MANINDER SINGH

LUDHIANA

Joined August 2016

मेरा नाम मनिंदर सिंह है | साहित्य के क्षेत्र में मुझे लोग मनिंदर सिंह “मनी” के नाम से जानते है | मैं पेशे से एक दुकानदार हूँ | कविताएं, ग़ज़लें लिखना और घूमना मुझे बेहद पसंद है | मैं हिंदी और पंजाबी दोनों भाषा में लिखता हूँ | हिंदी में मेरी खुद की काव्य पुस्तक आ चुकी है जिसका नाम सुलग़ते अल्फ़ाज़ है |
इसके अलावा मेरी अलग अलग लेखकों के साथ हिंदी और पंजाबी की मिलकर ९ किताबे बाजार में आ चुकी है | जिनका नाम

१- कारवाँ (पंजाबी साँझा संग्रह)
२-साँझिया सुरा (पंजाबी साँझा संग्रह)
३- काव्य सुनेहा (पंजाबी साँझा संग्रह)
४-प्रत्याशा (हिंदी साँझा संग्रह)
५- नया युग नई सोच (हिंदी साँझा संग्रह)
६- काव्य लकीरा (पंजाबी साँझा संग्रह)
७- गुलिस्तां (हिंदी साँझा संग्रह)
८-महक पंजाब दी (पंजाबी साँझा संग्रह)
९-अल्फ़ाज़-ऐ-अहसास (हिंदी साँझा संग्रह)

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माँ

अपनी गोद में मुझको सुला दे आज माँ, हाथों के झूले में झुला दे आज माँ, क़दमों की आहट मेरे ढूंढे है तुझे, है तू कहाँ कोई सदा दे आज ... Read more

मेरे दिल में शिकायत नहीं है |

ग़ज़ल मेरे दिल में शिकायत नहीं है | तू मेरी अब इबादत नहीं है || खींच खाके बसर क्यों करुँ मैं | दिल में मेरे सियासत नहीं हैं ||... Read more

झाँक देख लो दिल में यारो

झाँक देख लो दिल में यारो, हम कितने है बदल गये,, जग में बनने क्या आये थे, क्या से क्या बन आज गये,, बाट लिया खुद को ही हमने, मह... Read more

तेरी बिटिया

ऐ माँ मैं हूँ तेरी बिटिया, नन्ही, प्यारी सी बिटिया, लगा गले मुझे आज अपने, आँचल में तेरे देखूं सपने,, कभी पराया न मुझे करना, आ... Read more

बरसे बरसे बरखा बरसे

बरसे बरसे बरखा बरसे, पिया मिलन को जिया तरसे, घनघोर बदरिया छायी रे, जले बदन बरखा के जल से, पुरज़ोर बिजुरिया भी है चमके, सावन ... Read more