manan singh

Joined September 2016

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चोटियों को मापती हैं बेटियाँ अब गगन

2122 2122 212 चोटियों को मापती हैं बेटियाँ अब गगन बन बोलती हैं बेटियाँ।1 हो रहे रोशन अभी घर देख तो रूढ़ियों को तोड़तीं है बेटि... Read more

बेटियाँ

चोटियों को मापती हैं बेटियाँ अब गगन बन बोलती हैं बेटियाँ।1 हो रहे रोशन अभी घर देख तो रूढ़ियों को तोड़तीं है बेटियाँ।2 अब नहीं ... Read more

दिन बदलते......

दिन बदलते देर लगती कब बता? भेड़ बनकर घूमता है भेड़िया।1 लूटकर सब ले गया हर बार ही माँगता है जो बचा फिर से मुआ।2 मुंतजिर हम रह ... Read more

अपरिचित

पल- पल से मैं आज अपरिचित जानी-सी आवाज अपरिचित।1 उड़ता जाता दूर गगन में फिर भी है परवाज अपरिचित।2 मंजिल के कुछ पास पहुँच कर ... Read more

चोर(लघु कथा)

चोर(लघु कथा) ************ गाँव में चोरों का प्रकोप बढ़ रहा था। लोग परेशान थे।आये दिन किसी-न-किसी घर में चोरी हो जा रही थी। ग्राम प... Read more

चलो रोशनी.....

गीतिका/हिंदी गजल#(दीप-पर्व पर) (वाचिक भुजंगप्रयात छंद) *** *********************** चलो रोशनी को जगाने चलें हम अँधेरे यहाँ से हट... Read more

हिंदी गजल/गीतिका

#गीतिका# *** टूटता रहता घरौंदा फिर बनाना चाहिये जोड़कर कड़ियाँ जरा-सा गुनगुनाना चाहिये।1 जिंदगी से दर्द का बंधन बड़ा मशहूर है... Read more

यूँ ही मरने की बात न कर

गजल# *** यूँ ही मरने की बात न कर जीवन ऐसे सौगात न कर।1 रहमत है तू यार खुदा की कैसे भी तो खैरात न कर।2 आँख लड़ी तब मर्ज ब... Read more

गजल(सरहद)

#गजल# *** होंगे उनके ढ़ेरों मकसद भूल गये हैं वे अपनी जद।1 पढ़ते स्वार्थ- पुराण बहुत ही उनके अपने-अपने हैं पद।2 धरती को ... Read more

हर सुबह दीया बुझाता हूँ

हर सुबह दीया बुझाता हूँ शाम होते फिर जलाता हूँ।1 टूटते रहते यहाँ सपने आस मैं फिर से लगाता हूँ।2 कौन कहता है खता अपनी क्यूँ ... Read more

गीतिका

अभी तो बस जरा हमने कला अपनी दिखायी है समझ में लग रहा उसको भली सब बात आयी है।1 अमन की कोशिशों को अब तलक वह ढ़ोंग कहता था, लगा झट... Read more

गजल(लूट का धंधा करें जो वे सभी रहबर हुए)

लूट का धंधा करें जो वे सभी रहबर हुए जिंस कुछ जिनकी नहीं है आज सौदागर हुए।1 आशियाने जल रहे सब हो रहे बेघर यहाँ, अब परिंदे क्या उ... Read more

गजल

#गजल# *** नहीं चाहता जो कराती, बता दे, अलग राह तू क्यूँ चलाती बता दे?1 बहुत दूर पीछे रखा था नशा को, मगर बास घर से ही' आती... Read more