वार पे खड़ा हूं मात, तनिक तो ध्यान दे।। ज्ञान चक्षु खोल माता, तम सारे हर माता। मेरी मुश्क... Read more