मधुसूदन गौतम

अटरू राजस्थान

Joined June 2016

मै कविता गीत कहानी मुक्तक आदि लिखता हूँ। पर मुझे सेटल्ड नियमो से अलग हटकर जाने की आदत है। वर्तमान में राजस्थान सरकार के एक विभाग में सरकारी सेवा में कार्यरत हूँ।
कवि सम्मेलन ,एवं मंच संचालन के कार्य भी किया करता हूँ।
कवि सम्मेलन ,एवम टीवी चैनल कार्यक्रम के लिये
मेरा सम्पर्क नम्बर 9414764891

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अवार्ड भी यदा कदा मिलते रहते है। सॉशियल मीडिया की गतिविधियों पर भी ओर ,प्रत्येक्ष समारोह में भी। परन्तु यहां उनका जिक्र आवश्यक नही समझता।

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काश हम बेज़ुबां होते

काश हम बेज़ुबान होते। फिर न तो बदगुमान होते। और न ही बदजुबान होते। गर न होता किसी को , कुछ भी जताने का हुनर। तो कहां से होती किस... Read more

मुबारक हो जन्म दिन

जन्म दिन हो मुबारक तुझे । मेरी बिटिया तुझे जन्म दिन। नित नई कामयाबी मिले। फूल खुशियों के नित ही खिले। ख्वाब पूरे हो तेरे सभी... Read more

पियक्कड़ संत

कभी मर्ज़ी से पीते हैं ,कभी मुफ्त में पीते हैं। कभी बेशर्म बनकर के ,कभी इज़्ज़त से जीते हैं। कोई फोकट पिलाये तो ,बना सरकार भी डाले।... Read more

डर के साये में

डर के साये में जिये जाते है। खुद को तन्हा से किये जाते है। वक्त इक दिन यह चला जाएगा, घूँट संयम के पिये जाते है। डर के साये में... Read more

दीपक नही जलाये जी

जिनके दिमाग मे भूसा हो ,वो दीपक नहीं जलाये जी। क्या मालूम वो आग पकड़ले ,सारा भेजा जल जाये जी। यह बात बहुत ही गहरी है ,सबको मत समझाओ... Read more

एक डायलॉग

★पुराना शेर याद आ गया जो एक सेमिनार में लिखा था मैंने।★ चंद किताबें पढ़कर मेरे सिध्दांतों को समझने की कोशिश न करो। मेरे सिध्दांत... Read more

परवाह (लोक डाउन पर लिखी कहानी)

*क्यों की हमे परवाह है तुम्हारी* ★आया न कोई फोन खत , गए तीन दिन बीत। आखिर उस पर क्या कहाँ ,कैसी रही हो बीत।★ यह ख्याल बार बार ... Read more

इतना डर क्यो ?

*भय किससे,किसको ,किसलिये* ************************** थम सा गया है, यह जन जीवन , यह मचलते तन, पार्लर जाते बदन, उछलता यौवन, शरा... Read more

लोक डाउन में उपयोगी टिप्स मुक्तक के जरिये

★ लोक डाउन में उपयोगी टिप्स* ******************************* बंधें घर पर रहेंगे तो ,बताओ खाएंगे क्या जी? किया वो ही बताने का ,ज... Read more

समझते हो ना

तुम शब्दों को गोली मारो,मेरा मौन समझते हो ना। अपना रिश्ता क्या है भूलो,मैं हूँ कौन समझते हो ना। रिश्ते क्या है स्वाद बदलते , पककर ... Read more

भोजन ,भक्ति ,भोग

💐💐 आज का मुक्तक💐💐 भोग ,भक्ति, भोजन सदा , फल देते तन्हाई में। मूर्ख ही इनको करते ,केवल जग दर्शाई में। मन तुष्ट हो भी जावे , पर ... Read more

तू परिंदा है...

तू परिंदा है मर्ज़ी जहां तक तू उड़। तेरी मर्ज़ी पड़े उसजहाँ तक तू उड़। ************************** तुझको उड़ने से कोई नही रोकता। तेरा क... Read more

दुर्मिळ सवैया ,विधान सहित

*दुर्मिल सवैया* विधान दुर्मिल सवैया छंद 24 वर्णों में आठ सगणों (।।ऽ) से सुसज्जित होता है। जिसमें 12, 12 वर्णों पर यति का प्र... Read more

जला वतन को

ये आग बोलो ,किसने लगाई, ये पूछ टीवी एंकर रहे है। जला वतन को बेशर्म सारे , अजब सी बातें पूछ रहे है। बड़ा मजा ये लेते थे बुजदिल... Read more

