मध्यप्रदेश में सहायक संचालक…आई आई टी रुड़की से पी एच डी…अपने आसपास जो देखती हूँ, जो महसूस करती हूँ उसे कलम के द्वारा अभिव्यक्त करने की कोशिश करती हूँ…पूर्व में ‘अदिति कैलाश’ उपनाम से भी विचारों की अभिव्यक्ति….

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हमारा हिन्दी प्रेम

**************** हमारा हिन्दी प्रेम **************** कल हिन्दी दिवस पर दिन भर जो अपने हिन्दी प्रेम के गाने थे गा रहे आज ... Read more

सुनो प्रद्युम्न!

सुनो प्रद्युम्न तुम्हारी निर्मम हत्या पर मैंने शोक नहीं मनाया और न ही मनाया मैंने एक पल का भी मातम बल्कि अनगिनत सवालों से घिर... Read more

कितना कुछ बदल गया है इन दिनों

कितना कुछ बदल गया है इन दिनों अब नहीं खिलते हैं वो कचनार न ही खिलती हैं वो चम्पा और चमेली भी नहीं बिखेरती रातरानी भी वो पहले सी ख... Read more

आखिर तुम भी तो एक पुरुष ही हो न

कितनी आसानी से कह दिया था तुमने सब कुछ ठीक तो है पर तुम भी अच्छी तरह जानते थे कुछ भी तो ठीक नहीं था जब कोई अंदर ही अंदर दर्द... Read more

सजा.... एक स्त्री होने की

हम दोनों एक ही सफर पर तो निकले थे वो भी साथ साथ मुझे सफर के शुरुआत में ही कहा गया कि मैं इस सफर के काबिल नहीं हूँ पर मैं कहाँ म... Read more

माँ मेरी मंदिर भी मस्जिद, माँ ही गिरजाघर लगे......माँ के कदमों में मेरे तो देख चारों धाम है

अब नहीं मुझको पता दिन है भला या शाम है आदमी देखो यहाँ हर दूसरा गुमनाम है काम जो करता रहा उस पर उठी ये उंगलियाँ जो कसीदे झूठ के ... Read more

तुम मुझसे क्यूँ रूठी हो

हर साल तो इस समय तक तुम आ ही जाती थी, पता नहीं इस साल क्या हो गया है तुम्हें। तुम्हें तो पता ही है कि हर साल मुझे तुम्हारा कितना इं... Read more

काश मुझमें भी होता हुनर लाखों कमाने का

काश मुझमें भी होता बिना खून-पसीना बहाये एकड़ भर ज़मीन से लाखों कमाने का हुनर और बन जाता मैं भी वो अखबारी कृषक पर मैं तो बना... Read more

गुलाबों की तरह खिलना कहाँ आसान होता है

गुलाबों की तरह खिलना कहाँ आसान होता है गले काँटों से मिल हँसना कहाँ आसान होता है मिटा देते हैं ये खुद को लुटाने के लिए खुश्बू ख़ुश... Read more

खेती का खेल

खेती का भी खेल अजब है, जीत के भी हम हारे हैं अन्नदाता कहलाते फिर भी भूखे पेट हमारे हैं धूप, आँधियाँ, बारिश, पाला, हमको नहीं डिगा... Read more

सीमा पे तुम कब से गए हो.....सैनिक घर भी आ जाओ

दिन, महीनें, बरस हैं बीते, कुछ तो आस बँधा जाओ सीमा पे तुम कब से गए हो, सैनिक घर भी आ जाओ बिटिया रस्ता देख रही है, पापा फिर कब आओ... Read more

मुझको हरेक खेत ही जलता दिखाई दे- कुछ शेर

ऐसी लगी है आग सियासत की आजकल मुझको हरेक खेत ही जलता दिखाई दे ************ बेसबब, बेचैन होकर, बह रही है जिंदगी आजकल खुद... Read more

बचपन तेरा जीवन सार सिखाता है

बचपन तेरा बच्चा बनकर, मुझको बहुत भगाता है जो तुतलाकर बोले माँ तू, दिल मेरा भर आता है। तेरा ठुनक ठुनक कर चलना, चार कदम पर गिर जान... Read more

तेरे आने की खबर

यूँ लगा दी दस्तक किसी ने दरवाजे पर खोला दर तो दिखा आसमां पे बरसों बाद मुस्कुराता हुआ चाँद रातरानी की खुश्बू भरी हवा ... Read more

बाधायें भी हार मान ले, आगे बढ़ते जाना है

मुश्किल कितनी भी आ जाये, तुमको ना घबराना है बाधायें भी हार मान ले, आगे बढ़ते जाना है मन हारा तो जग हारे तुम मन से हार नहीं जाना... Read more

मेरा पहला रक्तदान (संस्मरण)

दिसंबर २००८ की बात है…… उत्तर भारत की ठण्ड को तो आप सभी जानते ही हैं और वो भी दिसंबर की ठण्ड…… १० दिन बाद ही हमारे एंड टर्म (सेमेस्ट... Read more

