महावीर उत्तरांचली

नैनीडांडा (पौड़ी गढ़वाल) व दिल्ली

Joined January 2017

एक अदना-सा अदबी ख़िदमतगार

Books:
आग का दरिया (ग़ज़ल संग्रह); प्रतिनिधि ग़ज़लें (ग़ज़ल संग्रह); प्रतिनिधि रचनाएँ (विविध पद्य रचनाओं का संग्रह); प्रतिनिधि लघुकथाएँ (लघुकथा संग्रह); लोकप्रिय कहानियाँ (कथा संग्रह); महावीर कविराय (कुण्डलिया संग्रह)

Awards:
अनेक संस्थाओं द्वारा सम्मानित

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रामभक्त शिव

रामभक्त शिव जी बड़े, जपते आठों याम जन्मे वह शिवरात्रि को, पाया यूँ शिव नाम //1.// वर्ष रहा 'अड़तीस' वह, शिवरात्रि महापर्व पूरे ... Read more

बात भी कहना ज़रूरी

यूँ तो हर ख़्वाहिश अधूरी बात भी कहना ज़रूरी जी लिए यूँ उम्र काफ़ी हर तमन्ना पर अधूरी सोच का आधार आधा कहने को हर चीज़ पूरी ... Read more

कल्पतरू के रूप में

कल्पतरू के रूप में, बना आपका ट्रस्ट है समाज कल्याण में, संस्था का इन्ट्रेस्ट संस्था का इन्ट्रेस्ट, किया है जीवन अर्पित तन-मन-धन... Read more

हिन्दी–उर्दू सुख़नवरों के लिए छन्द–विधान

ग़ज़ल 'अरबी' से अथवा 'फ़ारसी' से 'हिन्दी' में आई—हम इस बहस में नहीं पड़ेंगे। इस पर पहले ही अनेक विद्वान बड़े-बड़े आलेख लिखकर अमर हो ... Read more

खुली है मधुशाला !!

हे बच्चन, तेरी हाला ! कैसे? हाय! पियें प्याला !! धर्म स्थल बन्द हुए हैं, मगर खुली है मधुशाला !! सकल विश्व में लोग डरे ! महाम... Read more

राष्ट्रकवि दिनकर दोहा एकादशी

हो दिनकर जी राष्ट्रकवि, स्वीकार हो प्रणाम राष्ट्र काव्य को आपने, दिया नया आयाम // 1. // चिन्तन शाब्दिक अर्थ से, मथकर निकले राम ... Read more

गायक मुकेश विशेष

हिंदी में गायक कई, लेकिन ग़ज़ब मुकेश हृदय लुभावन गायकी, बात थी यह विशेष मुकेश–राज कपूर क्या, दो शरीर इक जान दोनों की क्या खूब ... Read more

अच्छे ख़्वाब

ख़्वाब हमेशा अच्छे बुनना राहें अपनी खुद ही चुनना बन जा धुन में मगन कबीरा बात मगर तू सबकी सुनना दुनिया के जो मन को मोहे ... Read more

माला जपना

मन कहता, जिसको अपना जग समझे, उसको सपना प्रीत में सब कुछ भूल गए याद रहा, माला जपना आप निखर जाओगे खुद कुन्दन से सीखो तपना... Read more

विभिन्न–विभिन्न दोहे

बने रहेंगे दोस्त हम, मित्रगणों के बीच सभी चेहरे एक से, जितनी फोटो खींच //1.// अब न व्याप्त हो भय कहीं, अब न हो कहीं युद्ध उठो! ... Read more

गीतकार मजरूह पर दोहे

तन-मन तो था शब्द का, गीत-ग़ज़ल की रूह महावीर कविराय वो, शा'इर थे मजरूह कहने को हरपल नया, रहते थे तैयार मुम्बइया स्टाइल ग़ज़ब, फ़ि... Read more

दोहे नौकरशाही

वेतन थकती सीढियाँ, मजदूरी बेहाल तेज़ लिफ़्ट से है बड़ी, महँगाई की चाल तन खाये जो रात दिन, कहलाये तनख़ाह पूरनमासी चाँद है, माह में... Read more

मिसाल और मशाल

आशाओं की उम्रभर, जलती रहे मशाल कोरोना सम्मुख यही, एकता की मिसाल देशभक्ति है देश में, एकता की मिसाल मोदी जी के साथ हम, थामे र... Read more

दीप अव्वाहन दोहा एकादश

आशाओं के दीप से, मिटे निराशा भाव मोदी का मक़सद यही, भरे मानसिक घाव //१.// आकांक्षों के दीप से, जन-जन की यह आस सभी में नया जोश ... Read more

अप्रैल-फूल दोहा एकादशी

हाय! मार्च क्यों कर गया, यूँ जाने की भूल आया है सरकार फिर, आज अप्रैल-फूल // १. // आज अप्रैल-फूल है, खो गया कहाँ मार्च अँधेरे... Read more