जला वतन को

ये आग बोलो ,किसने लगाई, ये पूछ टीवी एंकर रहे है। जला वतन को बेशर्म सारे , अजब सी बातें पूछ रहे है। बड़ा मजा ये लेते थे बुजदिल... Read more

सवैया मत्तगयंद छन्द विधान सहित

मत्तगयन्द सवैया विधान मत्तगयन्द सवैया 23 वर्णों का छन्द है, जिसमें सात भगण (ऽ।।) और दो गुरुओं का योग होता है। मध्यकालीन एवम।आ... Read more

शिव स्तुति

हे आशुतोष सब मंगल कर जीवन मे न दंगल कर। तेरी पूजा में कौर कसर। हो जाती है गौर न कर। है आशुतोष सब मंगल कर। तू शक्ति स्वामी, श... Read more

रोला छन्द आधारित गीत

रोला छंद सममात्रिक छंद है। रोला छंद के चार पद (पंक्तियाँ) और आठ चरण होते हैं) इसका मात्रिक विधान लगभग दोहे के विधान के विपरीत होता ह... Read more

समझौता का जीवन

-- समझौतों का जीवन समझौता के पहियों पर,जीवन चलता आया है , जिसने वरना जो चाहा , सबको कब मिल पाया है। आंख खुली तो समझौता ,किस... Read more

हे बसन्त तू क्यो आया

हे वसन्त तू क्यों आया। दसों दिशा से चढ़ आया। मादकता का मौसम क्या, हर डाली इतराती है। सूखी सूखी टहनी पर , तेरी लाली छाती है। फूल... Read more

Slap day पर मुक्तक

*Slap day* हाथ की थाप लगे माँ की ,गुरु की मार मिले पटरी। डांट की मार बड़ों की ही ,बाप की मार बड़ी तगड़ी। और की मार नही अच्छी,खानी ... Read more

कृष्ण पिंड से

कृष्ण पिंड से निकली दुनियाँ,कृष्ण पिंड में जाएगी। कृष्ण तत्व को बिन समझे ,बात समझ नहीं आएगी। प्रेम ,घृणा सब पागलपन है ,घुप्प अंधेर... Read more

टेढ़े संग मुलाकात

*शिल्प रहित कुछ बन्ध* टेढ़े मेढे यार की टेडी टेढ़ी मैड़ी बात। मैं जानूँ क्या री सखी,क्या मेरी ओकात। टेढ़ो सो मेरो सखा ,बाँके वा... Read more

रोज दिवस पर गीत

सप्त श्रृंगार से धरा सुशोभित ,इस बासन्ती मौसम में। सप्त दिवस का सप्ताह नामित ,यह बासन्ती मौसम में। मदनोतस्व या वेलेंटाइन ,कुछ भी ... Read more

उड़ान

उड़ानें भर बड़ी भारी ,गगन को नाप बैठा मैं। कहां धरती फ़लक तक को , परो से माप बैठा मैं। थका थोड़ा तो आई याद ,मिल जाये पनाह माँ की , मग... Read more

डायलॉग

क-- क्या करते हो आजकल काम धंधा? ख-- सुबह थूंकता हूँ शाम को चाट लेता हूँ। Read more

मुक्तक अध्यात्म रस

💐💐 भोर वंदन💐💐 (एक मुक्तक मात्रिक छन्द ) ******************************** कंचन खरा निकष पर होता, चार जांच कर लेने पर। काय... Read more

लघुकथा

एक मनचले ने किसी गरीब के हाथ से रोटी छीनकर एक कुत्ते को डाल दी। गरीब ने मनचले को जब पकड़ कर मारना चाहा तो कुत्ते ने उस गरीब को क... Read more

दोहा छन्द ,चाणक्य नीति आधारित

*चाणक्य नीति आधारित दोहा छन्द का प्रयास* 1★ नियत बात को छोड़कर ,करे अनियती ध्यान। उसका निश्चित जानिये , कैसे हो कल्यान। 2★ ... Read more

रिश्ते कैसे कैसे

रिश्ते कैसे कैसे* ************************************ देव प्रबोधिनी एकादशी का दिन था। दुल्हन की विदाई का माहौल था। बारी बारी ... Read more

साहित्य स्वरूप

*वर्तमान में साहित्य * साहित्य एक व्यापक शै है। जिस प्रकार सृष्टि त्रिगुणात्मक स्वरूप लिए है उसी प्रकार साहित्य भी सकारात्मक,नका... Read more

एक चतुष्पदी यूँ ही

प्रेम जिसको भी होता है अंधा बना देता है। इश्क की क्या कहूँ यह भी बिन बात सजा देता है। मुहब्बत भी दुनिया को जी भर सताती है । दिल स... Read more

हैपी या अनहैपी दीवाली?

