Mamta gupta

Joined November 2018

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यादें

तुम को छूकर जो हवा आती है अक्सर मेरी दहलीज पर ठहर जाती है पैगाम है कहीं से खास दुआओं का सहलाकर यूं मेरे मन को चली जाती है रंग खि... Read more

विघटन

अधरों पर मुस्कान सजाए ,दिल में सौ तूफान लिए लो चली आज अबला नारी ,फिर जीने का सामान लिए। अरमानों की चिता जलाकर, होम किए सपने सारे... Read more

यादें

महीनों बीत गए तुम्हे देखे बीते बरसों संग चले। मन यादों से रीत न पाया बन दीपक दिन रैन जले। कैसा साथ तुम्हारा था प्रिय कैसी दिवसो... Read more

तुम ही तो हो

शब्द तु्म्ही आकार तु्म्ही हो नयनों का परिहार तु्म्ही हो स्पर्शों का आभास तु्म्ही हो जीवन का मधुमास तु्म्ही हो हरदिन सामने रहते ह... Read more

इंतजार

तेरा आना,मन को मुदित करे तेरा आना रैन दिवस सब मेरे सपनो में खो जाना हर पल पंथ निहारु,सुधि तेरी न बिसारुं मैं बुनूं कोई आक्रृति,... Read more

मां

मां का तो आंचल बना है, अश्रु पी जाने के लिए। नयनोंं मे सागर रूका है, ममता बरसाने के लिए। ढेरों मन्नत मांग कर , मां बसाती है ज... Read more

मां

मां का तो आंचल बना है, अश्रु पी जाने के लिए। नयनो मे सागर रूका है, ममता बरसाने के लिए। ढेरों मन्नत मांग कर , मां बसाती है जो ... Read more