ख़ताएँ बख़्श दो किरदार की

ख़ुदा को छू ले, तेरा यार आसमाँ पर है यक़ीं के साथ तेरा प्यार अब वहाँ पर है नहीं मिटेगी मुहब्बत ये मिटाये से भी यक़ीं मुझे ऐ सित... Read more

भगवान रफ़ी पर दस दोहे

सदा फ़रिश्ते की रफ़ी, तेरी ये आवाज़ है महफ़िल का नूर ये, सबको तुझपे नाज़ // 1. // सुरों का बादशाह तू, नग़मों का उस्ताद तुझसे रौशन महफ़िल... Read more

कोरोना दोहा एकादशी

कोरोना की मार से, होकर सब मजबूर बैठे हैं बेकार हम, कामगार मज़दूर // 1. // कोरोना के रोग ने, किया कुठाराघात संकट पूरे विश्व में... Read more

निर्भया के न्याय पर 3 कुण्डलियाँ

(१.) आशा देवी रो पड़ी, रोये बद्रीनाथ बिटिया तेरी मौत ने, किया कुठाराघात किया कुठाराघात, ज़ालिमों ने तड़पाया सात बरस के बाद, न्याय... Read more

मोदी-शाह जोड़ी पे दो कुण्डलिया

(१.) मोदी चुन कर आ गए, मित्रो दूजी बार सन चौदह के बाद फिर, बनी वही सरकार बनी वही सरकार, कार्य करती यह न्यारे अपना है कश्मीर,... Read more

रानू रानाघाट की

(1.) रानू की तक़दीर रेशमिया ने बदल दी, रानू की तस्वीर भीख मांगते खुल गई, रानू की तक़दीर रानू की तक़दीर, बन बैठी स्वर कोकिला लता... Read more

भाषा का सम्मान

जिनकी निज भाषा नहीं, उनकी क्या पहचान गूंगा उनका राष्ट्र भी, उनका क्या सम्मान! // 1. // भाषा की पहचान से, मुल्कों की पहचान भाषा... Read more

उत्तराखण्डी गीतों की लोकप्रिय अभिनेत्री रीना के निधन पर

(1.) 'पुष्पा छोरी' गीत पर 'पुष्पा छोरी' गीत पर, सदा रहोगी याद आज सभी हम कर रहे, अश्क़ों की बरसात अश्क़ों की बरसात, उम्र क्या ये... Read more

कोरोना माई के प्रताप पर 3 कुण्डलिया

(1.) कोरोना के ख़ौफ़ से कोरोना के ख़ौफ़ से, जीव-जन्तु भयभीत चीन की खुराफ़ात से, उत्पन्न मृत्यु गीत उत्पन्न मृत्यु गीत, कौन उसको सम... Read more

अनोखा उपाय

मुख्य सड़क पर भारी वाहनों का आवागमन और उन से उत्पन्न शोर ज़ारी था। जिसका अन्दर की गली में असर न के बराबर था, जहाँ सड़क पर तमाशाइयों... Read more

ज्योतिरादित्य सिन्धिया

सिन्धिया राजवंश में, उदित नवल आदित्य इकहत्तर का दिन प्रथम, प्रकट ज्योतिरादित्य प्रकट ज्योतिरादित्य, ग्वालियर जश्न मनाये भव्यतम ... Read more

वर्तमान मध्यप्रदेश पर कुण्डलियाँ

(1.) रह गए नाथ अकेले नाथ अकेले रह गए, छूटा सबका हाथ बाइस मंत्री दे रहे, 'महाराज' का साथ 'महाराज' का साथ, दिग्गी हुए भौचक्के ब... Read more

शक्ति दा

सड़कों पर वाहनों की आवा-जाही आज अपेक्षाकृत कुछ ज़ियादा ही थी। सुबह के वक़्त हरकिसी अपने काम पर पहुँचने की जल्दी। ऐसा लग रहा है कि मानव ... Read more

बूट पॉलिस वाला

जनवरी की ठिठुरती अलसुबह में वैशाली मेट्रो स्टेशन से महागुण अपार्टमेन्ट की तरफ़ मैं बढ़ा ही था कि बच्चो का एक समूह सामने से आता दिखाई द... Read more

आत्मज्ञान

झबरी बिल्ली कई दिनों से चूहे खा-खाकर उकता गई थी। रोज़ वही मांस, वही स्वाद। लानत है ऐसी ज़िंदगी पर। आज कुछ नया होना चाहिए। तभी उसके क... Read more

संघर्ष

"शुक्र है तुम्हें होश आ गया!" ज्वर से बेसुध पड़े युवा कृष्णा को थोड़ा होश में आता देख, बूढ़े मनोहर काका ने जैसे रब का शुक्रिया करते ... Read more

विधायक रामभरोसे

“देश को आज़ाद हुए आज 75 बरस हो चुके हैं लेकिन जनता की दशा और दिशा नहीं बदली। नेता आमिर होते चले गए और जनता ग़रीब और ग़रीब होती चली ग... Read more

