कल्पना 'कल्पना'

सीतापुर

Joined November 2018

हिंदी साहित्य परास्नातक

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मां, लिखते लिखते खत्म रोशनाई हुई

मां तुझे सोचकर मैने जो भी लिखा , लिखते लिखते खत्म रोशनाई हुई। ग़म हवाओं ने मुझको कभी जो छुआ दर्द तुझको ही सीने में पहले हुआ म... Read more