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writng story -gazals-haiku in gujarati and hindi

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अपने या पराये

कहानी अपने पराये सुजीता दोपहर की चाय बना रही थी, की डोरबेल बजी।सोफे पर बेठी उसकी सासने उसके हस्बैंड का लेबोरेटरी से आया... Read more

होली

सात रंगों से भरी राते चले, दिल को बहला रही बाते चले। झूमती बेले अदा से बाग मे, गीत प्यारे साथ में गाते चले। ज़िन्दगी फूलो भरी... Read more

इंतज़ार भी रो पड़ा,

याद करते अभी तो कहाँं खास है, हम तो इस जगा कितने उदास है। बात जो निकली इंतज़ार भी रो पड़ा, ये कहाँ आ गये मिलने की न आस है। रात... Read more

मनमुटाव

'ऐसी बातो से नाराज़ नहीं होते बेटा' कहते हुए रेणुकाजी ने ससुराल से वापस आयी बेटी को समझाया. प्रेमविवाह करके एक साल पहले विशाला दूसरे... Read more

सिर्फ हादसा?

हँसती खेलती एक ज़िन्दगी, शाम ढलते ऑफिस से निकलकर, है दिल्ली की सड़क पर ..., ओवरटाइम से... सुनहरे सपने को जोड़ती, घरपर मोबाइल से कह... Read more

ये कैसी बारिश?

लघुकथा ये कैसी बारिश? खिडकी के पास खड़ी होकर मन्वीता रीमझीम गीरती बारिश देख रही थी।पेड़ की लहेराती शाखो पर रंगीन फूल नृत्य... Read more

कटते वन ....उजड़ते जंगल

कटते वन ....उजड़ते जंगल हो रहा, कुदरत संग खिलवाड़ ! माँ धरती की छाती पर होते वार !..... देते छाया और श्र्वास सभी को ये... Read more

काफी नहीं ?

बैठे रहते है जब हम खोये हुए सपनो की खोज मैं, आसमान से टपकते पानी से संवेदना हथेली पर शायद फिर से संजोले पर .... Read more

कुछ फैसले दिल के

"इतना सुहाना मौसम और ये पहाड़ के बीच घिरा हुआ काटेज काश,तुम मेरे साथ होते तो बात ही कुछ और थी ..." सोचते हुए आसका ने बेंच पर से अपना... Read more

अब क्या कहें?

"जितवन .....क्या कर रहे हो बाहर ? देखो ये कोन आया है ?" माँ की आवाज़ सुनकर अपने स्कूटर की लाइट ठीक कर रहा जित जल्दी से घर के अंदर आया... Read more

लकी

लकी, सुबह के नौ बज़े सृजन चायका कप लिये टीवी देख रहा था की मोबाईल की रिंग.... "सो रहे थे क्या ?" आवाज़ सुनकर सृजन की आवाज़ में ख़ुशी... Read more

ज़िंदगी तो है...

ज़िंदगी तो है पर यहाँ साथ में ही ये गम क्यो है , हरपल यहाँ खुश,तो आँख उसकी नम क्यों है। हार जाता है अक्सर यहाँ सच रहेता तन्ह... Read more

मुहिम

मुहिम कैसे हो पारसजी ?कहते हूँए विमलजी बंगलो की सोसायटी में बने गार्डन की बेंच पर बैठकर बातें करने लगे। "आज जल्दी ऑफिस से ... ?" ... Read more

खुशबु रिश्तो की -लघुकथा

खुशबु रिश्तो की बाबूजी एकदम गुस्सा होकर चिल्ला रहे थे ,"कभी ऐसा हुूँआ ही नहीं की में भूल गया हूँ।" और सर्वेंट वगैरह कांपने लगे। ८०... Read more

क्यों ऐसा?

क्यों ऐसा ? विश्वा जल्दी से अपनी कंपनी की बस से उतरती हुई घर के कम्पाउंड में दाखिल हुई ।बाहर ही उसकी सर्वेंट मिली , "भाभीजी ,आपके... Read more

प्यारी सी बेटियाँ

जीतने प्यार सब का जग उतर आती है यहाँ, काम जुदा कोइ ऐसा बेटियाँ भरती है यहाँ। मात पिता से कभी दुःख नहीं गाया है कभी, दिलपर सह ... Read more

प्यारी सी बेटियाँ

इस दुनियामें ऐसा कोई काम नहीं है जो बेटियों ने करके नां दिखाया है , छोटी सी वो गुड़िया बनकर रहती हे ... Read more

ये मेरा दोष है?