आइये पर्यावरण के लिए इस बार कुछ नया करें

लीजिये हर साल की तरह एक और पर्यावरण दिवस चला गया…… हर साल की तरह इस साल भी हर जगह बस २४ घंटों के लिए पर्यावरण और उसकी सुरक्षा की बात... Read more

चाय की प्याली कहे कुछ भेज दो अब चिट्ठियाँ

बून्द इक बारिश की देखो आज जो उतरी यहाँ ख्वाहिशें दिल में उठी पूछे सनम तुम हो कहाँ हो गए बेचैन दिन ये ख़्वाब भी तन्हा से हैं मुस्... Read more

नेताजी का पर्यावरण दिवस

आज पर्यावरण दिवस है………… ये पर्यावरण दिवस क्या होता है भैया?………… अरे कुछ नहीं, बस साल में एक दिन लोग ये दिखावा करते हैं कि हम भी पर्य... Read more

हर ख़ुशी सबको मिले ऐसी जमीं रब चाहिए

ख्वाहिशें ऐसी कहाँ थी आसमां अब चाहिए लोग हो बेचैन ऐसी जन्नतें कब चाहिए एक दूजे पे भरोसा हो अमन चारों तरफ हर ख़ुशी सबको मिले ऐसी जम... Read more

क्या फल और सब्जियाँ भी इंसान के लिए जानलेवा साबित हो सकते हैं?

आज अख़बार के पन्ने पलटते-पलटते एक खबर पर ज्यों ही नजर पड़ी, तो नजर हट नहीं पाई…. अरे अरे ज्यादा खुश मत होइए, हमारी नजर जीरो फिगर वाल... Read more

तेरे बिन

तेरे बिन ___________ मै यहाँ हूँ दिल वहाँ है बिखरा बिखरा सा अपना जहां है सपनों की इस दौड़ में खोये अपने गुम जाने कहाँ हैं ... Read more

सपना नहीं टूटा है मेरा

सपना नहीं टूटा है मेरा और ना ही टूटी हूँ मैं बस एक धुंध में खोई थी तूफानों के बीच/ नहीं देख पा रही थी मैं साफ़ साफ़ कौन सही ह... Read more

लो फिर आ गया आत्महत्याओं का मौसम

अभी दसवीं तथा बारहवीं का परीक्षा परिणाम आये एक दिन भी नहीं हुए हैं. हमें अपने आस पास और साथ ही दूर दूर सभी जगह से एक साथ, एक ही तरह ... Read more

हाय ये फेसबुकिया ज्योतिषी

आजकल फेसबुक पर कई लोगों को बड़ा अजीब सा शौक चर्राया है जिसे देख कर कभी-कभी इतनी जोर की हँसी आती है कि शायद अगर वो व्यक्ति हमें ऐसे पा... Read more

हाँ तुम! बस तुम!

झरनों के संगीत में हो तुम नदियों के हर गीत में हो तुम सूरज की चाहत में पागल सूरजमुखी की प्रीत में हो तुम हाँ तुम! बस तुम! ... Read more

रोज़ शाम होते ही

रोज शाम होते ही समेटने लगती हूँ मैं दिन भर के अपने आप को अपने अंदर चाय के एक अदद प्याले में उड़ेल लेती हूँ माँ की वो खट्टी-म... Read more

पापा! जीवन जी कर दिखाते हैं

पापा नहीं सिखाते कैसे जीना है जिंदगी वो तो जीवन जी कर दिखाते हैं पापा नही दिखाते कौन सी है राह सच्ची वो तो मंज़िल पर पहुँचना... Read more

पापा! मेरे लिए महान तुम्हीं हो!

पुण्यतिथि पर पापा की याद में *********************** थाम के मेरी नन्ही ऊँगली पहला सफ़र आसान बनाया हर एक मुश्किल कदम में पापा ... Read more

करें क्यूँ कोख ख़ाली है

जहाँ की रीत भी देखो, भला कैसी निराली है हैं नौ दिन पूजते देवी, मगर नारी को गाली है लगे प्यारी बहन, माता, मिले सुंदर बहू, पत्नी जो... Read more

आ गया है साल देखो फिर नया..... कर दुआऐं, मुस्कुराओ तुम ज़रा

****************************** आप सभी को नववर्ष की अनन्त शुभकामनाएं ****************************** आहटें अपनी सुनाओ तुम ज़रा इक... Read more

हर सफर में मुस्कुराना चाहिए

फ़ासलें दिल के मिटाना चाहिए फूल होठों पर खिलाना चाहिए हर दुआ होगी तेरी पूरी मगर सर इबादत में झुकाना चाहिए ग़म मिले हमको या मिल... Read more

ज़िन्दगी के बदलते रंग

दिनों दिन मेरे जज्बात बर्फ की तरह होते जा रहे हैं झक सफेद बेरंग से ठंडे-ठंडे जब भी अकेला होता हूँ निपट तन्हाइयों में ढ... Read more