शख़्स

इक शख़्स था, कहता रहा इस शहर में, तन्हा रहा वो ज़हर पीकर उम्रभर हालात से लड़ता रहा भीतर ही भीतर टूटकर वो किसलिए जीता रहा कन... Read more

नई परिभाषा

"अस्सलाम वालेकुम, भाईजान!" उसने बड़े अदब से कहा। "वालेकुम अस्सलाम!" आलम ने मुस्कुराते हुए अपरिचित का अभिवादन स्वीकार करते हुए कहा।... Read more

भगवान अग्रसेन पर दोहे

जन्मे अश्विन शुक्ल को, अग्रसेन भगवान। पौराणिक नायक रहे, नीति-कुशल विद्वान // 1. // द्वापर में श्रीकृष्ण थे, उनके समकालीन। समर्थ... Read more

रोमांटिक ग़ज़लें (भाग: एक)

(1.) मकड़ी-सा जाला मकड़ी-सा जाला बुनता है ये इश्क़ तुम्हारा कैसा है ऐसे तो न थे हालात कभी क्यों ग़म से कलेजा फटता है मैं शुक्... Read more

अन्ना आंदोलन से उपजी रचनाएँ (भाग: एक)

(1.) जो व्यवस्था भ्रष्ट हो जो व्यवस्था भ्रष्ट हो, फ़ौरन बदलनी चाहिए लोकशाही की नई, सूरत निकलनी चाहिए मुफ़लिसों के हाल पर, आंसू ... Read more

जनक छन्द के भेद

जनक छन्द की साधना ज्यों वामन का त्रिपुर को तीन चरण में नापना इस जनक छन्द में डॉ० ब्रह्मजीत गौतम जी ने छंद की पूरी व्याख्या ... Read more

संवेदना

"एक ज़बरदस्त टक्कर लगी और सब कुछ ख़त्म …" अपने मोबाइल से हवलदार सीताराम ने इंस्पेक्टर पुरुषोत्तम को ठीक वैसे ही और उसी अंदाज़ में कहा, ... Read more

दुनिया गोल है

बस खचाखच भरी हुई थी। कई डबल सीटों पर तीन-तीन सवारियाँ मुश्किल से बैठी हुई थीं। एक सज्जन बड़े आराम से पैर फैलाये बैठे थे। "भाई साहब ... Read more

प्रवचन में मुनि ज्ञान ने

प्रवचन में मुनि ज्ञान ने, कही बात गंभीर औरों से दुनिया लड़े, लड़े स्वयं से वीर लड़े स्वयं से वीर, कहे तरुण सन्यासी सारी दुनिया आज... Read more

वो महामुनि ज्ञान सागर

है दया करुणा की गागर वो महामुनि ज्ञान सागर संत है सबसे निराला वो ही मंदिर और शिवाला मुस्कुराता ज्ञान सागर...... है दया कर... Read more

दोहे भगवान महावीर वचन

भगवान महावीर की, बात धरी संदूक। मानवता को त्यागकर, उठा रहे बंदूक // १. // अपने घट में झाँककर, खुद से कर पहचान। इस विधि हर इक जी... Read more

22 दोहा पहेली

मुझे न कोई पा सके, चीज़ बड़ी मैं ख़ास। मुझे न कोई खो सके, रहती सबके पास //१. // छोटी-सी है देह पर, मेरे वस्त्र पचास। खाने की इक... Read more

तिले धारू बोला, प्यारी फ्योंळी (रोमान्टिक गढ़वाली गीत)

तिले धारू बोला, प्यारी फ्योंळी तेरी मुखड़ी यन चमकी, जन या रात जुन्याळी ओsss...होsss... तिले धारू बोला... लाखूं-हज़ारूं मा इक तू ह... Read more

योग

करते रहे जो योग जीवन बने निरोग परिश्रम करो सदैव कोई लगे न रोग सादा हो खान-पान भागे तमाम रोग भौतिक सुखों को त्याग ... Read more

विचित्र अनुभूतियाँ

रात मेरे कवि हृदय में उपजीं कई विचित्र अनुभूतियाँ— देख रहा हूँ कुंठित भाव संकुचित हृदय आँखों में अश्रुधार लिए बैसाखियाँ थाम... Read more

आदि सृष्टि से

एक कण से दूसरे कण तक.... एक प्राण से दूसरे प्राण तक.... पुरातन चेतन से नवचेतन तक.... न टूटने वाली निरन्तर सतत प्रक्रिया है आदि स... Read more

किस मशीनी दौर में रहने लगा है आदमी

किस मशीनी दौर में रहने लगा है आदमी ख़ून के आँसू फ़क़त पीने लगा है आदमी सभ्यता इक दूसरा अध्याय अब रचने लगी बोझ माँ-ओ-बाप को कहन... Read more

वक़्त

वक़्त तेज़ी से बदल रहा है लेकिन बदलते वक़्त में भी यह समझना आवश्यक है कि अपनी जड़ों को छोड़ देने से वृक्ष का अस्थित्व ख़त्म हो जा... Read more