mahesh jain jyoti

Mathura

Joined January 2017

“जीवन जैसे ज्योति जले ” के भाव को मन में बसाये एक बंजारा सा हूँ जो सत्य की खोज में चला जा रहा है अपने लक्ष्य की ओर , गीत गाते हुए, कविता कहते और छंद की उपासना करते हुए । कविता मेरा जीवन है, गीत मेरी साँसें और छंद मेरी आत्मा । -‘ज्योति’

Books:
बोल बंजारों के
7 चालीसा

Awards:

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लाड़ली लाड़ो

*लाड़ली लाड़ो* ************* लाड़न ते पारी लाड़ो ल्हौरी अति लाड़ली है, लाड़ कूँ लड़ाय मेरे मन कूँ लुभाय रे । मीठी तुतलाय बोल गोद... Read more

सुनो ये आवाज

*सुनो ये आवाज* ************** मन में उमंग होय तन में तरंग उठें, होवत हैं लीन दोउ बीज रुप जात है । फूटत है बीज सूक्ष्म चीर कै धरा... Read more

दर्द किसान का

*दर्द किसान का* ----------------------- अन्न को उगाता है जो, खेतों में चलाता हल, खून को जलाता है वो, बहाता पसीने को । चाँदी को ब... Read more

ब्रजभाषा में घनाक्षरी छंद

????? * श्री कृष्ण जन्म * **************** ब्रज वसुधा के कन नित जन-जन मन , फूलन में पातन में गूँजै नाम श्याम रे । मोहन मुरारी म... Read more

बाँसुरी

* बाँसुरी * -------- ब्रजभाषा में छंद ------------ जबहु निहारी कभी श्याम की सलौनी छवि , मन मेरौ श्याम की लुभाय गयी बाँसुरी । ... Read more