ashok Mahishware

Balaghat

Joined January 2017

I am poet and writter

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मुक्तक

१ जन्म जेल में लिए न्याय के अवतार ! युग चाहे बदले कंसों की सरकार ! चीर हरण द्रुपद सूताका का होना है ; कृष्ण तो है नहीं बस कौर... Read more

विरता का राग

ले कर असि उठा महाकाली का रूप सजा प्रचंडिका वेग धार खुद को खुद पर वार शीश काट अब दो-चार वक्त की यही पुकार भर ले तू अब हु... Read more

माही मुक्तावली

वर्ल्ड कप होता जहां में ,अगर बदजुबानी पर ! नेता तो लेकर आते दोनों हाथों कप ! भारत के भय से प्रतिभागी नहीं आते ; सारे खिलाड़ी जन्... Read more

माही के दोहे

मानव कहता युग बुरा ,युग मानव धिक्कार ! दूजे को दोषी बता ,हो कैसा उपचार!!१!! मैं मे मेरा कुछ नहीं ,सब तेरा ही हाथ ! जीवन पल ना ... Read more