मिशा

देहरादून

Joined December 2016

बरसात की एक शाम
नाट्य विधा – औरत दास्ताँ दर्द की
नाट्य विधा – जिंदगी कैसी है पहेली
अनेक पत्र पत्रिका में कहानियां , लेख , और कविताएं

Books:
बरसात की एक शाम , औरत दास्ताँ दर्द की , जिंदगी कैसी है पहेली , साँझा संकलन ,बहुत जल्द

Awards:
बेस्ट स्टोरी अवार्ड 2014 सर्च स्टोरी भोपाल , हिंदी साहित्य सेवी

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रस्मे मुहब्बत

★★★★ग़ज़ल★★★★ आसान नहीं हैं रस्में मुहब्बत की निभाना... दूर तक जाना फिर लौट कर आ जाना.... कुछ कसमों और वादों की एक दुनिय... Read more

इबादत

मुहब्बत की दुहाई का अर्थ क्या है रिश्तों में आई दरारों को सरेआम करने का नायाब तरीका ...... नही मुहब्बत तो वो एहसास है जिसे ह... Read more

प्रियतम

सोचू आज एक खत प्रियतम मै तुम्हारे नाम लिखूँ खत में दिल कि सब बाते लिखूँ संग बीते एक एक पल लिखूँ सपनो कि उड़ानो के परवाज़ लिखूँ अपन... Read more

दहलीज़

अहसासों की दहलीज से निकल कर शब्द जब यूँ बिखरते हैं ......... एक अफसाना मुहब्बत का लिख जाते हैं क्यों तोड़ते हो गुरुर मेरा की तु... Read more

दरख़्त

गज़ल 【दिल से ")】 ख़्वाब कुछ यूं बसते हैं न पूरे होते हैं कभी न ज़हन से ही निकलते हैं ख्वाब लाज़मी सा क्यो... Read more

संवेदना

नित्य संवेदनाओ से घिरी अस्तित्व विहीन अपरिपूर्ण परिलक्षित सी #मैं ........ ■आह प्यार के सारगर्भित रहस्य को छुपा निश्चेतन , ... Read more

गौरेया

चूं चूं करती जब चिड़िया रानी सुबह सुबह बुलाती है ... उसकी यह मनमोहक अदा मेटे मन को लुभाती है ... फुदक फुदक मेरे चारो और अप... Read more

तेरी याद?

बहुत #प्यार # करते # हैं #तुम # से # सनम # दिल के खाली कोने में हम शमां जलाए बैठे हैं # तेरी यादों की एक एक लड़ को खुबाबों म... Read more

दर्द

मायूसी को छोड़ मुस्कराना सीख लिया हमने भी अपने दर्द को छुपाना सीख लिया दर्द दिल से उठ कर आँखों में नज़र आता था आंसू बन कर वो सारे... Read more

आह

खुबाब पल भर का दिखा कर इन्तजार सदियों का दे गई आँखे खाई थी कसमे साथ निभाने की बेवफाई कर गई सारी बातें ...... न दिल की दहलीज... Read more

बेटियां ( क्यों ओ बाबुल )

बेटियां ( क्यों ओ बाबुल ) क्या खता है ओ बाबुल मेरी जो मुझे कोख में ही मार देते हो क्या मैं तेरा अंश नहीं ? या मुझे यूँही दु... Read more

‘’ दुर तक कोई अवाज नहीं ‘’

कोई नही ‘’ उसके जाने के बाद जीने का सबब पा ना सके,जो मुसकराते थे हमबात बात पर उस हंसी को दुबारा अपने घर बुला ना सके , लोगो न... Read more

तारीफ़

तारीफ़ एक "शब्द " पर उसमें सिमटा एक रूपसी का श्रृंगार , माँ का ममतामयी रूप , एक मासूम से बच्चे की मासूमियत भरी अदाओं का वर्णन और भी ... Read more

जिंदगी........

जिंदगी। हर बार पिघलते देखा तुम को जिसने जैसे चाहा बनाया तुमको हर साँचे में ढलते देखा मैंने ✍✍✍✍✍✍ क्यो... Read more

खामोशियाँ

ख़ामोशी से पन्नों पर लिख दी जिंदगी .... कुछ आरज़ू लिखी कुछ ज़ुस्तज़ू लिखी ... या यूँ कहिए जो बीत गई वो पूरी एक सदी लिखी .... ... Read more

यादें

मनु स्मृतियों सी जब हो जाती हैं "यादें" रंग ए"पलाश " उसमें बहुत गहरा होता है नूर बिखरता है "ज़हनियत " में कतरा-कतरा उ... Read more

शाख़

हक़ हवा को जब तेज़ बहने के हासिल हो जाते हैं ..........!! यादों की तरहा सूखे पत्ते भी एक हवा से झड़ जाते हैं ....!! ले ले... Read more

जज़्बात

दरमियाँ तेरे मेरे , कुछ जज़्बात मासूम से ख्यालात , सर्दियों की बारिश की रिमझिम सी बूंदों का एहसास कराते हैं ........!! बिन बो... Read more