Manchan Kumari मंचन कुमारी

Darbhanga, Bihar, India.

Joined January 2017

Student समस्तीपुर कालेज , समस्तीपुर ! हिन्दी एवं अंग्रेजी मे लिखना पसंद है, …..कुछ अच्छा लिखना मेरा सपना है ।
( लिखना तो बस आदत ही नही,
कुछ भी लिख दूँ ऐसी चाहत ही नही ,
मन बोले शब्दों को तौलें ,
दिल की बाते भी ये इबादत ही नही । ……….मंचन .)

Copy link to share

बस यूँही ।

कभी कभी ये आंखे खुद चलचित्र देख लेती है, वो दिन थे जब रात मे अक्सर कहानियो से डर कर के सो लेते थे, ये दिन है जहां डर और कहानीकार श... Read more

अंग्रेजो से आजादी ।

अंग्रेजो के अत्याचारो को सहने और अंग्रेजी शासन मे रहना दूभर हो गई थी और हमे आजादी दिलाने वाले सारे भारत माता के सपूतो को आज के दिन ... Read more

(1 मुक्तक) -- हम तो अब कश्मीर हो गए, {और 1 अन्य}-- (2)जीवन

1)हम तो अब कश्मीर हो गए, बड़े ही हम मशहूर हो गए, भारत पाकिस्तान के खींचने में, हम तो थक के चूर हो गए। ??☺☺?? by मंचन 27/04/2017... Read more

कोई विशेष! -----

कोई इतिहास लिखता है, कोई इतिहास पढता है, हर एक इतिहास को लेकिन, कोई जुनूनी ही रचता है । कोई गिर के संभलता है, कोई संभल के... Read more

नवरात्रि के नये संकल्प):::::

सुन्दर मधुमय ये ध्वनि तरंग, धरा पे शरद की ये नई सुगंध। आने वाला फिर जीवन में, हर्षोल्लास से भरी उमंग। (1) मंगलमय होते है दिन-रा... Read more

जिंदगी और मौत । ?

कभी जिंदगी पे मन सोचे, कभी मौत पे मन सोचे। है दिवाने दोनो के हम, कुछ के ज्यादा कुछ के है कम । जिंदगी है कुछ इतनी प्यारी, हो ज... Read more

बेटियाँ ——

है बोझ नहीं ये जान लो तू , दुनिया वाले ये मान लो तू। मिलता है कभी जो उसे मौका, तो लगाती है वो भी चौका छका । तु दो तो मुझे बस एक ... Read more

बेटियाँ ------ ?

है बोझ नहीं ये जान लो तू , दुनिया वाले ये मान लो तू। मिलता है कभी जो उसे मौका, तो लगाती है वो भी चौका छका । तु दो तो मुझे बस एक... Read more

?दायरे ।

? सोचो के दायरे , ये सपनों के दायरे । बोले तो क्या बोले, ये लफ्जों के दायरे।(1) हैं पड़े यहाँ हम तुम, हैं घिरे यहाँ हम तुम, ... Read more