मनाओ मिलकर होली

टेसू, सेमल खिल उठे, बजे बसन्ती राग मस्ती, रंग, गुलाल से, देखो सजता फाग देखो सजता फाग, मस्त मस्तों की टोली भूलो सारे बैर, मनाओ मिल... Read more

इस होली रंग लो मुझे, साजन अपने रंग

खुशियाँ लेकर आ गया, होली का त्यौहार गाल रंगे गुलाल से, रंगों की बौछार टेसू, सेमल खिल उठे, बजे बसन्ती राग मस्ती, रंग, गुलाल से, ... Read more

देख फिर आई होली

पीली सरसों ने किया, स्वर्ण कनक मनुहार नीली अलसी मिल हुआ, अजब धरा श्रृंगार अजब धरा श्रृंगार, देख फिर आई होली रंग, अबीर, गुलाल, मस्... Read more

तुम बिन कब तक रहूँ अधूरी

जब से गये हो तुम मेरे सजना याद नहीं दिन रात महीना दिन सूना है, रात है सूनी दिल की हर एक बात है सूनी बिंदियाँ रूठी, रूठे कंगन... Read more

क्योंकि आँखे अक्सर धोखा दे देती हैं

आँखों देखी भी अक्सर झूठ हुआ करती हैं आधा-अधूरा सच या पूरा झूठ कई बार जैसा दिखता है या दिखाया जाता है सच में वैसा होता ... Read more

क्या मुर्दे भी कभी कुछ सोचते हैं

ना मैं कुछ देख सकता हूँ ना सुन सकता हूँ और ना ही मैं कुछ बोल सकता हूँ मैं नहीं जानना चाहता क्या हो रहा है मेरे आसपास कौन जि... Read more

शिवशक्ति फिर आ जाओ... हर युग की पुकार हो

तीनों लोकों के कर्ता जीवन का आधार हो शिवशक्ति फिर आ जाओ हर युग की पुकार हो शिव से सम्भव जीव है शक्ति से प्राण वायु कण कण में... Read more

मैं और मेरा चाँद

मैं और मेरा चाँद अक्सर अँधेरी रातों में चाय की प्यालियों में डूबकर जागा करते हैं रात भर कभी तोड़ते हैं खुशियों का गुल्लक बाँट... Read more

काँटों को अपनाकर देखें

आओ फूल खिलाकर देखें काँटों को अपनाकर देखें खुली आँख से रातों में अब सपने नए सजाकर देखें बड़े दिनों से दर्द सहा है चलो आज मुस... Read more

ऐ खुदा, सुन ले दुआऐं, ग़म का अब रोज़ा रहे

जिंदगी में हर तरफ बस प्यार ही बिखरा रहे ऐ खुदा, सुन ले दुआऐं, ग़म का अब रोज़ा रहे जिंदगी की दौड़ में तो थक गया ख़स्ता बदन अब बुढ़ापा... Read more

नया जीवन सजाया है

तुम्हारा हाथ जो साजन मेरे हाथों में आया है बजे संगीत धड़कन में, दिलों ने गीत गाया है भले खुशियाँ हों चाहे गम, रहेंगे साथ हम दोनों ... Read more

अक्सर याद बहुत तुम आती हो.......मीठा सा दर्द जगाती हो

यादों में जब तुम आती हो रुनझुन पायल छनकाती हो खुशियों का मन गूंजे नगमा हाथों कंगना खनकाती हो याद जो आये घड़ी मिलन की मेहंदी र... Read more

डर के आगे जीत है (संस्मरण)

आज सोशल मीडिया पर एक मित्र द्वारा प्रेषित ये फोटो देखकर मुझे अपना बचपन फिर से याद आ गया... कुछ दर्द भरा बचपन.... ना ना ना... गलत ना ... Read more

जिंदगी की चार दिशाएँ

मेरे दोनों हाथ, दोनों पैर बँट गए हैं चारों दिशाओं में और मेरा शरीर लटक रहा है त्रिशंकु की तरह बीच अधर में मुझे हर एक दिशा जा... Read more

शुभ बसन्त

नए पल्लव, खिली सरसों, है बौराई सी अमराई बसन्ती रंग में मिल फाग फिर से टेसुआ होगा सजाये रंग कुदरत ने, सरसता से भरी दुनिया बदल कर... Read more

हमारी देशभक्ति

जनवरी के अंतिम हफ्ते में कुकुरमुत्ते की तरह उग आती है देशभक्ति हम सब के भीतर फिर लहू में आ जाता है उबाल खुद ब खुद देशभक... Read more

आधा सावन बीत गया है, बालम मोहे मन भाने दो

कब से मुझसे कहते साजन सावन को तुम आने दो आधा सावन बीत गया है बालम मोहे मन भाने दो। रँगबिरँगी खिलती कलियाँ कहती कर लूँ सोलह श्... Read more