Copy link to share

अधिकारी का अधिकार

नही देखता जो अधिकारी अपने पद की गरिमा को । करता है अपराध रिश्वती खो देता निज महिमा को । पीकर के अपराधी प्याला हो जाता मदहोश । ... Read more

मैंने दो रस पीने वाले को देखा ।

मैं देख रहा दो रस पी को । एक पीकर लेता झपकी को । एक पड़ा पंक गंदी नाली । एक पीकर था पंकज डाली । एक पीकर पाता गाली को । एक पीकर... Read more

इंसान बनों

एहसान करो इंसान बनों । तजकर तुम छुद्र विचारों को । अपनी मानवता की झोली भरले करके उपकारों को । इंसान ईश्वरी विद्या को पात... Read more

मोह एक जाल है ।

सदा बहार को बहारता मनुष्य रोष से । वही चरित्र वान है बचा रहे जो दोष से । यहां न कोई दीन है न दीनता विभावरी । सभी के साथ ईश की क... Read more