ये मेरा दोष है? अपने वार्डरोब से जल्दी से साड़ी निकालकर पहन ली और पर्स के साथ हॉस्पीटल चेकअप की फ़ाइल लिए हुए सुविधा ने रूम लोक किय... Read more

है सभी तो सफर में...

है सभी तो सफर में इस जिंदगी में जो यहाँ, फिरते है अक्सर उदास ज़िंदगी मे जो यहाँ। पलभर भी कभी ये लम्हें पाते खुशी के कहाँ? खुदको... Read more

आओ तो सही...

नज़रमें तुम्हें बसा लेंगे यूॅ आओ तो सही, दिल के कमरे में हमें छूपाओ तो सही। छा रही है चुपकी सी इन हवाओ में कहीं, बात प्यारी सी ... Read more

किनारा चुन लिया...

खिलते हो फूल या कांटे उन को पूछा न ज़रा, एक सुनहरा- सा ख्वाब बुन लिया है ज़रा। शायद कहीं तेज़ हुई दिल की वो धड़कन... Read more

यूॅंही मन के आकाश में.....

यूँही कभी मन के आकाश में उड़ते चले आते हे यादो के पंछी ..... वो छोटी सी आँखे ,जो कभी तितली देख ... Read more

गज़ल

तुम जो मेरे यहाँ ही अगर हो , जिंदगी की रात की तो,सहर हो। यूँ न मंजिलें तन्हा को मिलती प्यार की जो ना राह गुज़र हो। अे... Read more

गज़ल

ऐक शाम हॅसी अजनबी हो गई, सांस मेरी भी अनकही हो गई जो चहेरे थे अभी है कहां, जिन की परछाई प्यारी हो गई। हम जब कभी भ... Read more

गज़ल

आपका वो मिलना तो याद है दिलका वो खिलना तो याद है। जिस तरहा बिछड़े थे मोड़ पर और तुम्हें ही गवाँना याद है। देखते है सब नज़ारे... Read more

गीतीका

दिल में है जो वही बातें कहें। आप ही के साथ यूँ गाते रहें छिड़ गए है सूर प्यारे, मन में दिल से अपने सभी नाते रहें । * ज़िंदगी के... Read more

गज़ल

आज खुदसे प्यार करने दो हमें ओर थोडा ओर कहने दो हमें। जिंदगी के दिन तो बस चार है, दिल में ही यार रहने दो हमें। राह यूँही... Read more

स्त्री-शक्ति

स्त्री शक्ती ... Read more

मेरा आत्मसम्मान

मेरा आत्मसम्मान मेरा आत्मसम्मान रात ऐसे मध्यम सी ढल रही थी । अपनी बाल्कनी से नीचे झाँकते हुअे, रितीमा विहार का इंतजार... Read more

मेरा विश्र्वास

मेरा विश्र्वास यूॅंही माेल में घूमते हुए आठ बज चुके थे। मौनवी ने मोबाइल से नरीत को बताया , "मुझे थोड़ी देर लग ... Read more

शाम का साया

शाम का साया तेज दौड़ती हुई ट्रेन की खिड़की के पास बैठी हुई तक्षवी, उड़ती हुई लटो को संभालती घड़ी में टाइम देख रही थी । बस, अब आ... Read more

समजौता

समझौता अभी तो सुबह के ८- ३० हुए थे ।। जल्दी तैयार होकर नित्या एक्स्ट्रा क्लास के लिए अपनी कार लेकर निकल ही रही थी कि रीमा आंटी और... Read more

कुछ तूटा है दिलमें...

कुछ टूटा है दिल में .... मानसी बहेेती नदी की लहरों को रेलिंग के पास खड़ी हुई एकटक देखे जा रही थी ।बस ,ये ज़िंदगी तो यूँही बहेती ... Read more

स्वरिता

'अरे ,चलो देर हो रही है 'कहते हुँऐ अंगना अपनी छोटी सी बेटी स्वरिता को हाथ खींचकर कार में बिठाने लगी । 'नहीं आना हे मुझे आपके साथ मम... Read more