हेप्पी दिवाली कहने वालो तोते जैसे रटने वालो किस से बोल रहे हो तोलो फिर चाहो तो खुलकर बोलो किस का निकला आज दिवाला और किसकी मनी द... Read more

दीपावली**** ?

दीपावली आखिर आ ही गई। 15दिन से विशु के घर तैयारियाँ चल रही थी। 5 मज़दूर मिलकर पुताई ,रंग रोगन कर रहे थे। 3 बाईयां झाड़ू पौछा कर रही थी... Read more

हैपी दीवाली।

विष्णुपद छंद पर कलम....ई। 16 +10 पंक्ति पूँछ(पदांत) 112 ******************************* दीपमालिका के अवसर पर प्रेमिल दीप जले।... Read more

रूप चौदस

सुबह उठकर करो मालिश, मनालो रूप चौदस को। मिला उबटन लगालो जी, निखारो रूप चौदस को। लगाकर दूध थोड़ा सा, बदन कमनीय कर लो जी, मगर मुस... Read more

बन्धन

******अल सुबह****** चल पंछी पिंजरे के अंदर। देख भला बन्धन के मंजर। हो आजाद बहुत तू घूमा। इस दर से उस दर को चूमा। बन्धन तोड़ निक... Read more

एक डायलॉग

मैंने बहुत अमीरों को गरीब होते देखा है। हेल्थ की वेल्थ गंवाकर , कमाते देखा है। Read more

दीवाली की सफाई

*लिखाई या सफ़ाई* ******************************* अरे सुनो तो .. क्या है यार, फ़िज़ूल ही डिस्टर्ब कर रही हो। अरे ऐसा क्या कर रहे ह... Read more

मतदान दिवस पर

सुनो सब को ही बतलाओ,दिवस मतदान आया है। बड़े दिन बाद ऐसा चांस हम सबने जो पाया है। निकलकर घर से जाना है ,हमें मतदान करना है। समझकर ... Read more

एक आंख मार गई

*मनहरन कवित्त* ******************** एक आंख मार गई ,दिल को उजाड़ गई। जीभ को निकाल कर ,नींदें मेरी छीन ली। कब दिन रात आये , कब... Read more

किसलिये

मुँह में रखते राम आखिर किसलिये। गर हुए बदनाम आखिर किसलिये। प्यार में पगलाये जाते हो सुनो । पूछते अंजाम आखिर किसलिये। *कलम ... Read more

स्वाभिमान की चिड़िया

स्वाभिमान की चिड़िया भी लगती बिलकुल अलबेली है। सबको अच्छी लगती है पर उड़ती निपट अकेली है। नाज़ुक इतनी होती है, बातों से घायल होती है।... Read more

करवा चौथ टशन

हाँ ,कितनी देर में आ रहे हो यही लगभग 8.30 पर क्यो इतनी देर क्यों? अरे तुम्हारी कॉल अटेंड कर ली जो ही बहुत है। 100 अटेंडेंट... Read more

गुनहगार कौन?

सबूती आधार पर बेशक संज्ञान ले। हर चीज़ का सबूत होता है जान ले। बेगुनाही का सबूत नही पर पास में। तो क्या किसी को गुनहगार मान ले। ... Read more

खूब कमाते मगर भिखारी

तन मेरा था मन मेरा था , लेकिन मिलन नही होया। बचपन में डरता पापा से, छुप छुप कर तन्हा रोया। थोड़ा बड़ा हुआ तो कांधे, बांध दिया म... Read more

नोकरी

मेरी इकलौती महबूबा, बताये रोज़ नखरे क्यो? तुझे मालूम तेरे बिन , नही कुछ भी कभी हूँ मैं। लगाती रहती है ठोकर, पड़े मरज़ी जिधर ही त... Read more

हिम्मत न हार यार

वक्त पर निर्भर है दोस्त, हाय, बाय ,नमस्कार। पर तू मत बदलना , कम मत करना प्यार, कुछ भी हो मेरे मन, हिम्मत न हारना यार। सदियों ... Read more

वक्त

है वक्त तू ठहरता नही है। मैं तेरे साथ चलता नही हूँ। तू किसी को कब तलाशता, मैं तुझे कभी मिलता नहीं हूं। तू ठिक जाता है जबकि ... Read more

ज्ञानी मत बन

बहूत सारे कष्ट पायेगा ज्ञानी मत बन। नजारे नही देख पायेगा ध्यानी मत बन। सही मायने में भौंट बनकर जी ले एक दिन सारे सुख ... Read more