पता-महेशपुरा (कोटखावदा) जयपुर
अध्यापक
समसामयिक लेखक
शिक्षा – NTT, BA ,BE.d MA (हिन्दी )
बडा बनने से ज्यादा मुझे
सामाजिकता की जरूरत है

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राजनगर

देख-राज रूप लोचन ललचाऐ राजसिंह की नगरी जन पहचाने है यह नगर जैसा नागर मंदिर----1 संगमरमर की नीवों वाला राजनगर जिसकी पहरेदारी करता ... Read more

वे गुज़रे हुए दिन

वे गुजरे हुए दिन कितने अच्छे लगते है जो गुजारे दोस्तों के साथ जो गुजारे परिवार के साथ कितने अच्छे लगते है वे गुजरे हुए दिन ... Read more

किसान और कृषि

किसान और कृषि एक ही सिक्के के दो पहलु हैं दोनों में से किसी को भी अलग नहीं किया जा सकता हैं भारतीय समाज में किसानो की दयनीय दशा को द... Read more

अच्छे दिन

आएगें अच्छे दिन ज़रा ठहरो तो सहीं सपने होगें साकार सपने सजाओं तो सही अभी तो सत्ता का नशा है होना तो अभी बाकी हैं आएगें अच... Read more

विदाई

दो और तीन मिलाकर थे तुम कुल उतने ! मेरे शिक्षक जीवन के प्रथम शिष्य थे तुम उतने ! इतिहास बना गए यादों का कैसे भूलूँ तुम्हे ! विदा मा... Read more

वीरांगना

शशि मुख पर घूंघट डाले आँचल में विरह दु:ख लिए जीवन के गोधूलि में कौतूहल से तुम आयी . नवयौवन में अर्धांगिनी बनकर तुम आयी अभी त... Read more

बेटी

संसार का कोई बंधन जो तुमसे बंधा न हो ऐसा कोई रिश्ता नहीं जिसमें तुम्हारा नाम न हो. ऐसा कोई घर नहीं जिसमे तुम्हारा वास न हो ... Read more