Mamta Devi

Joined January 2017

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मेरी बेटी

मेरी रचना, देहांश हो तुम। मेरे मन का पूर्णांश हो तुम। मेरी अनुकृति! मेरी बेटी ! मेरे होने का सारांश हो तुम। अपनेपन का लिबास पह... Read more